CBSE कक्षा 12 के नतीजों में डिजिटल ग्रेडिंग गड़बड़ी
Published on: May 27, 2026
By: BTNI
Location: New Delhi, India
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कक्षा 12 के नतीजों में इस बार एक बड़ी डिजिटल लापरवाही सामने आई है। पहली बार पूर्ण रूप से लागू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (On-Screen Marking) व्यवस्था में गंभीर तकनीकी खामियां, खराब स्कैनिंग, अधूरी उत्तर पुस्तिकाएं और गलत छात्रों की शीट्स का मुद्दा उभरकर सामने आया। इसके चलते रिकॉर्ड 4 लाख छात्रों ने अपने अंकों को चुनौती दी है। छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश व्याप्त है, कई छात्रों की JEE और NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं की तैयारी पर पानी फिर गया है। कुछ मामलों में तो छात्रों द्वारा आत्महत्या जैसे कदम उठाने की खबरें भी सामने आई हैं।
CBSE ने इस वर्ष पहली बार पूर्ण रूप से ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का इस्तेमाल किया। इसके तहत भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर PDF में बदलकर रिमोट लोकेशन्स से मूल्यांकन कराया गया। Coempt EduTech कंपनी द्वारा विकसित Onmark प्लेटफॉर्म पर यह पूरा सिस्टम चलाया गया। लेकिन सिस्टम की कमजोरियों ने पूरे मूल्यांकन प्रक्रिया को त्रासदी में बदल दिया। खराब स्कैन क्वालिटी, कई पन्नों का अधूरा स्कैन, गलत छात्र की उत्तर पुस्तिका का आवंटन और मूल्यांकन में त्रुटियां आम समस्या बन गईं। नतीजे 13 मई को घोषित होने के तुरंत बाद छात्रों के शिकायतों का सैलाब उमड़ पड़ा।
रि-इवैल्यूएशन पोर्टल भी फेल
शिकायतों के बाद CBSE ने रि-इवैल्यूएशन की सुविधा दी, लेकिन पोर्टल पर इतनी भारी ट्रैफिक हुई कि वह क्रैश हो गया। डेडलाइन को 24 मई तक बढ़ाना पड़ा। लाखों छात्र घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन कई को अपनी कॉपी तक नहीं मिल सकी। एक छात्र तन्मय कश्यप ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनके अंकों में भारी गिरावट आई है, जिससे JEE और NEET में अच्छे कॉलेज का सपना चूर-चूर हो गया। ऐसे कई छात्र हैं जिनकी जिंदगी का एक महत्वपूर्ण मोड़ इसी लापरवाही की भेंट चढ़ गया।
सुरक्षा खामियां भी उजागर
मामला सिर्फ ग्रेडिंग गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहा। एक एथिकल हैकर ने Onmark प्लेटफॉर्म की गंभीर सुरक्षा कमजोरियां उजागर कर दीं। प्लेटफॉर्म में हार्डकोडेड मास्टर पासवर्ड का इस्तेमाल किया गया था, जो पिछले परीक्षा फेलियर मामलों से भी जुड़ा पाया गया। यह खुलासा पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। इतनी संवेदनशील परीक्षा प्रक्रिया को ऐसे अनसिक्योर प्लेटफॉर्म पर सौंपना खुद में बड़ी लापरवाही है।
छात्रों पर क्या बीती?

कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी कहानियां साझा कीं। कुछ ने बताया कि उनकी उत्तर पुस्तिका में सिर्फ 2-3 पन्ने ही स्कैन हुए थे, बाकी गायब थे। कुछ को दूसरी छात्र की शीट मिली। एक छात्रा ने बताया कि उसके अंक 90+ की जगह 60 के आसपास आ गए, जिससे मेडिकल कॉलेज का सपना टूट गया। कुछ मामलों में छात्रों की निराशा इतनी बढ़ी कि उनके परिवारों ने आत्महत्या की कोशिशों की सूचना दी। IIT दिल्ली और अन्य संस्थानों से जांच के आदेश दिए गए हैं, लेकिन छात्रों को तत्काल राहत की जरूरत है।
लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा?
यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। CBSE बोर्ड, शिक्षा मंत्रालय और Coempt EduTech कंपनी — तीनों पक्षों पर लापरवाही का आरोप है।
#CBSE की जिम्मेदारी: बोर्ड ने बिना पूरी टेस्टिंग और पायलट प्रोजेक्ट के पूरे देश में इस सिस्टम को लागू कर दिया। पिछले वर्षों में भी पायलट में समस्याएं आई थीं, फिर भी पूर्ण रोलआउट किया गया। स्कैनिंग क्वालिटी चेक करने की कोई मजबूत व्यवस्था नहीं रखी गई।
#Coempt EduTech की जिम्मेदारी: कंपनी का प्लेटफॉर्म असुरक्षित था। हार्डकोडेड पासवर्ड जैसी बुनियादी गलती किसी प्रोफेशनल एजुकेशन टेक कंपनी से उम्मीद नहीं की जा सकती। पिछले फेलियर के बावजूद उन्हें कॉन्ट्रैक्ट दिया जाना संदिग्ध है।
#शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी में ढिलाई बरती। इतनी बड़ी परीक्षा प्रक्रिया को प्राइवेट कंपनी के भरोसे छोड़ना और उसकी क्षमता जांचे बिना अनुमति देना गंभीर प्रशासनिक चूक है।
विपक्षी पार्टियां अब न्यायिक जांच की मांग कर रही हैं। कई सांसदों और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले की स्वतंत्र CBI या न्यायिक आयोग से जांच होनी चाहिए। प्रभावित छात्रों को तत्काल अंक सुधार या पुनः परीक्षा का विकल्प दिया जाए।
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व्यवस्था में सुधार की जरूरत
यह घटना डिजिटलीकरण के नाम पर बिना तैयारी के आगे बढ़ने की कीमत बताती है। शिक्षा क्षेत्र में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल जरूरी है, लेकिन छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। CBSE को चाहिए कि वह पारदर्शी तरीके से सभी शिकायतों का निपटारा करे, प्रभावित छात्रों को मुआवजा दे और भविष्य में ऐसे सिस्टम को लागू करने से पहले कम से कम 2-3 वर्ष का पायलट प्रोजेक्ट अनिवार्य करे।Coempt EduTech पर भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। शिक्षा मंत्रालय को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी। छात्रों का विश्वास टूटा है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में बोर्ड परीक्षाओं पर ही सवाल उठ सकते हैं।
सरकार और बोर्ड से अपील
प्रधानमंत्री कार्यालय और शिक्षा मंत्री से छात्रों की अपील है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें। 4 लाख छात्र सिर्फ आंकड़े नहीं हैं — वे सपने देखने वाले युवा हैं, जिनकी जिंदगी इस लापरवाही से प्रभावित हुई है। तत्काल राहत पैकेज, पारदर्शी जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई ही इस संकट का समाधान हो सकता है।यह पूरा मामला भारतीय शिक्षा व्यवस्था के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की कमियों को उजागर करता है। उम्मीद है कि CBSE और सरकार छात्र हित को सर्वोपरि रखते हुए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाएगी। छात्रों का भविष्य किसी भी कीमत पर नहीं खेला जाना चाहिए।



