एयरपोर्ट की नौकरी से अल्ट्रा-रनिंग तक का सफर, कई विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकीं राजस्थान की बेटी
Published on: August 08, 2026
By: BTNI
Location: New Delhi/ Ajmer, India
कुछ सपने ऐसे होते हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए सिर्फ हौसला नहीं, बल्कि अपने शरीर और मन की आखिरी सीमा तक जाकर संघर्ष करना पड़ता है। राजस्थान के अजमेर की अल्ट्रा-डिस्टेंस रनर सुफिया सुफी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। कभी एयरपोर्ट की नौकरी करने वाली सुफिया ने दौड़ को अपना जुनून बनाया और देखते ही देखते देश की चर्चित अल्ट्रा-रनर्स में शामिल हो गईं।
अब उनका नाम एक और असाधारण उपलब्धि के साथ चर्चा में है। सुफिया सुफी ने ‘Run for Dreams’ अभियान के तहत कन्याकुमारी से कराकोरम पास तक करीब 5,000 किलोमीटर की ऐतिहासिक दौड़ का लक्ष्य रखा था। यह अभियान 12 मई 2026 को कन्याकुमारी से शुरू हुआ था और इसका समापन 6 अगस्त को कराकोरम पास पर प्रस्तावित था। अभियान को भारतीय सशस्त्र बलों के प्रति सम्मान और समर्पण के रूप में पेश किया गया था।
3 किलोमीटर से शुरू हुआ सफर, विश्व रिकॉर्ड तक पहुंचा

सुफिया ने कभी नहीं सोचा था कि पार्क में शुरू की गई कुछ किलोमीटर की दौड़ उन्हें विश्व रिकॉर्ड की दुनिया तक पहुंचा देगी। उपलब्ध प्रोफाइलों के अनुसार, एयरपोर्ट की नौकरी के दौरान उन्होंने करीब 3 किलोमीटर की दौड़ से शुरुआत की थी। धीरे-धीरे दौड़ उनके लिए फिटनेस से आगे बढ़कर जुनून और फिर जीवन का उद्देश्य बन गई।
2019 में उन्होंने कश्मीर से कन्याकुमारी तक लगभग 4,000 किलोमीटर की दौड़ करीब 87 दिनों में पूरी कर बड़ा रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद गोल्डन क्वाड्रिलेटरल जैसी लंबी दूरी की दौड़ और चुनौतीपूर्ण मनाली-लेह रूट पर भी उन्होंने अपनी क्षमता साबित की। उनकी उपलब्धियों की वजह से वह पहले से ही कई विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं।
2026 में खुद का रिकॉर्ड तोड़ा
साल 2026 का ‘Run for Dreams’ अभियान उनके करियर की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था। 12 मई को कन्याकुमारी से शुरू हुई दौड़ में सुफिया ने गर्मी, तेज बारिश, ट्रैफिक, लंबे हाईवे, थकान और कठिन पहाड़ी रास्तों का सामना किया। जुलाई में उन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक 4,167 किलोमीटर की दूरी 68 दिन 23 घंटे में पूरी कर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि उनके अभियान का पहला बड़ा पड़ाव बनी और इसे उनके छठे Guinness World Record के रूप में रिपोर्ट किया गया। लेकिन सुफिया के लिए कश्मीर मंजिल नहीं था। उनका अगला लक्ष्य था—कराकोरम।
VIDEO LINK- https://youtu.be/1j0TnXr2Wcw
कश्मीर के बाद सामने थी करीब 18 हजार फीट की चुनौती
कश्मीर पहुंचने के बाद भी सुफिया ने दौड़ रोकने से इनकार कर दिया। उनका अभियान आगे कराकोरम की ओर बढ़ा। यह हिस्सा पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि यहां ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी, मौसम और कठिन पहाड़ी रास्ते किसी भी धावक की परीक्षा ले सकते हैं।
जुलाई में बनिहाल और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों से गुजरते समय सुरक्षा बलों ने भी उनके सफर में सहयोग किया। CRPF के जवानों ने उनके सुरक्षित आवागमन के लिए सुरक्षा और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई।
सुफिया ने इस दौरान महिलाओं को लेकर समाज में बनी मानसिक सीमाओं को तोड़ने का संदेश भी दिया। उनका कहना था कि जब महिलाएं अपने भीतर की सीमाओं को तोड़ती हैं, तो रास्ते खुद खुलने लगते हैं।
सैनिकों को समर्पित थी पूरी दौड़
सुफिया की यह दौड़ केवल व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाने के लिए नहीं थी। ‘Run for Dreams’ को भारतीय सशस्त्र बलों को समर्पित किया गया था। कन्याकुमारी से कराकोरम तक के इस अभियान में देश के अलग-अलग हिस्सों से गुजरते हुए कई महत्वपूर्ण स्थानों और युद्ध स्मारकों को भी शामिल किया गया। योजना के अनुसार 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कारगिल वॉर मेमोरियल पहुंचना भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
सुफिया का संदेश साफ था—जिस कठिन परिस्थिति को आम व्यक्ति एक साहसिक अभियान समझता है, भारतीय सैनिक ऐसी परिस्थितियों में देश की रक्षा के लिए लगातार डटे रहते हैं।
कराकोरम पहुंचकर पूरा हुआ ‘Run for Dreams’ सुफिया सुफी की इस ऐतिहासिक यात्रा का अंतिम पड़ाव कराकोरम पास था। आपकी दी गई ताजा जानकारी के अनुसार, 6 अगस्त 2026 को उन्होंने कन्याकुमारी से कराकोरम तक करीब 5,000 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर ली और यह सफर लगभग 86 दिन 2 घंटे में पूरा हुआ।
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यदि यह अंतिम रिकॉर्ड आधिकारिक रूप से प्रमाणित होता है, तो यह उपलब्धि भारतीय अल्ट्रा-रनिंग के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाएगी। अभियान की शुरुआत से ही इसे एक संभावित Guinness World Record प्रयास के रूप में बताया गया था।
एक महिला, एक सपना और 5,000 किलोमीटर की कहानी
सुफिया सुफी की कहानी सिर्फ दौड़ की कहानी नहीं है। यह उस महिला की कहानी है जिसने एयरपोर्ट की नौकरी से निकलकर अपने लिए एक नया रास्ता चुना। पार्क में 3 किलोमीटर से शुरू हुआ सफर हजारों किलोमीटर तक पहुंचा। रास्ते में रिकॉर्ड टूटे, शरीर थका, मौसम बदला, पहाड़ सामने आए—लेकिन दौड़ जारी रही।
कन्याकुमारी से शुरू हुई यह यात्रा जब कराकोरम की ऊंचाइयों तक पहुंची, तो इसके साथ सिर्फ एक धावक नहीं दौड़ रही थी, बल्कि एक संदेश भी दौड़ रहा था—अगर इरादा मजबूत हो, तो मंजिल कितनी भी दूर क्यों न हो, रास्ता बनाया जा सकता है।
सुफिया सुफी का ‘Run for Dreams’ आज इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह सिर्फ एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि संकल्प, आत्मविश्वास, महिला सशक्तिकरण और देश के सैनिकों के प्रति सम्मान की कहानी बन चुका है।



