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सहकारिता की एक नई उड़ान: सहकारिता मंत्रालय और सहकारिता विश्वविद्यालय के साथ विकास का एक नया युग

Published on: March 29, 2025
By: [डॉ. उदय शंकर अवस्थी
प्रबंध निदेशक, इफको]

सहकारिता के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन:

भारत का सहकारिता आंदोलन सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में गहराई से निहित है। यह आंदोलन समावेशी विकास, सामुदायिक सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के लिए एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में विकसित हुआ है। सहकारिता मंत्रालय की स्थापना और इसकी नवीनतम पहलों के माध्यम से सरकार ने एक सहकारिता-संचालित मॉडल को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है, जो देश के हर कोने तक पहुंचेगा और समाज की मुख्यधारा से अलग पड़े समुदायों के लिए स्थायी आजीविका और वित्तीय समावेशन की सुविधा प्रदान करेगा।

दिनांक 6 जुलाई 2021 को सहकारिता मंत्रालय की स्थापना भारत के सहकारी आंदोलन में एक परिवर्तनकारी क्षण था। सहकारी समितियों को पुनर्जीवित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ, मंत्रालय ने इस क्षेत्र को मजबूत और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक नीतिगत ढांचा, कानूनी सुधार और रणनीतिक पहल शुरू की है। अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मंत्रालय ने सहकारी समितियों के लिए “व्यापार करने में आसानी”, डिजिटलीकरण के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित करने और वंचित ग्रामीण समुदायों के लिए समावेशिता को बढ़ावा देने की अपनी पहल पर काफी जोर दिया है।

सहकारिता आंदोलन में दूरदर्शी नेतृत्व

माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में भारत का सहकारिता आंदोलन एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है। अपनी दूरदर्शी सोच को आधार बनाकर उन्होंने सहकारिता के लिए नई विचारधारा को जन्म दिया है। उनके नेतृत्व में सहकारिता मंत्रायल ने भारतीय सहकारी आंदोलन में उल्लेखनीय परिवर्तन किए हैं।

  • ई-सेवाओं तक बेहतर पहुंच के लिए सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) के रूप में कम्प्यूटरीकरण के माध्यम से पैक्स को बहुउद्देशीय बनाने और पैक्स को मजबूत बनाने के लिए मॉडल उपनियम।
  • प्रत्येक पंचायत/गांव में बहुउद्देशीय पैक्स/डेयरी/मत्स्य सहकारी समितियां स्थापित करना।
  • राष्ट्रीय स्तर पर तीन नई बहुराज्य सहकारी सोसाइटीज़ का गठन किया गया है।
     सहकारी क्षेत्र से निर्यात को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल)।
     भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) को एकल ब्रांड नाम के तहत उन्नत बीजों की खेती, उत्पादन और वितरण ।
     प्रमाणित और प्रामाणिक जैविक उत्पादों के उत्पादन, वितरण और विपणन के लिए राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (एनसीओएल)।
  • जमीनी स्तर पर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहकारी क्षेत्र में दुनिया का सबसे व्यापक विकेन्द्रीकृत अनाज भंडारण कार्यक्रम।
  • बहुराज्य सहकारी सोसाइटीज़ (संशोधन) अधिनियम 2023, बहुराज्य सहकारी सोसाइटीज़ अधिनियम, 2002 में संशोधन करके 97वें संवैधानिक संशोधन के प्रावधानों को शामिल करेगा तथा बहुराज्य सहकारी समितियों में शासन को मजबूत करेगा, पारदर्शिता बढ़ाएगा, जवाबदेही बढ़ाएगा, चुनाव प्रक्रिया में सुधार करेगा आदि।
  • सहकारी चीनी मिलों को मजबूत करने तथा सहकारी चीनी मिलों को इथेनॉल की खरीद में प्राथमिकता देने और कोजेन पावर प्लांट की स्थापना के लिए एनसीडीसी के माध्यम से 10,000 करोड़ रुपये की ऋण योजना।

जैसे-जैसे सहकारिता आंदोलन विकसित होता जा रहा है, यह भारत के सामाजिक-आर्थिक ढांचे का एक महत्वपूर्ण घटक बनता जा रहा है, जो समकालीन चुनौतियों का समाधान कर रहा है और सामुदायिक लचीलेपन को बढ़ावा दे रहा है। सहकारिता आंदोलन उद्यमशीलता कौशल को भी विकसित करता है जिसकी भारत जैसे देश में बहुत आवश्यकता है। यह न केवल आर्थिक कल्याण में योगदान देता है बल्कि समाज को राष्ट्र के लिए योगदान देने में अग्रणी होने में भी सक्षम बनाता है।

सहकारिता क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियां

सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहल बहुराज्य सहकारी समितियों को बढ़ावा देना और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) का विस्तार करना रही है। पैक्स के लिए मॉडल उपनियमों के लागू होने से उन्हें 25 से अधिक विविध गतिविधियां करने का अधिकार मिला है, जिससे बेहतर प्रशासन और व्यापक समावेशिता सुनिश्चित हुई है। 63,000 पैक्स को कम्प्यूटरीकृत करने के लिए ₹ 2,516 करोड़ की एक ऐतिहासिक परियोजना पहले से ही चल रही है, जिसमें 28 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 62,318 पैक्स शामिल हैं और 15,783 पहले ही शामिल हो चुके हैं। उठाए गए इन कदमों द्वारा परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, पैक्स को नाबार्ड से जोड़ा है और निर्बाध वित्तीय लेनदेन सुनिश्चित किया है।

सहकारी समितियों की पहुँच को और बढ़ाने के लिए, 9,000 से अधिक नई पैक्स, डेयरी और मत्स्य पालन सहकारी समितियाँ, उन पंचायतों में स्थापित की जा रही हैं जहाँ सहकारी समितियों का गठन नहीं हुआ है। विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना एक और महत्वाकांक्षी पहल है जिसका उद्देश्य पैक्स स्तरों पर भंडारण और कृषि-बुनियादी ढाँचा तैयार करना है, जिससे खाद्यान्न संबंधी नुकसान और परिवहन लागत में कमी आएगी। इसके तहत पायलट प्रोजेक्ट के लिए 2,000 पैक्स की पहचान की गई है। इसके अलावा, 30,647 पैक्स को सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) के रूप में नामित किया गया है, जो ग्रामीण नागरिकों को 300 से अधिक आवश्यक ई-सेवाएं प्रदान करेगा।

कृषि में इफको का क्रांतिकारी योगदान


इफको ने नैनो यूरिया प्लस (तरल) और नैनो डीएपी (तरल) सहित नैनो उर्वरकों की अभूतपूर्व शुरूआत करके कृषि सहकारी क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए हैं। नैनो एनपीके (दानेदार) को शीघ्र ही मंजूरी मिलने वाली है । उम्मीद है कि यह नवाचार आधुनिक कृषि में क्रांतिकारी परिवर्तन लायेगा तथा अधिक दक्षता, लागत प्रभावशीलता और पर्यावरणीय स्थिरता प्रदान करेगा। इन क्रांतिकारी उत्पादों को पहले ही वैश्विक पहचान मिल चुकी है तथा ये अमेरिका, ब्राजील, जाम्बिया, गिनी-कोनाक्री, मॉरीशस, रवांडा, मलेशिया और फिलीपींस के बाजारों में पहुंच चुके हैं।
खाद्य और कृषि क्षेत्र में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में योगदान के आधार पर, आज इफको दुनिया की नंबर 1 सहकारी समिति बन चुकी है। उन्नत प्रौद्योगिकी को एकीकृत करके, नवाचार और सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देकर, इफको और भारत का सहकारी आंदोलन, आर्थिक परिवर्तन को आगे बढ़ा रहा है, जिससे दीर्घकालिक समृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हो रही है।
वैश्विक सहकारी आंदोलन में इफको का नेतृत्व लगातार बढ़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (आईसीए) के सदस्य के रूप में, इफको वैश्विक सहकारी नीतियों को आकार देने में सक्रिय रूप से योगदान देता है। इस आयोजन ने सहकारी उन्नति में भारत के नेतृत्व को सुदृढ़ किया तथा वैश्विक सहकारी नेताओं के साथ ज्ञान के आदान-प्रदान को सुगम बनाया।
त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय : सहकारी विकास का उत्प्रेरक


सहकारी क्षेत्र में विकास का सबसे उल्लेखनीय विचार, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना रहा है। इस विश्वविद्यालय की परिकल्पना सहकारी शिक्षा, अनुसंधान और नेतृत्व विकास को समर्पित एक प्रमुख संस्थान के रूप में की गई है। इसका उद्देश्य सहकारी प्रशासन को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए सहकारी नेताओं को आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान करना है । विशिष्ट प्रशिक्षण, शैक्षणिक कार्यक्रम और अनुसंधान के अवसर प्रदान करके, त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय भारत के सहकारी आंदोलन के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह विश्वविद्यालय नवाचार, नए सहकारी व्यापार मॉडल तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के केंद्र के रूप में भी काम करेगा।


यह विश्वविद्यालय कृषि, मत्स्य पालन, डेयरी, बैंकिंग और विपणन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में तकनीकी और प्रबंधकीय शिक्षा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। डिग्री और डिप्लोमा कार्यक्रमों के अलावा, विश्वविद्यालय छात्रों, सहकारी समितियों के सदस्यों और उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए विशेष पाठ्यक्रम भी तैयार करेगा। इस पहल से कौशल विकास और जागरूकता को बढ़ावा देकर सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने और अंततः अर्थव्यवस्था के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में विकास और प्रगति को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।


संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित करने से आर्थिक विकास में सहकारी मॉडल का महत्व उजागर होता है। सहकारिता मंत्रालय विशेष रूप से गरीबी उन्मूलन, सतत विकास और समावेशी आर्थिक विकास जैसी चुनौतियों से निपटने हेतु इसे वैश्विक स्तर पर सहकारिता के सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखता है। प्रमुख हितधारकों को शामिल करने तथा सहकारिता-आधारित समृद्धि में भारत की प्रगति को उजागर करने के लिए विभिन्न पहल, कार्यक्रम और सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।

अपनी रणनीतिक पहलों और दूरदर्शी नीतियों के माध्यम से, सहकारिता मंत्रालय ने भारत के सहकारी क्षेत्र को सफलतापूर्वक बदल दिया है। जारी सुधार और आधुनिकीकरण प्रयासों के साथ-साथ त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना से यह सुनिश्चित होता है कि भारत सहकारी नवाचार और ग्रामीण विकास में अग्रणी है। ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाकर, डिजिटल एकीकरण और सहकारी उद्यमिता को बढ़ावा देकर, सरकार सहकारी नेतृत्व आधारित आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत और टिकाऊ मॉडल तैयार कर रही है। भारत में सहकारी आंदोलन अभूतपूर्व ऊंचाई पर पहुंच गया है, जिससे ग्रामीण समृद्धि और राष्ट्रीय प्रगति में इसकी भूमिका मजबूत हो गई है।

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