झाड़ग्राम के झालमुड़ी विक्रेता बिक्रम साउ को पाकिस्तान-बांग्लादेश से मौत की धमकियां
Published on: May 29, 2026
By: BTNI
Location: Jhadgram, India
अप्रैल 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के झाड़ग्राम दौरे के दौरान एक साधारण रोडसाइड झालमुड़ी वाले की दुकान पर रुककर उन्होंने झालमुड़ी खाई थी। उस पल को वायरल होने में देर नहीं लगी। बिक्रम कुमार साउ (विक्रम साउ) रातोंरात चर्चा में आ गए। लेकिन अब उसी प्रसिद्धि की ‘कीमत’ चुकाने पड़ रही है। बिक्रम साउ को पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े नंबर्स से बार-बार मौत और बम विस्फोट की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं अपनी जान के लिए डरा हुआ हूं।”19 अप्रैल 2026 को चुनावी सभा के बाद प्रधानमंत्री मोदी जब वापस लौट रहे थे, तब झाड़ग्राम में बिक्रम की दुकान पर रुके। उन्होंने स्वयं झालमुड़ी बनवाई और खाई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर लाखों बार देखा गया। बिक्रम की दुकान पर भीड़ उमड़ पड़ी थी। लेकिन अब वही बिक्रम परिवार समेत आतंकित है।बिक्रम साउ ने बताया, “पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान और बांग्लादेश से फोन और वीडियो कॉल्स आ रही हैं। वे कह रहे हैं कि दुकान उड़ा देंगे, मुझे मार डालेंगे। abusive भाषा का इस्तेमाल कर धमकियां दी जा रही हैं।” उन्होंने झाड़ग्राम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है।
पुलिस और सरकार की कार्रवाई
धमकियों की शिकायत मिलते ही झाड़ग्राम पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया। बिक्रम साउ को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई गई है। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ केंद्रीय बलों की तैनाती की खबर भी आ रही है। पश्चिम बंगाल पुलिस और राज्य सरकार के अलावा केंद्र सरकार भी इस मामले को गंभीरता से ले रही है।
- धमकी वाले नंबर्स की जांच शुरू कर दी गई है।
- विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय को सूचित किया गया है।
- अंतरराष्ट्रीय नंबर्स से आने वाली धमकियों की ट्रेसिंग के लिए साइबर सेल और खुफिया एजेंसियां सक्रिय हैं।
- बिक्रम साउ और उनके परिवार को Z-श्रेणी या उसके समकक्ष सुरक्षा देने पर विचार चल रहा है, खासकर जब धमकियां विदेशी स्रोतों से आ रही हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट मांगी है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी नजर रखी जा रही है। बिक्रम ने खुद प्रधानमंत्री से अपनी सुरक्षा की अपील की है।
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घटना का महत्व
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की सुरक्षा का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और देशभक्ति का मुद्दा बन गया है। प्रधानमंत्री के संपर्क में आने मात्र से किसी साधारण नागरिक को विदेशी ताकतों से धमकियां मिलना चिंताजनक है। यह घुसपैठ, साइबर वारफेयर और क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद की नई शैली भी दिखाता है।झाड़ग्राम के स्थानीय लोगों में भी आक्रोश है। वे कह रहे हैं कि बिक्रम ने तो सिर्फ प्रधानमंत्री को स्थानीय स्वाद चखाया था, फिर धमकियां क्यों?
निष्कर्ष
बिक्रम साउ की कहानी सामान्य भारतीय की सादगी और उसकी मजबूरी दोनों को दर्शाती है। एक तरफ प्रधानमंत्री का आशीर्वाद, दूसरी तरफ विदेशी धमकियां। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि कोई भी भारतीय नागरिक, चाहे वह कितना भी साधारण हो, अगर देश की मुख्यधारा या प्रधानमंत्री से जुड़ता है तो उसकी सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी है।पुलिस जांच जारी है। उम्मीद है कि जल्द ही दोषियों तक पहुंचकर कार्रवाई होगी और बिक्रम साउ बिना किसी भय के अपनी दुकान पर झालमुड़ी बेच सकेंगे। देश की सुरक्षा हर नागरिक की सुरक्षा है।



