जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट की उम्रकैद की सजा पर रोक नहीं, सुनवाई जारी
Published on: April 20, 2026
By: BTNI
Location: Raipur, India
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के पुत्र और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी को आज सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। 23 साल पुराने चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई अंतरिम राहत नहीं दी।
कोर्ट ने मामले की विस्तृत सुनवाई आज (20 अप्रैल 2026) को की, लेकिन अमित जोगी की याचिका पर तत्काल स्टे (रोक) लगाने से इनकार कर दिया।क्या है ?
पूरा मामला?
2003 में रायपुर में एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की हत्या के मामले में अमित जोगी मुख्य आरोपी थे। ट्रायल कोर्ट ने 2007 में उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन सीबीआई और जग्गी परिवार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को मामले की मेरिट पर दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2026 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने उन्हें “मास्टरमाइंड” और “साजिश का ड्राइविंग फोर्स” बताया तथा तीन हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया।इस फैसले के खिलाफ अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की।
उनकी तरफ से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तंखा और सिद्धार्थ दवे ने दलीलें दीं। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को “गंभीर अन्याय” बताया और कहा कि अमित जोगी को उचित सुनवाई का अवसर नहीं मिला।
आज की सुनवाई में क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने दोनों पक्षों को सुना। हालांकि, कोर्ट ने हाईकोर्ट की सजा पर कोई अंतरिम स्टे नहीं दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अंतिम फैसला आने तक पूरी सुनवाई की जाएगी। अगली तारीख जल्द तय होने की संभावना है।अमित जोगी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा, “मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में मुझे पूरा विश्वास है कि सत्य की जीत होगी।” उनके समर्थकों ने इसे “राजनीतिक साजिश” बताया है, जबकि जग्गी परिवार ने इसे “23 साल बाद न्याय” करार दिया।
राजनीतिक हलचल
यह फैसला छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल मचा रहा है। अमित जोगी वर्तमान में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के अध्यक्ष हैं और विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियां इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पृष्ठभूमि
रामअवतार जग्गी 2003 में अजीत जोगी सरकार के दौरान हत्या का शिकार बने थे। इस मामले में 28 अन्य आरोपियों को पहले ही सजा हो चुकी है। हाईकोर्ट ने अमित जोगी को बरी करने वाले ट्रायल कोर्ट के फैसले को “कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं” बताया था?
अभी तक सुप्रीम कोर्ट ने केवल सुनवाई की है और अंतिम फैसला लंबित है। इस मामले पर नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह न सिर्फ कानूनी, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बन गया है।
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