आरजी कर मेडिकल कॉलेज केस में बड़ा एक्शन:
Published on: May 28, 2026
By: BTNI
Location: Kolkata, India
कोलकाता के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप और मर्डर केस में पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए पूर्व कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत गोयल समेत तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच में कथित लापरवाही, सबूतों के संरक्षण में चूक और पीड़ित परिवार के साथ व्यवहार को लेकर यह कार्रवाई की गई है।
निलंबित अधिकारियों में तत्कालीन कोलकाता पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल तत्कालीन डीसीपी (सेंट्रल) इंदिरा मुखर्जी और तत्कालीन डीसीपी (नॉर्थ) अविषेक गुप्ता शामिल हैं। राज्य सरकार ने तीनों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए हैं।
क्या है पूरा मामला

अगस्त 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल RG Kar Medical College and Hospital में एक जूनियर महिला डॉक्टर का शव अस्पताल के सेमिनार हॉल में मिला था। पोस्टमार्टम और प्रारंभिक जांच में रेप के बाद हत्या की आशंका सामने आई थी। घटना के बाद पूरे देश में भारी आक्रोश फैल गया था और डॉक्टरों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए थे। शुरुआत में मामले की जांच कोलकाता पुलिस कर रही थी, लेकिन जांच पर सवाल उठने और विरोध बढ़ने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।
अधिकारियों पर क्या आरोप
सरकारी सूत्रों के अनुसार, निलंबित अधिकारियों पर आरोप है कि:
- मामले की शुरुआती जांच में गंभीर लापरवाही बरती गई,
- महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित रखने में चूक हुई,
- पीड़ित परिवार से कथित रूप से अनुचित व्यवहार किया गया
- बिना अनुमति मीडिया में बयान दिए गए,
- मामले को दबाने या हल्का दिखाने की कोशिश हुई।
इन्हीं आरोपों के आधार पर राज्य सरकार ने विभागीय कार्रवाई शुरू की है।

हाईकोर्ट ने भी जताई थी नाराजगी
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस की शुरुआती जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए थे। अदालत ने मामले में कथित “हश-अप” यानी दबाने की कोशिशों की जांच के लिए सीबीआई को विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के निर्देश दिए थे।
पूर्व प्राचार्य भी जांच के घेरे में
आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष भी पहले से सीबीआई और ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं। उन पर वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं।
राजनीतिक माहौल भी गर्म
यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। विपक्ष लगातार राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाता रहा है। डॉक्टर संगठनों और सामाजिक संगठनों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर लंबे समय तक आंदोलन किया था।
फिलहाल तीनों आईपीएस अधिकारियों का निलंबन प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। मामले की विभागीय और सीबीआई जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
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