Published on: June 08, 2026
By: BTNI
Location: Palwal (Hariyana), India
हरियाणा के पलवल जिले के गांव अहरवां (अहरवा) में किसानों के लिए एक नई उम्मीद की किरण उभरी है। जहां पिछले 30 साल से लगातार जलभराव की समस्या खेतों को दलदल में बदल रही थी, वहां संत रामपाल जी महाराज के नेतृत्व वाले किसान-मजदूर बचाओ अभियान के तहत जल निकासी का कार्य शुरू हो गया है। 15,000 फीट से अधिक पाइपलाइन और हैवी मोटरों की मदद से अब डूबे खेतों में फिर से फसल लहलहाने की उम्मीद जगी है। यह अभियान न केवल स्थानीय किसानों के लिए जीवनदान साबित हो रहा है, बल्कि सरकारों की नाकामी को भी उजागर कर रहा है।
30 साल का जलभराव: किसानों का दर्द
अहरवां गांव और आसपास के इलाके में बरसाती पानी का जलभराव एक पुरानी समस्या है। किसान बताते हैं कि पिछले तीन दशकों से खेतों में पानी जमा रहने के कारण फसलें सड़ जाती थीं। अपनी अपनी जमीन होने के बावजूद कई किसान बाजार से अनाज खरीदने को मजबूर थे। हजारों एकड़ कृषि भूमि बंजर दलदल में बदल गई थी। सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। पानी निकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था न होने से किसान हर साल आर्थिक नुकसान उठाते रहे।
मजदूरों की रोजी-रोटी भी प्रभावित हुई क्योंकि खेती न होने से काम के अवसर कम हो गए।इसी समस्या से जूझ रहे अहरवां के किसानों ने संत रामपाल जी महाराज के अभियान की मदद मांगी। अभियान टीम ने तुरंत प्रतिसाद दिया और भारी मात्रा में पाइपलाइन तथा मोटरें पहुंचाईं। स्थानीय किसान और ग्राम पंचायत के सदस्यों ने बताया कि अब पानी निकलने लगा है और खेतों में हरियाली लौट रही है। एक किसान ने भावुक होकर कहा, “30 साल बाद अपनी जमीन पर फसल उगाने का सपना सच हो रहा है। संत जी ने हमारा गांव बचा लिया।”

संत रामपाल जी महाराज कौन हैं?
संत रामपाल जी महाराज का जन्म 8 सितंबर 1951 को हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव धनाना में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम भक्त नंदराम और माता का नाम भक्तमती इंद्रा देवी था। बचपन से ही कृषि कार्यों में लगे रहने वाले रामपाल जी ने इंजीनियरिंग डिप्लोमा पूरा किया और हरियाणा सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के रूप में 18 साल तक सेवा की।1990 के दशक में आध्यात्मिक खोज ने उन्हें स्वामी रामदेवानंद जी महाराज के पास ले गई, जहां उन्होंने पूर्ण ब्रह्म कबीर परमात्मा का सच्चा ज्ञान प्राप्त किया।
1994-95 में सरकारी नौकरी छोड़कर उन्होंने पूर्णकालिक आध्यात्मिक और सामाजिक सेवा में खुद को समर्पित कर दिया। सतलोक आश्रम (धनाना धाम) उनके मुख्य केंद्र के रूप में स्थापित हुआ।संत रामपाल जी महाराज को उनके अनुयायी जगतगुरु और पूर्ण संत मानते हैं, जो वेदों, गीता, कुरान, बाइबिल और अन्य ग्रंथों के प्रमाणों के आधार पर सच्ची भक्ति और समाज सुधार का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने दहेज, शराब, नशे, भ्रष्टाचार जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लगातार आवाज उठाई है। उनकी शिक्षाएं लाखों लोगों को प्रभावित कर चुकी हैं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
किसान-मजदूर बचाओ अभियान: उद्देश्य और प्रभाव
किसान-मजदूर बचाओ अभियान संत रामपाल जी महाराज द्वारा शुरू किया गया एक बड़ा सामाजिक सेवा अभियान है, जो अन्नपूर्णा मुहिम का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य बाढ़, जलभराव और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों और मजदूरों को तुरंत राहत पहुंचाना है। अभियान के तहत पाइपलाइन, हैवी मोटरें, आर्थिक मदद और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं।यह अभियान हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों के सैकड़ों गांवों तक पहुंच चुका है। पलवल के अलावा झज्जर, हिसार, रोहतक आदि जिलों में भी सैकड़ों एकड़ भूमि को बचाया गया है। उदाहरण के लिए:
#गांव बड़ा (पलवल) में 70,000 फीट पाइपलाइन और 16 मोटरें दी गईं।
#अन्य गांवों में हजारों फीट पाइप और मोटरों से जल निकासी कराई गई।
किसान बताते हैं कि जहां सरकारें सालों तक समस्या को नजरअंदाज करती रहीं, वहां संत जी का अभियान कुछ दिनों में स्थायी समाधान दे रहा है। इस अभियान ने न केवल फसलों को बचाया बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया है। कई सरपंच और गांववासी संत जी को “किसानों का मसीहा” कहकर सम्मानित कर चुके हैं।
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किसानों की प्रतिक्रिया और भविष्य की उम्मीद
अहरवां के किसानों में नई energy और उम्मीद दिख रही है। ग्राम पंचायत के सदस्यों ने संत रामपाल जी महाराज का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मदद समय पर मिली। अब खेतों में गेहूं, धान और अन्य फसलें बोई जा सकेंगी, जिससे परिवारों की आय बढ़ेगी और मजदूरों को काम मिलेगा।यह अभियान सिर्फ राहत नहीं, बल्कि जागरूकता भी फैला रहा है। संत रामपाल जी महाराज बार-बार कहते हैं कि “किसान-मजदूर बचेगा तभी देश बचेगा”। यह नारा अब पूरे क्षेत्र में गूंज रहा है।
निष्कर्ष
संत रामपाल जी महाराज का किसान-मजदूर बचाओ अभियान सामाजिक सेवा का एक अनुकरणीय मॉडल बन गया है। अहरवां (पलवल) इसका ताजा उदाहरण है, जहां 30 साल की निराशा के बाद उम्मीद की किरण दिख रही है। यदि ऐसे प्रयासों को सरकारी समर्थन मिले तो देश के किसान और मजदूर मजबूत हो सकते हैं। फिलहाल, हजारों किसान संत जी के इस मानवीय कार्य के लिए उनके आभारी हैं और भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि यह अभियान और विस्तार पाए।


