उपराष्ट्रपति की मंजूरी जल्द, मोदी सरकार को मिलेगा राज्यसभा में मजबूत आधार
सात आप राज्यसभा सांसदों का भाजपा में विलय
Published on: April 26, 2026
By: BTNI
Location: New Delhi, India
भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाला विकास हुआ है। आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सांसदों ने अपनी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय का ऐलान कर दिया है। यह कदम संविधान के प्रावधानों के तहत लिया गया है, जिसमें दो-तिहाई सांसदों के समर्थन से विलय को वैध माना जाता है और एंटी-डिफेक्शन कानून लागू नहीं होता।
सूत्रों के अनुसार, उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ जल्द ही इस विलय को मंजूरी दे सकते हैं, जिससे भाजपा और एनडीए की स्थिति में जबरदस्त मजबूती आएगी।यह घटना आप के लिए बड़ा झटका है, खासकर पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले। सात सांसदों में शामिल हैं राघव चड्ढा, स्वाती मालीवाल, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी।
इनमें से तीन—राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल—ने भाजपा मुख्यालय जाकर पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी और अन्य नेताओं से मुलाकात की। राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आप राज्यसभा में अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है, इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया। उन्होंने दावा किया कि यह दो-तिहाई बहुमत के साथ किया गया विलय है, जो संवैधानिक रूप से वैध है

विलय के बाद राज्यसभा में नई ताकत का समीकरण
वर्तमान में राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या लगभग 245 है, जिसमें बहुमत के लिए 123 और दो-तिहाई बहुमत (संवैधानिक संशोधन के लिए) के लिए करीब 164 सदस्य चाहिए। विलय की मंजूरी के बाद भाजपा की अपनी ताकत 113 सांसदों तक पहुंच जाएगी, जबकि एनडीए की कुल संख्या 145 हो जाएगी। इससे पहले भाजपा की संख्या करीब 106-108 के आसपास थी।
इस बदलाव से भाजपा अब राज्यसभा में बहुमत के बेहद करीब पहुंच गई है, जबकि एनडीए दो-तिहाई बहुमत (164) से सिर्फ 19 सदस्य दूर रह जाएगा।यह संख्या बढ़ोतरी भाजपा के लिए कई मायनों में गेम-चेंजर साबित होगी। राज्यसभा में बिल पास कराना अब आसान हो जाएगा। महत्वपूर्ण विधेयक जैसे महिला आरक्षण बिल, आर्थिक सुधार या अन्य संवैधानिक बदलावों पर चर्चा और मंजूरी में तेजी आएगी। सरकार को अब विपक्ष से अनावश्यक अड़चनों का सामना कम करना पड़ेगा। एनडीए की मजबूत स्थिति से विधायी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सकेगी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास और सुधार एजेंडे को नई गति देगी।
आप में क्यों हुआ यह बड़ा विद्रोह?
आप के इन सांसदों ने पार्टी नेतृत्व पर आरोप लगाया है कि पार्टी अपनी मूल भावना—भ्रष्टाचार मुक्त शासन और आम आदमी की आवाज—से दूर हो गई है। राघव चड्ढा, जो हाल ही में राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटाए गए थे, ने कहा कि पार्टी के अंदरूनी कलह और फैसलों ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया। स्वाती मालीवाल और अन्य सांसदों ने भी पार्टी की दिशा पर सवाल उठाए।
यह विलय पंजाब में आप सरकार के लिए भी चुनौती पैदा कर सकता है। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यह घटना पार्टी की एकता पर सवाल खड़ा करती है। आप अब राज्यसभा में सिर्फ तीन सांसदों (बलबीर सिंह सीचेवाल, संजय सिंह और एनडी गुप्ता) तक सिमट गई है। पार्टी ने इन सांसदों की अयोग्यता के लिए राज्यसभा सभापति से अपील की है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि दो-तिहाई विलय के प्रावधान के तहत यह मुश्किल होगा।
भाजपा की ओर से इस विलय का स्वागत किया गया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि नए सदस्यों का अनुभव और ऊर्जा भाजपा को और मजबूत बनाएगी। भाजपा अध्यक्ष ने इन सांसदों को पार्टी परिवार में शामिल करने का ऐलान किया। यह कदम दिखाता है कि भाजपा विपक्षी दलों के असंतुष्ट नेताओं को भी अपनी विचारधारा और विकास के एजेंडे से जोड़ने में सक्षम है।
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प्रधानमंत्री मोदी की अजेय यात्रा
यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और उनकी नीतियों के प्रभाव को रेखांकित करती है। लगातार तीसरी बार केंद्र में सरकार बनाने के बाद मोदी सरकार विकास, आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मजबूती से आगे बढ़ रही है।
राज्यसभा में मजबूत स्थिति से सरकार को और अधिक आत्मविश्वास मिलेगा।विश्लेषकों का कहना है कि यह विलय भारतीय राजनीति में गठबंधनों और विचारधाराओं के बदलते समीकरणों को दर्शाता है। कई विपक्षी दल अब भाजपा की बढ़ती ताकत को देखते हुए नए रास्ते तलाश रहे हैं। एनडीए पहले से ही कई राज्यों में मज बूत है और यह विकास उसे राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूती देगा।
क्या होगा आगे?
उपराष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ये सात सांसद औपचारिक रूप से भाजपा संसदीय दल का हिस्सा बन जाएंगे। इससे राज्यसभा में बहस का स्वरूप बदल सकता है। विपक्ष को अब अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ेगा। वहीं, आप को अपनी आंतरिक एकता मजबूत करने और जनता के बीच विश्वास बहाल करने की चुनौती का सामना करना होगा।यह खबर पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ऐसे और बदलाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि कई नेता विकास और स्थिरता की राजनीति की ओर आकर्षित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रगति की राह अब और मजबूत होती दिख रही है। भाजपा और एनडीए की इस बढ़ती ताकत से लोकतंत्र की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और जनहितैषी बनेगी।



