सुरक्षा vs धार्मिक संवेदनशीलता का पुराना विवाद,
अब नई शुरुआत?
Published on: May 24, 2026
By: BTNI
Location: Kolkata, India
नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NSCBI) के परिचालन क्षेत्र के अंदर स्थित 136 साल पुरानी गौरीपुर जामे मस्जिद (जिसे स्थानीय रूप से बांकरा मस्जिद भी कहा जाता है) को शिफ्ट करने की प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद केंद्र और राज्य सरकार के बीच बढ़े तालमेल ने इस दशकों पुराने मुद्दे को नई गति दी है। जिला प्रशासन, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) और स्थानीय अधिकारियों की लगातार बैठकें और साइट विजिट हो रही हैं।
मस्जिद की पृष्ठभूमि: एयरपोर्ट से पहले बनी इमारत
यह मस्जिद 1890 के दशक में बनी थी, जब इलाका एक गांव (बांकरा या आसपास का क्षेत्र) था। उस समय यहां कोई एयरपोर्ट नहीं था। ब्रिटिश काल में 1920 के दशक में डम डम एयरड्रोम (आधुनिक कोलकाता एयरपोर्ट का पूर्व रूप) विकसित हुआ, और बाद में एयरपोर्ट का विस्तार हुआ तो मस्जिद एयरपोर्ट परिसर के अंदर आ गई।
विवाद कब शुरू हुआ?
पिछले 30 वर्षों से यह मुद्दा सुरक्षा, एविएशन नियमों और रनवे विस्तार को लेकर उठता रहा है। मस्जिद द्वितीयक रनवे (Runway 2) के उत्तरी छोर से मात्र 165 मीटर की दूरी पर स्थित है और बाउंड्री वॉल के अंदर करीब 150 मीटर अंदर है। इससे रनवे का टचडाउन पॉइंट छोटा हो जाता है, जिससे बड़े विमानों (wide-body) की लैंडिंग/टेकऑफ सीमित रहती है और आपात स्थिति में जोखिम बढ़ता है।
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36 साल पहले (लगभग 1990 के आसपास) या उसके बाद विवाद:
1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने रिलोकेशन प्रस्ताव पर ‘Not Approved’ लिखा था। 2002-2003 में केंद्र के प्रयास (शाहनवाज हुसैन के समय) के बावजूद राज्य सरकार ने रनवे को डायवर्ट करने का फैसला किया, मस्जिद नहीं हटाई। बाद में ममता बनर्जी सरकार के समय भी राजनीतिक और धार्मिक संवेदनशीलता के कारण मामला अटका रहा। AAI ने कई बार बड़े प्लॉट पर नई, बड़ी मस्जिद बनाने का ऑफर दिया, लेकिन स्थानीय कमेटी ने अस्वीकार कर दिया।
उस समय लोगों की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से धार्मिक संवेदनशीलता पर केंद्रित रही। स्थानीय मुस्लिम समुदाय और कुछ राजनीतिक दल इसे सांप्रदायिक मुद्दा मानते थे। विपक्ष और कुछ नागरिकों ने सुरक्षा, यात्री सुविधा और राष्ट्रीय संपत्ति (एयरपोर्ट) के विकास पर सवाल उठाए। मस्जिद को “ऐतिहासिक” बताकर बचाने की कोशिश हुई, जबकि आलोचक कहते थे कि एयरपोर्ट के अंदर धार्मिक स्थल का होना अंतरराष्ट्रीय एविएशन मानकों (ICAO) और सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।
वर्तमान स्थिति: नई सरकार, नई उम्मीद
हाल ही में जिला प्रशासन और AAI की टीम ने मस्जिद का दौरा किया और कमेटी से बातचीत की। मस्जिद कमेटी के सदस्यों ने सहयोग का आश्वासन दिया है, लेकिन उन्होंने बड़े मुस्लिम संगठनों (जैसे Jamiat) से परामर्श की बात कही है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, ईद तक फैसला टाला जा सकता है।
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AAI और केंद्र का पक्ष:
सुरक्षा और उड़ान संचालन में सुधार। कोलकाता एयरपोर्ट (देश का पांचवां busiest) की क्षमता बढ़ाना। रनवे एक्सटेंशन से बड़े विमानों और ज्यादा ट्रैफिक का संचालन संभव।
विरोध का पक्ष:
136 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत। धार्मिक भावनाएं आहत न हों। वैकल्पिक जगह पर बेहतर सुविधाओं के साथ शिफ्टिंग।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
यह सिर्फ एक इमारत का सवाल नहीं है। कोलकाता एयरपोर्ट की क्षमता, यात्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संभावना और बंगाल की नई राजनीतिक दिशा इससे जुड़े हैं। अगर सफल रहा तो यह विकास और सुरक्षा को प्राथमिकता देने का उदाहरण बन सकता है, बशर्ते सभी पक्ष संवेदनशीलता के साथ सहमत हों।



