प्रतिभा और दृढ़ संकल्प की मिसाल
किशोरावस्था में क्विज़ शो में छाया चमत्कार, फिर MBBS और UPSC क्लियर कर IPS बनकर साबित किया कि सफलता की कोई उम्र नहीं होती
Published on: March 11, 2026
By: BTNI
Location: Porbandar, India
रवि मोहन सैनी का नाम आज देशभर में प्रेरणा का पर्याय बन चुका है। 2001 में जब ‘कौन बनेगा करोड़पति जूनियर’ नामक शो का प्रसारण हुआ, तब सिर्फ 14 साल की उम्र में उन्होंने इस शो में हिस्सा लिया और पूरे 15 सवालों के सही जवाब देकर 1 करोड़ रुपये जीत लिए। अमिताभ बच्चन द्वारा होस्ट किए गए इस शो में रवि सैनी क्लास 10 के छात्र थे और अलवर, राजस्थान के निवासी थे। उनका पिता एक रिटायर्ड नेवी अधिकारी थे, जिसने परिवार में अनुशासन और मेहनत की नींव रखी।
उस समय रवि सैनी ने न केवल शो जीता, बल्कि पूरे देश में सुर्खियां बटोरीं। वे KBC जूनियर के पहले और एकमात्र ऐसे बच्चे बने जिन्होंने टॉप प्राइज हासिल किया।जीत के बाद रवि सैनी ने पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मेडिकल की राह चुनी और MBBS की डिग्री हासिल की। मेडिकल की पढ़ाई के दौरान भी उनकी लगन और बुद्धिमत्ता बरकरार रही। इंटर्नशिप के समय उन्होंने UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी की और 2014 में गुजरात कैडर में IPS अधिकारी के रूप में चयनित हो गए। उनकी ऑल इंडिया रैंक 461 थी। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने UPSC परीक्षा में कई प्रयास किए, लेकिन हार नहीं मानी और अंततः सफलता प्राप्त की।
IPS बनने के बाद रवि सैनी ने गुजरात पुलिस में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दीं। वे राजकोट में डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (जोन-1) रह चुके हैं। 2020 में उन्हें पोरबंदर जिले का पुलिस अधीक्षक (SP) बनाया गया, जहां उन्होंने लॉकडाउन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जनता की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई। हाल के वर्षों में भी उनकी पोस्टिंग पोरबंदर में ही रही है, जहां वे अपराध नियंत्रण, सामाजिक सद्भाव और पुलिस सुधारों पर फोकस कर रहे हैं।रवि सैनी की कहानी सिर्फ एक क्विज़ जीत की नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि प्रतिभा, मेहनत और सही दिशा में प्रयास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
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14 साल की उम्र में करोड़पति बनने के बाद उन्होंने पैसों का इस्तेमाल पढ़ाई और करियर में किया, न कि दिखावे में। आज डॉ. रवि मोहन सैनी न केवल एक सफल IPS अधिकारी हैं, बल्कि युवाओं के लिए जीवंत उदाहरण भी हैं कि उम्र, परिस्थितियां या पिछली सफलताएं महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास और लक्ष्य के प्रति समर्पण ही असली सफलता की कुंजी है।उनकी इस यात्रा से लाखों छात्र प्रेरित हो रहे हैं, जो सपनों को पूरा करने के लिए कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
रवि सैनी साबित करते हैं कि एक बच्चा जो छोटी उम्र में बड़ा मुकाम हासिल कर ले, वह बड़ा होकर समाज की सेवा में और भी बड़ा योगदान दे सकता है। पोरबंदर के SP के रूप में वे आज भी सक्रिय हैं और अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण है।


