प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में उमड़ी भीड़ ने साबित किया कि केरल में एनडीए की लहर, दक्षिणी क्षेत्र में बढ़ती लोकप्रियता से एलडीएफ और यूडीएफ की नींद उड़ी
Published on: March 11, 2026
By: BTNI
Location: Kochi, India
केरल के एर्नाकुलम जिले में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के प्रति अपार उत्साह देखा गया, जो पूरे राज्य की बदलती राजनीतिक हवा का संकेत दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया रैली में उमड़ी भारी भीड़ ने साफ कर दिया कि केरल के लोग अब विकास-केंद्रित शासन की ओर रुख कर रहे हैं। यह उत्साह न केवल एर्नाकुलम तक सीमित है, बल्कि पूरे दक्षिणी केरल में फैल रहा है, जहां एनडीए की लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव 2026 के विधानसभा चुनावों में बड़ा उलटफेर कर सकता है, जहां एनडीए अपनी पैठ मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।एर्नाकुलम, जो कोच्चि शहर को अपने में समेटे हुए है, हमेशा से केरल की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां की आर्थिक गतिविधियां, बंदरगाह, आईटी सेक्टर और पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। लेकिन हाल के वर्षों में बेरोजगारी, बाढ़ प्रबंधन की विफलता और सामाजिक विवादों ने लोगों में असंतोष पैदा किया है।

एनडीए ने इन्हीं मुद्दों को अपना हथियार बनाया है। प्रधानमंत्री मोदी की रैली में हजारों की संख्या में युवा, महिलाएं और विभिन्न समुदायों के लोग शामिल हुए, जिन्होंने ‘एनडीए ऑल द वे’ के नारे लगाए। मोदी ने अपने भाषण में केरल की प्रतिभाशाली युवा पीढ़ी का जिक्र किया और कहा कि राज्य में अवसरों की कमी के कारण युवाओं को बाहर जाना पड़ता है। उन्होंने वादा किया कि एनडीए सत्ता में आई तो विकास का मॉडल लागू कर रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे और नवाचार पर फोकस किया जाएगा।केरल में एनडीए की बढ़ती ताकत का एक बड़ा कारण हालिया राजनीतिक गठजोड़ हैं।
ट्वेंटी20 पार्टी, जो एर्नाकुलम जिले के आठ विधानसभा क्षेत्रों में 10 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर रखती है, ने हाल ही में एनडीए में शामिल होने का ऐलान किया। यह पार्टी मुख्य रूप से कांग्रेस-नियंत्रित क्षेत्रों में मजबूत है, जिससे कांग्रेस को सीधा झटका लगा है। ट्वेंटी20 के नेता सबू जैकब ने कहा कि मोदी सरकार की योजनाएं जैसे स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया केरल के युवाओं के लिए वरदान साबित होंगी। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और राज्य भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने एर्नाकुलम के थ्रिक्ककारा में एनडीए के नए क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया।
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इस मौके पर उन्होंने कहा कि एनडीए केरल में एक मजबूत, एकजुट और तेजी से बढ़ती राजनीतिक ताकत है, जो ‘विकसित केरल’ के सपने को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है।हाल के सर्वेक्षणों ने भी इस उत्साह की पुष्टि की है। ‘मूड ऑफ द स्टेट’ सर्वे के अनुसार, एनडीए का वोट शेयर दक्षिणी केरल में 18 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो उत्तरी क्षेत्र के 10.9 प्रतिशत और मध्य केरल के 13.77 प्रतिशत से काफी अधिक है। सर्वे में यह भी सामने आया कि सामाजिक और धार्मिक विवाद, जैसे सबरीमाला मुद्दा, एनडीए के लिए अनुकूल माहौल बना रहे हैं। ये विवाद सत्तारूढ़ एलडीएफ की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि एनडीए अपने आधार को मजबूत कर रहा है।
सर्वे में 56 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने एलडीएफ की नीतियों पर असंतोष जताया, खासकर दक्षिणी क्षेत्र में। एनडीए को यह फायदा मिल रहा है कि वह विकास और प्रदर्शन की राजनीति पर जोर दे रहा है, जबकि एलडीएफ और यूडीएफ को भ्रष्टाचार और कुशासन के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।एर्नाकुलम में एनडीए की रैली ने स्थानीय मुद्दों पर भी प्रकाश डाला। यहां के लोग बंदरगाह विकास, आईटी हब विस्तार और पर्यटन को बढ़ावा देने की मांग कर रहे हैं। मोदी ने वादा किया कि केंद्र सरकार केरल के बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाएगी, जैसे कोच्चि मेट्रो का विस्तार और नए राजमार्ग।

युवाओं ने रैली में बताया कि वे राज्य से बाहर नौकरी की तलाश में जाते हैं, लेकिन एनडीए की योजनाएं उन्हें घर वापस ला सकती हैं। महिलाओं ने सुरक्षा और सशक्तिकरण कार्यक्रमों की सराहना की। यह उत्साह पूरे केरल में फैल रहा है, जहां एनडीए अब छोटे-छोटे गठबंधनों से अपनी पहुंच बढ़ा रहा है।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि केरल में मुख्य मुकाबला एलडीएफ और यूडीएफ के बीच है, लेकिन एनडीए ‘स्विंग फैक्टर’ बनकर चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।
एर्नाकुलम जैसी जगहों पर एनडीए की जीत कुछ सीटों पर उलटफेर कर सकती है। कुल मिलाकर, एर्नाकुलम का यह उत्साह केरल की राजनीति में नई ऊर्जा भर रहा है, जो दिखाता है कि लोग अब बदलाव चाहते हैं। एनडीए की यह लहर क्या 2026 के चुनावों में तूफान बन जाएगी, यह समय बताएगा, लेकिन फिलहाल माहौल एनडीए के पक्ष में है।


