राजस्थान के कृष्णधाम में एक महीने में 41.67 करोड़ का चढ़ावा,
भक्तों की भक्ति ने तोड़े सारे पुराने आंकड़े
Published on: April 26, 2026
By: BTNI
Location: Chittorgarh, India
राजस्थान के प्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर में भक्तों की असीम आस्था एक बार फिर चमक उठी है। मंदिर के मासिक भंडार की सात चरणों में पूरी हुई गणना के बाद कुल 41 करोड़ 67 लाख 38 हजार 569 रुपये की भेंट प्राप्त हुई है। यह मंदिर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा मासिक चढ़ावा है, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।मंदिर मंडल बोर्ड के अध्यक्ष हजारी दास वैष्णव ने आधिकारिक रूप से यह जानकारी देते हुए बताया कि भंडार 16 अप्रैल को खोला गया था।
उसके बाद सात चरणों में सावधानीपूर्वक गिनती की गई। भंडार से अकेले 33 करोड़ 21 लाख 63 हजार 539 रुपये निकले, जबकि भेंट कक्ष और ऑनलाइन दान के माध्यम से अतिरिक्त 8 करोड़ 45 लाख 75 हजार रुपये प्राप्त हुए। भक्तों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी भारी-भरकम दान दिया, जो आधुनिक युग में भक्ति की नई मिसाल पेश करता है।इसके अलावा, भक्तों ने नकदी के साथ-साथ सोने-चांदी की भेंट भी बड़ी मात्रा में चढ़ाई। गणना में 660 ग्राम 500 मिलीग्राम सोना और 84 किलो 620 ग्राम चांदी भी शामिल है। मंदिर प्रशासन ने पूरे आंकड़ों को पारदर्शी तरीके से जारी किया है और इसे मासिक भंडार के इतिहास का सर्वकालिक रिकॉर्ड बताया है।
सांवलिया सेठ मंदिर का महत्व
श्री सांवलिया सेठ मंदिर चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया (मंडफिया गांव) में स्थित है। यह मेवाड़ क्षेत्र का प्रमुख कृष्ण धाम है, जहां भगवान श्री कृष्ण को सांवलिया सेठ या सांवरिया जी के रूप में पूजा जाता है। मंदिर की स्थापना की कथा भी रोचक है। 19वीं शताब्दी में एक ग्वाले को सपने में चार विग्रहों के बारे में पता चला, जिन्हें बाद में खुदाई से निकाला गया।

तीन मुख्य मंदिरों में मंडफिया वाला मंदिर सबसे प्रसिद्ध है।यह स्थल नाथद्वारा के बाद वैष्णव संप्रदाय के अनुयायियों के लिए दूसरा प्रमुख केंद्र माना जाता है। हर रोज हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। होली, जन्माष्टमी, दीवाली और अन्य त्योहारों पर भक्तों की भीड़ और बढ़ जाती है। मंदिर में चढ़ावा मुख्य रूप से भगवान की भक्ति, मनोकामना पूर्ति और कल्याण की कामना से जुड़ा होता है।
भक्तों की भक्ति और डिजिटल दान का कमाल
इस बार का चढ़ावा खास इसलिए है क्योंकि इसमें ऑनलाइन दान की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। देश-विदेश से भक्तों ने आसानी से डिजिटल माध्यमों से दान किया, जिससे कुल राशि में उल्लेखनीय योगदान हुआ। हजारी दास वैष्णव ने कहा कि भक्तों की आस्था निरंतर बढ़ रही है और मंदिर प्रशासन पारदर्शिता बनाए रखते हुए विकास कार्यों के लिए इस धनराशि का उपयोग करेगा।मंदिर में सोने-चांदी के गहनों और सिक्कों की भेंट भी भक्तों की गहरी श्रद्धा को दर्शाती है। ये आभूषण मंदिर के भंडार में सुरक्षित रखे जाएंगे या आगे के निर्माण व रखरखाव में उपयोग किए जाएंगे।
पिछले रिकॉर्ड से तुलना
पिछले वर्षों में भी सांवलिया सेठ मंदिर में बड़े चढ़ावे दर्ज किए गए थे। कुछ महीनों में 30-50 करोड़ के आसपास की राशि आई थी, लेकिन इस बार का 41.67 करोड़ का आंकड़ा मासिक आधार पर नया बेंचमार्क स्थापित करता है। गणना की प्रक्रिया पूरी सुरक्षा के साथ की गई, जिसमें मंदिर बोर्ड के सदस्यों, प्रशासनिक अधिकारियों और बैंकों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही।

मंदिर विकास की नई संभावनाएं
इस रिकॉर्ड चढ़ावे से मंदिर के विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है। मंदिर मंडल बोर्ड भक्तों की सुविधा के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार, दर्शन व्यवस्था को बेहतर बनाने, प्रसाद वितरण और अन्य कल्याणकारी कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। सांवलिया सेठ जी की कृपा से मंदिर क्षेत्र में पर्यटन भी बढ़ रहा है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है।
भक्तों का मानना है कि श्री सांवलिया सेठ जी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं, इसलिए वे पूरे विश्वास के साथ चढ़ावा चढ़ाते हैं। यह रिकॉर्ड न केवल आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी राजस्थान की भक्ति परंपरा को मजबूत करता है।मंदिर प्रशासन ने सभी भक्तों का आभार व्यक्त किया है जिन्होंने अपनी आस्था और समर्पण से इस रिकॉर्ड को संभव बनाया। आने वाले महीनों और त्योहारों में और अधिक भक्तों के आने की उम्मीद है।
श्री सांवलिया सेठ जी की जय!
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि भारतीय संस्कृति में मंदिर सिर्फ पूजा स्थल नहीं, बल्कि आस्था, एकता और सामाजिक विकास के केंद्र हैं। भक्तों की भक्ति निरंतर बढ़ती रहे और कृष्णधाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर की महिमा पूरे देश में फैलती रहे।
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