Published on: April 23, 2026
By: BTNI
Location:Kolkata/New Delhi,India
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में गुरुवार को रिकॉर्ड तोड़ मतदान दर्ज किया गया। राज्य की 294 सीटों में से 152 सीटों पर मतदान हुआ, जिसमें सुबह से ही मतदाताओं में भारी उत्साह देखने को मिला।
चुनाव आयोग के रुझानों के अनुसार,
सुबह 11 बजे तक करीब 41% मतदान
दोपहर 1 बजे तक 62% मतदान
शाम 3 बजे तक 78-79% मतदान
और शाम 5 बजे तक मतदान बढ़कर 89.93% तक पहुंच गया
अंतिम आंकड़ा मतदान समाप्ति के बाद और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे यह चरण “रिकॉर्ड मतदान” के रूप में दर्ज हो सकता है।
मोदी का दावा – बदलाव तय
भारी मतदान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह असाधारण मतदान “परिवर्तन की लहर” का संकेत है। उन्होंने विश्वास जताया कि जहां भी इतना अधिक मतदान होता है, वहां भारतीय जनता पार्टी को फायदा मिलता है और इस बार बंगाल में भाजपा जीत की ओर बढ़ रही है।

मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें
राज्य के विभिन्न जिलों—मुर्शिदाबाद, मेदिनीपुर, पुरुलिया, बांकुड़ा और उत्तर बंगाल के इलाकों—में सुबह से ही लंबी कतारें देखी गईं। महिलाओं, युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं की बड़ी भागीदारी ने चुनाव को खास बना दिया।
हिंसा और विवाद भी साथ-साथ
उत्साह के बीच कई स्थानों से झड़प, मारपीट और पथराव की घटनाएं भी सामने आईं। मुर्शिदाबाद के नाउदा और डोमकल क्षेत्र, दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज, आसनसोल क्षेत्र जैसे इलाकों में तनाव की स्थिति बनी रही। कुछ भाजपा प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं पर हमले के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए। चुनाव आयोग को सैकड़ों शिकायतें मिलीं, जिसमें दोनों प्रमुख दलों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए।
तीन कार्यकाल बनाम बदलाव की लड़ाई
राज्य में लगातार तीन कार्यकाल से सत्ता में काबिज ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार इस बार कड़ी चुनौती का सामना कर रही है।
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव में डराने-धमकाने की राजनीति हो रही है, जबकि सत्ताधारी दल इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है।
भारी मतदान के संकेत क्या कहते हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इतना अधिक मतदान यह दर्शाता है कि: पहले मतदान से दूर रहने वाले लोग भी इस बार बाहर निकले “डर के माहौल” की धारणा को कुछ हद तक तोड़ते हुए मतदाता सक्रिय हुए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में व्यापक भागीदारी रही|
यदि यह रुझान “परिवर्तन” की भावना से जुड़ा है, तो इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। वहीं, बंगाल में पारंपरिक रूप से उच्च मतदान सत्ताधारी दल के पक्ष में भी जाता रहा है।
अब नजर दूसरे चरण और नतीजों पर
पहले चरण के भारी मतदान ने चुनाव को बेहद रोचक बना दिया है। दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है, जबकि अंतिम नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। फिलहाल इतना तय है कि बंगाल की जनता ने इस बार बढ़-चढ़कर हिस्सा लेकर चुनाव को ऐतिहासिक बना दिया है—अब देखना यह है कि यह जनभागीदारी किसके पक्ष में फैसला सुनाती है।
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