गुणवत्ता और फ्यूमिगेशन में पाई गई कमियों के कारण बड़ा झटका
Published on: May 29, 2026
By: BTNI
Location: New Delhi, India
भारतीय आमों के प्रेमी जापानी उपभोक्ताओं के लिए इस मौसम में बुरी खबर है। जापान ने मार्च 2026 में अपनी प्लांट क्वारंटाइन जांच के दौरान भारतीय उपचार सुविधाओं में फ्यूमिगेशन और डिसइंफेक्शन प्रक्रियाओं में गंभीर कमियां पाए जाने के बाद भारतीय आमों के आयात पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह फैसला लगभग 20 वर्षों बाद आया है, जब 2006 में फ्रूट फ्लाई (फलों की मक्खी) को लेकर लगी लंबी रोक हटाई गई थी। इस बार की रोक स्थायी नहीं बल्कि मौसमी है, जो अप्रैल-जून के पीक एक्सपोर्ट सीजन के दौरान प्रभावी है।
योकohama प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने 31 मार्च 2026 को जारी नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया कि 25 मार्च 2026 के बाद भारत से जारी इंस्पेक्शन सर्टिफिकेट वाले शिपमेंट स्वीकार नहीं किए जाएंगे। आयात तब तक रोका रहेगा जब तक जापान के अधिकारी भारतीय सुविधाओं के ऑपरेशनल और ट्रीटमेंट स्टैंडर्ड में सुधार से संतुष्ट नहीं हो जाते। प्रभावित प्रमुख किस्मों में अल्फांसो (हापुस), केसर, लंगड़ा और बंगनप्पली शामिल हैं, जो जापान में प्रीमियम मार्केट में बिकती हैं।
पृष्ठभूमि: 20 वर्ष पुरानी रोक और 2006 में राहत
1986 में फ्रूट फ्लाई संक्रमण के डर से जापान ने भारतीय आमों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था, जो पूरे 20 साल चला। 2006 में भारत ने वाष्प ताप उपचार (Vapor Heat Treatment – VHT) जैसी उन्नत तकनीक अपनाकर और कड़े फाइटोसैनिटरी मानकों को पूरा करके इस रोक को हटवाया। उसके बाद से लगातार निर्यात हो रहा था। जापानी निरीक्षक हर मौसम से पहले भारतीय सुविधाओं का दौरा करते रहे हैं। इस साल उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित एक VHT सुविधा की जांच में कमियां मिलीं, जिसके बाद पूरे निर्यात पर रोक लग गई।

यह रोक भारत के कुल आम निर्यात का बड़ा हिस्सा नहीं प्रभावित करती, क्योंकि जापान भारत का सबसे बड़ा बाजार नहीं है। मुख्य गंतव्य UAE, UK, USA, Saudi Arabia आदि हैं। लेकिन जापान उच्च मूल्य वाला बाजार है, जहां प्रीमियम किस्में अच्छी कीमत पाती हैं। निर्यातकों का कहना है कि यह एक छोटा बाजार होने के बावजूद ब्रांडिंग और गुणवत्ता के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
निर्यातकों पर असर और प्रतिक्रियाएं
इस फैसले से निर्यातक चिंतित हैं। कई ने सवाल उठाया है कि क्या समस्या सिर्फ तकनीकी है या जापानी कंपनियों का वीएचटी सिस्टम पर एकाधिकार है। उत्तर प्रदेश के एक निर्यातक अकरम बैग ने कहा, “भारतीय आमों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नई ट्रीटमेंट सिस्टम विकसित हो रही है। अगर सिर्फ जापानी बने सिस्टम को मंजूरी मिले तो यह तकनीकी अनुपालन से ज्यादा एकाधिकार और कूटनीति का मामला लगता है।” महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख आम उत्पादक राज्यों के निर्यातक इस मौसम में नुकसान उठा रहे हैं। कुछ शिपमेंट पहले से बंदरगाहों पर अटके हुए हैं। कुल मिलाकर भारतीय आम निर्यात इस साल मौसम, कम पैदावार और गुणवत्ता नियंत्रण की चुनौतियों से जूझ रहा है।
भारत सरकार आगे क्या करेगी?
भारत सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) और वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी जापानी समकक्षों से संपर्क में हैं। संभावित कदम इस प्रकार हैं:
तत्काल सुधार और ऑडिट: प्रभावित VHT सुविधाओं का विस्तृत ऑडिट कर कमियां दूर करना। स्टाफ ट्रेनिंग, उपकरण अपग्रेडेशन और प्रक्रियाओं में सख्ती लाना।
संयुक्त निरीक्षण: जापान के साथ संयुक्त टीम भेजकर सुधारों का प्रदर्शन करना, ताकि जल्द से जल्द रोक हटाई जा सके।
डिप्लोमैटिक प्रयास: विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास टोक्यो के जरिए उच्च स्तरीय बातचीत। पिछले 2006 के अनुभव के आधार पर तकनीकी सहयोग बढ़ाना।
गुणवत्ता नियंत्रण मजबूत करना: पूरे आम निर्यात चेन में बेहतर फाइटोसैनिटरी प्रोटोकॉल लागू करना। अन्य देशों (EU, USA आदि) के सख्त मानकों को ध्यान में रखते हुए सर्टिफिकेशन सिस्टम को अपग्रेड करना, ताकि भविष्य में ऐसे झटके न लगें।
विविधीकरण: जापान पर निर्भरता कम करते हुए नए बाजारों (दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप) में प्रवेश और घरेलू बाजार को मजबूत करना।
सरकार का लक्ष्य है कि इस सीजन का नुकसान कम हो और अगले मौसम तक पूर्ण निर्यात बहाल हो जाए। APEDA ने निर्यातकों को वैकल्पिक बाजारों की ओर मुड़ने की सलाह दी है।
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व्यापक संदर्भ: भारतीय आम निर्यात की स्थिति
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा पैदा करता है। फिर भी निर्यात कुल उत्पादन का बहुत छोटा प्रतिशत है – करीब 1-2%। 2025-26 में कुल निर्यात मूल्य सैकड़ों करोड़ रुपये का था, जिसमें अल्फांसो और केसर जैसी किस्में प्रमुख हैं। जापान जैसे बाजार प्रीमियम पेमेंट देते हैं, लेकिन सख्त नियमों का पालन जरूरी है। यह घटना भारतीय कृषि निर्यात क्षेत्र के लिए एक चेतावनी है। जलवायु परिवर्तन, कीट प्रबंधन, पोस्ट-हार्वेस्ट हैंडलिंग और प्रमाणन में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। केंद्रीय कृषि मंत्री और संबंधित विभागों ने निर्देश दिए हैं कि सभी निर्यात-उन्मुख सुविधाओं का रेगुलर ऑडिट हो और अंतरराष्ट्रीय मानकों से बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जाए।
निष्कर्ष
जापान द्वारा भारतीय आमों पर लगाई गई यह अस्थायी रोक गुणवत्ता नियंत्रण की अहमियत को रेखांकित करती है। यह स्थायी नहीं है, लेकिन इससे सबक लेते हुए भारत को अपनी निर्यात व्यवस्था को और मजबूत बनाना होगा। निर्यातकों, किसानों और सरकार के समन्वय से जल्द इस समस्या का समाधान निकलने की उम्मीद है। भारतीय आम की दुनिया भर में लोकप्रियता बरकरार है – अल्फांसो का स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता किसी से छिपी नहीं है। सही प्रयासों से जापान समेत सभी बाजारों में भारतीय आम फिर चमकेंगे।



