8 अधिकारी सस्पेंड, FIR दर्ज, छापेमारी शुरू
Published on: July 07, 2026
By: BTNI
Location: Jammu Kashmir, India
सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में आपत्तिजनक और कथित तौर पर अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा देने वाली किताबें पहुंचने के मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के निर्देश पर स्कूल शिक्षा विभाग के 8 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया है, एक कॉन्ट्रैक्टुअल कर्मचारी को डिसइंगेज किया गया, लेखकों और प्रकाशकों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया तथा दो विवादित पुस्तकों को तुरंत वापस ले लिया गया। पुलिस ने FIR दर्ज कर छापेमारी (CIK रेड) भी शुरू कर दी है।
मामला क्या है?
समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) योजना के तहत सरकारी स्कूलों और PM SHRI स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए किताबें खरीदी गई थीं। दो किताबें विवादास्पद पाई गईं:

- “Personalities and Legends of J&K” — लेखक: Hilal Ahmad और Santosh Meena (प्रकाशक: Oberoi Book Service, जम्मू)
- “Great Personalities of Jammu and Kashmir” — लेखक: Sushant Giri (प्रकाशक: Anurag Prakashan, दिल्ली)
इनमें कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर को “India-occupied Kashmir” या “Indian-held Kashmir” कहा गया, JKLF संस्थापक मकबूल भट को “शहीद-ए-आजम” बताया गया और अन्य अलगाववादी नेताओं (जैसे सैयद अली शाह गिलानी, मसरत आलम आदि) को महान हस्तियों के रूप में प्रस्तुत किया गया। BJP, J&K Peoples’ Forum और अन्य संगठनों ने इसे एंटी नेशनल करार दिया।
प्रशासन की कार्रवाई
- 4 जुलाई 2026 को LG प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की।
- 8 अधिकारी सस्पेंड: फजील इमरान सिद्दीकी (लाइब्रेरी कोऑर्डिनेटर), गुरजीत सिंह, संजीव शर्मा, शाजिया कौसर, इम्तियाज अहमद मीर, निरंजन शर्मा, रेनू मेंगी, राजमोहिनी।
- लेखक एवं प्रकाशक ब्लैकलिस्ट; उनकी सभी पुस्तकें J&K से हटाने के आदेश।
- उच्च स्तरीय जांच समिति गठित (30 दिनों में रिपोर्ट)।
- पुलिस (Counter Intelligence Kashmir) ने UAPA के तहत FIR दर्ज कर प्रकाशकों के офис में छापेमारी की।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
BJP ने शिक्षा मंत्री सकीना इतो के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष और नागरिक समाज ने स्कूलों में राष्ट्र-विरोधी सामग्री पहुंचने पर गंभीर सवाल उठाए। CM ओमर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने किताब नहीं देखी, लेकिन मामले की जांच हो रही है।
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पृष्ठभूमि
यह पहला मामला नहीं है। अगस्त 2025 में भी LG प्रशासन ने 25 किताबों पर बैन लगाया था, जिनमें अलगाववाद और आतंकवाद की महिमा बताने का आरोप था। प्रशासन “नैरेटिव वॉरफेयर” से निपटने पर जोर दे रहा है।
शिक्षा विभाग की भूमिका
चार सब-कमेटियों ने 463 किताबों की शॉर्टलिस्टिंग की थी, लेकिन अंतिम जांच में चूक हुई। 123-128 प्रतियां विभिन्न जिलों (जम्मू, रामबन, उधमपुर, बारामुला) में पहुंच चुकी थीं, जिन्हें वापस मंगवाया जा रहा है।
विश्लेषण: यह घटना J&K में शिक्षा और राष्ट्रवाद के संवेदनशील मुद्दे को फिर उजागर करती है। एक ओर स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण सामग्री सुनिश्चित करने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और साहित्यिक चयन पर बहस भी छिड़ गई है। प्रशासन की तेज कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन लंबी जांच से सच्चाई सामने आएगी।



