Published on: April 24, 2026
By: BTNI
Location: New Delhi, India
आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। यह घटना राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा रही है। सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा के साथ-साथ पंजाब के दो अन्य राज्यसभा सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी AAP छोड़ने का फैसला किया है। राघव चड्ढा ने अपने इस्तीफे में पार्टी की आंतरिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी अपनी ही पार्टी ने उन्हें चुप करा दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ भी की।
राघव चड्ढा, जो एक समय अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाते थे, हाल के महीनों में पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाते नजर आ रहे थे। अप्रैल की शुरुआत में AAP ने उन्हें राज्यसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया था और सदन में बोलने का समय भी नहीं देने का अनुरोध किया था। उनकी जगह पंजाब के सांसद अशोक मित्तल को डिप्टी लीडर बनाया गया।
पार्टी ने इस कदम को रूटीन प्रक्रिया बताया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह फैसला चड्ढा की अनुपस्थिति, पार्टी कार्यक्रमों से दूरी और संसद में ‘सॉफ्ट पीआर’ वाले मुद्दों (जैसे एयरपोर्ट पर समोसे की कीमत) पर फोकस करने के कारण लिया गया।चड्ढा ने इस फैसले के बाद ‘साइलेंस्ड, नॉट डिफीटेड’ (चुप करा दिया गया, लेकिन हारा नहीं) शीर्षक वाला वीडियो जारी किया था। उ

समें उन्होंने पूछा था- “क्या मैंने कोई गुनाह किया है? क्या मैंने कोई गलती की है?” उन्होंने दावा किया कि वे ‘आम आदमी’ के लिए संसद जाते हैं, रैकस (हंगामा) करने नहीं। पार्टी नेताओं ने उनका जवाब देते हुए कहा कि चड्ढा विपक्षी मुद्दों पर सक्रिय नहीं रहे और केंद्र सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने से कतराते थे। दिल्ली AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने उन्हें ‘सॉफ्ट पीआर’ का आरोप लगाया।राघव चड्ढा AAP के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे और पार्टी की रणनीति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे।
वे सबसे युवा राज्यसभा सांसदों में से एक हैं। उनकी पत्नी अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा हैं। चड्ढा ने संसद में कई मुद्दों पर प्रभावशाली भाषण दिए, जो सोशल मीडिया पर वायरल होते थे। लेकिन पिछले कुछ समय से केजरीवाल और अन्य वरिष्ठ नेताओं जैसे संजय सिंह से उनकी दूरी बढ़ती गई। अप्रैल 2 को डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने ‘द 48 लॉज ऑफ पावर’ किताब का पोस्ट शेयर किया, जिसमें ‘नेवर आउटशाइन द मास्टर’ (मालिक को कभी पीछे न छोड़ें) अध्याय का जिक्र था।
इससे आंतरिक कलह की अटकलें और तेज हो गईं।इस्तीफे की घोषणा के साथ चड्ढा ने प्रधानमंत्री मोदी की सराहना की, जिससे अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे भविष्य में BJP या किसी अन्य विकल्प की ओर रुख कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने अभी तक कोई नई पार्टी जॉइन करने या नई पार्टी बनाने की पुष्टि नहीं की है। कुछ दिनों पहले उन्होंने ‘Gen-Z पार्टी’ बनाने की अटकलों पर ‘इंटरेस्टिंग थॉट’ कहकर प्रतिक्रिया दी थी।यह इस्तीफा AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
पार्टी पहले ही स्वाती मालीवाल जैसे नेताओं के जाने का सामना कर चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना AAP में बढ़ती असंतोष और नेतृत्व पर सवालों को उजागर करती है। दिल्ली, पंजाब और अन्य राज्यों में पार्टी की स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण है। AAP ने अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि पार्टी आंतरिक एकता बनाए रखने पर जोर दे रही है।राघव चड्ढा का राजनीतिक सफर 2012 में AAP के गठन के साथ शुरू हुआ।
वे पार्टी के युवा चेहरों में प्रमुख थे और कई चुनावी रणनीतियों में शामिल रहे। उनकी संसदीय बहसें अक्सर चर्चा में रहती थीं। लेकिन हालिया घटनाक्रम ने दिखाया कि पार्टी के अंदर ‘एक आवाज’ बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है।इस विकास से राजनीतिक दलों में चर्चा तेज हो गई है। BJP और अन्य विपक्षी दल इसे AAP की कमजोरी के रूप में देख रहे हैं।
चड्ढा के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं- क्या वे नई पार्टी बनाएंगे, किसी मौजूदा दल में शामिल होंगे या स्वतंत्र रूप से काम करेंगे?यह घटना भारतीय राजनीति में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, पार्टी अनुशासन और आंतरिक लोकतंत्र के सवालों को फिर से उठाती है। आम आदमी पार्टी, जो भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकली थी, अब खुद आंतरिक कलह से जूझ रही है। राघव चड्ढा का इस्तीफा न केवल AAP की रणनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि विपक्षी एकता पर भी असर डाल सकता है।
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