Published on: June 10, 2026
By: BTNI
Location: New Delhi, India
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते ४,३९९ दिन भारत के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय साबित हुए हैं। इन वर्षों में सरकार ने न सिर्फ बड़े-बड़े सुधार किए, बल्कि उन सुधारों को जनता के जीवन तक पहुंचाने का अभूतपूर्व कार्य किया। हर कदम पर जनता का व्यापक समर्थन रहा, जबकि विपक्ष ने तीखा और कभी-कभी हिंसक विरोध भी किया। प्रत्येक उपलब्धि की अपनी अलग कहानी है — लंबी लड़ाई, राजनीतिक बाधाएं, अदालती संघर्ष, जन-आंदोलन और अंत में शानदार सफलता।
१. अनुच्छेद ३७० का ऐतिहासिक निरस्तीकरण

५ अगस्त २०१९ को संसद में अनुच्छेद ३७० को निरस्त करने का फैसला लिया गया, जो जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता था। दशकों से यह प्रावधान अलगाववाद, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और विकास की रुकावटों का कारण बना हुआ था। विपक्षी दलों ने इसे “संवैधानिक हत्या”, “जनता की इच्छा के विरुद्ध” और “संघीय ढांचे पर हमला” बताते हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किए। कई विपक्षी नेता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और लंबे समय तक बहस चली। लेकिन आम जनता, विशेषकर कश्मीर घाटी के युवाओं और महिलाओं ने इस फैसले का स्वागत किया। आज वहां लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हुई हैं, चुनाव हुए, विकास परियोजनाएं तेज हुईं और आतंकवाद में भारी कमी आई है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब पूर्ण रूप से भारत का अभिन्न अंग बन चुके हैं।
२. राम मंदिर — ५०० वर्षों की प्रतीक्षा का अंत

२२ जनवरी २०२४ को अयोध्या में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ राम मंदिर का भव्य उद्घाटन हुआ। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता, न्याय और धार्मिक भावना का प्रतीक था। १९९० के दशक से चले राम मंदिर आंदोलन में हजारों कारसेवकों ने बलिदान दिया। विपक्ष ने पूरे मामले को सांप्रदायिक रंग देते हुए “मंदिर-मस्जिद विवाद” का रूप दिया और अदालत में दशकों तक मुकदमा लड़ा। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और पूरे देश की जनता के अटूट समर्थन के बाद यह सपना साकार हुआ। आज अयोध्या न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यटन और आर्थिक विकास का भी बड़ा केंद्र बन चुकी है।
३. UPI — विश्व का सबसे बड़ा रीयल-टाइम पेमेंट सिस्टम

भारतीय रिजर्व बैंक और NPCI की भागीदारी से शुरू हुआ UPI आज दुनिया का सबसे बड़ा रीयल-टाइम पेमेंट प्लेटफॉर्म बन चुका है। अरबों ट्रांजेक्शन हर महीने हो रहे हैं। शुरूआत में विपक्ष ने इसे “जल्दबाजी”, “सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक” और “बड़ी कंपनियों का फायदा” बताकर विरोध किया। लेकिन छोटे दुकानदार, किसान, रेहड़ी-पटरी वाले और आम नागरिक ने इसे दिल से अपनाया। नकद रहित अर्थव्यवस्था की दिशा में यह एक क्रांतिकारी कदम साबित हुआ। आज UPI को कई विदेशी देश भी अपना रहे हैं।
४. GST — एक राष्ट्र, एक कर व्यवस्था

१ जुलाई २०१७ को पूरे देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू किया गया। इससे पहले अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग टैक्स सिस्टम था, जो व्यापार को जटिल बनाता था। विपक्ष ने इसे “व्यापारियों की लूट”, “महंगाई बढ़ाने वाला” और “राज्यों के अधिकारों पर हमला” बताया। कई राज्यों में भारी प्रदर्शन हुए और व्यापारी संगठनों ने विरोध जताया। लेकिन लंबे समय में इसने टैक्स चोरी कम की, व्यापार को आसान बनाया और अर्थव्यवस्था को एकीकृत किया। आज GST कलेक्शन लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है।
५. नक्सलवाद मुक्त भारत की ओर

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के साहसिक अभियानों और समानांतर विकास योजनाओं (रोड, स्कूल, अस्पताल, बिजली) के माध्यम से नक्सलवाद को जड़ से कमजोर किया गया। विपक्ष ने इन अभियानों को “जन विरोधी” और “आदिवासियों पर अत्याचार” करार दिया। लेकिन प्रभावित इलाकों की जनता, खासकर महिलाएं और बच्चे, आज शांति और विकास की सांस ले रहे हैं। कई जिले पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित हो चुके हैं।
६. वंदे भारत — स्वदेशी गौरव की सेमी हाई-स्पीड ट्रेन

‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत BEML और ICF द्वारा विकसित वंदे भारत ट्रेन भारत की पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड ट्रेन बनी। पुरानी रेलवे व्यवस्था, तकनीकी चुनौतियों और संसाधनों की कमी के बावजूद इसे सफलतापूर्वक चलाया गया। विपक्ष ने इसे “शोरूम प्रोजेक्ट” और “अमीरों के लिए” बताया। लेकिन आम यात्रियों की भारी भीड़, समय की पाबंदी और आरामदायक यात्रा ने साबित कर दिया कि जनता इसे पसंद करती है। अब कई रूटों पर वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं।
७. स्वच्छ भारत — खुला शौच मुक्त राष्ट्र

स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों शौचालयों का निर्माण किया गया। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता की क्रांति आई। विपक्ष ने शुरू में इसे “असंभव”, “केवल प्रचार” और “आंकड़ों का खेल” बताया। लेकिन ग्रामीण महिलाओं, बच्चों और गरीब परिवारों ने सबसे ज्यादा फायदा महसूस किया। खुले में शौच की समस्या में भारी कमी आई और स्वच्छता की आदत अब सामाजिक परिवर्तन बन चुकी है।
८. विश्व की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था

कोविड-१९ महामारी, वैश्विक मंदी और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहा। विपक्ष ने हर तिमाही जीडीपी आंकड़ों पर सवाल उठाए और “नौकरियां नहीं, सिर्फ आंकड़े” का नारा दिया। लेकिन FDI का रिकॉर्ड प्रवाह, स्टार्टअप इकोसिस्टम, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास (सड़कें, हवाई अड्डे, बंदरगाह), डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पैकेज ने मजबूत नींव रखी। युवा उद्यमी और मध्यम वर्ग ने इन सुधारों को सराहा।
निष्कर्ष
ये ४,३९९ दिन केवल सरकारी योजनाओं के नहीं, बल्कि दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, जन-समर्थन और निरंतर संघर्ष के परिणाम हैं। जहां विपक्ष ने हर बड़े कदम पर बाधाएं खड़ी कीं, वहीं आम जनता ने इन्हें अपनाया और आगे बढ़ाया। इन उपलब्धियों ने भारत को नई ऊंचाइयों की ओर ले जाने का मार्ग प्रशस्त किया है। आने वाला समय और भी गौरवशाली होने वाला है।
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