स्वेच्छा से दी जमीन, बोले- ‘ये भारत की बात है’
Published on: May 29, 2026
By: BTNI
Location: Kochbihar, India
भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी (फेंसिंग) का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। जहां कहीं जमीन अधिग्रहण में अड़चन आ रही थी, वहां सीमा पर रहने वाले हिंदू परिवारों ने स्वेच्छा से अपनी जमीन दान कर दी। इन परिवारों का कहना है कि देश की सुरक्षा सबसे ऊपर है, इसलिए बाड़बंदी में देरी नहीं होनी चाहिए। “ये भारत की बात है” – इस भावना के साथ दिए गए इस दान ने पूरे देश में देशभक्ति की नई मिसाल पेश की है।कोचबिहार जिले के मथाभांगा-I ब्लॉक के सतग्राम मनाबाड़ी क्षेत्र में तीन स्थानीय निवासियों ने 33 डिसमिल जमीन बीएसएफ को स्वेच्छा से दान कर दी। इस क्षेत्र में पहले फेंसिंग अधूरी थी, जिसका फायदा उठाकर रात के अंधेरे में गाय चोरी, तस्करी और घुसपैठ की घटनाएं होती रहती थीं। अब यह गैप भरने से गांव और देश दोनों सुरक्षित होंगे।
बिकाश राय, जिन्होंने जमीन दान की, ने कहा, “पहले बांग्लादेशी लोग रात में आकर मवेशी चुराते थे, सामान ले जाते थे और घुसपैठ भी होती थी। फेंसिंग हो जाने से गांव सुरक्षित रहेगा और देश भी सुरक्षित रहेगा। यह सरकार का अच्छा कदम है।” उनके रिश्तेदार हृदय बर्मन ने जोड़ा, “तस्करी और चोरी बड़े पैमाने पर होती थी। फेंसिंग पूरी होने से भारत की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित होगी। सीमा क्षेत्र के किसान और निवासी सुरक्षित महसूस करेंगे। यह सिर्फ स्थानीय सुरक्षा नहीं, पूरे देश की सुरक्षा का मुद्दा है।
”नई सरकार की तेज रफ्तार
पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनते ही मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पहली कैबिनेट बैठक में सीमा सुरक्षा को प्राथमिकता दी। मात्र कुछ दिनों में 142.79 एकड़ जमीन बीएसएफ को सौंप दी गई। राज्य सरकार का लक्ष्य 45 दिनों के अंदर करीब 600 एकड़ जमीन ट्रांसफर करना है, ताकि 2,217 किलोमीटर लंबी सीमा में बाकी बची फेंसिंग जल्द पूरी हो सके।

भारत-बांग्लादेश सीमा कुल 4,096 किलोमीटर लंबी है। इसमें से अधिकांश पर फेंसिंग हो चुकी है, लेकिन पश्चिम बंगाल में अभी भी सैकड़ों किलोमीटर लंबा हिस्सा बाकी था। घुसपैठ, गाय तस्करी, नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियां मुख्य चुनौती बनी हुई थीं। अब बीएसएफ और राज्य सरकार के समन्वय से काम तेज हो गया है।
मातृभूमि के प्रति जज्बा अभी भी जिंदा है
ऐसे समय में जब कुछ लोग सीमा सुरक्षा को लेकर उदासीन नजर आते हैं, वहां कोचबिहार के इन हिंदू परिवारों का स्वैच्छिक दान गर्व का विषय है। यह दिखाता है कि लोगों में मातृभूमि के प्रति अभी भी वह जosh जिंदा है, जो देश की आजादी की लड़ाई में दिखता था। अपनी जमीन देकर वे बता रहे हैं कि व्यक्तिगत हित से ऊपर राष्ट्रहित है।सीमा क्षेत्र के कई परिवार लंबे समय से फेंसिंग की मांग कर रहे थे क्योंकि अधूरी बाड़ सुरक्षा की बड़ी खामी थी। अब इन परिवारों की भागीदारी से न केवल काम तेज होगा, बल्कि अन्य इलाकों के लिए भी प्रेरणा बनेगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि
केंद्रीय गृह मंत्रालय और बीएसएफ के अनुसार, पूरी फेंसिंग से घुसपैठ पर लगाम लगेगी और सीमा प्रबंधन मजबूत होगा। नई सरकार के इस कदम की केंद्रीय स्तर पर भी सराहना हो रही है।सीमा पर रहने वाले इन साधारण किसानों और परिवारों का योगदान याद दिलाता है कि राष्ट्र निर्माण में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। जमीन दान करने वाले परिवारों को उचित मुआवजा भी मिलेगा, लेकिन उनका मुख्य मकसद सुरक्षा और देशभक्ति है।
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निष्कर्ष:
कोचबिहार की यह घटना सिर्फ एक स्थानीय खबर नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक संदेश है। जब आम नागरिक स्वेच्छा से अपना सब कुछ राष्ट्र को समर्पित करने को तैयार हो जाते हैं, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं रहती। “ये भारत की बात है” – इस एक वाक्य में समाहित है असली देशभक्ति। मातृभूमि के प्रति यह जज्बा जिंदा रहे, तो भारत और मजबूत बनेगा। फेंसिंग का काम जल्द पूरा हो और सीमा पूरी तरह सुरक्षित हो – यही देशवासियों की कामना है।



