मां बमलेश्वरी धाम में बिना अपराध संपन्न हुआ ऐतिहासिक मेला,
पुलिस बैण्ड के साथ पुलिस ने आरती कर रची नई परंपरा
Published on: March 27, 2026
By: BTNI
Location: Rajnandgaon, India

छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां बमलेश्वरी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर इस वर्ष आस्था, व्यवस्था और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस बार भीषण गर्मी की वजह से श्रद्धालुओं की संख्या कुछ कम जरूर रही फिर भी लगभग 7-8 लाख श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद पूरा मेला पूरी तरह शांतिपूर्ण और निर्विघ्न संपन्न हुआ—बिना किसी बड़ी आपराधिक घटना के।
डोंगरगढ़ की ऊपरी पहाड़ी पर स्थित माता बमलेश्वरी का मंदिर, जहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, और नीचे स्थित मंदिर—दोनों ही स्थानों पर भक्तों का सैलाब उमड़ा। साल में दो बार लगने वाला यह मेला छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा धार्मिक समागम माना जाता है, जिसे शक्तिपीठ का दर्जा भी दिया जाता है।

इस बार की सबसे खास बात रही—पुलिस की भूमिका और उनकी भावनात्मक सहभागिता।
पूरे मेले में सुरक्षा की कमान संभालने वाले पुलिस जवानों ने न केवल अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से निभाई, बल्कि समापन दिवस (नवमी) पर माता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भव्य आरती का आयोजन भी किया। इस आयोजन की पहल पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन रठौर ने दूरभकाष पर बातचीत के दौरान बताया कि जवानों एवं अधीनस्थों की भावनाओं को समझते हुए पुलिस बैंड के साथ पारंपरिक अंदाज में आरती का आयोजन करवाया गया।
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इस दौरान डीएसपी स्तर इंस्पेक्टर से लेकर सैकड़ों जवानों ने एक साथ मां बमलेश्वरी की आरती में भाग लिया। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना। नई परंपरा की शुरुआत यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक नई परंपरा की शुरुआत माना जा रहा है। जिस तरह महाकालेश्वर मंदिर में पुलिस और प्रशासन की विशेष भागीदारी देखने को मिलती है, या यूपी के झांसी स्थित राजा भगवान रामचंद्र की मंदिर में मंदिर में भगवान राम को राजकीय सम्मान दिया जाता है, गॉड ऑफ़ ऑनर दिया जता है,उसी तर्ज पर अब डोंगरगढ़ में भी पुलिस द्वारा मां बमलेश्वरी की आरती एक नियमित परंपरा बन सकती है।
जनता और प्रशासन दोनों में उत्साह मेले के सफल आयोजन को लेकर जहां प्रशासन ने राहत की सांस ली, वहीं श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भी खुशी का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी इस पहल की सराहना हो रही है, और इसे “आस्था और कर्तव्य का अद्भुत संगम” बताया जा रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर बन सकती है मिसाल डोंगरगढ़ का यह मॉडल——-
जहां लाखों की भीड़ के बीच बिना किसी बड़ी घटना के मेला संपन्न हुआ और पुलिस ने भावनात्मक रूप से भी जुड़कर नई परंपरा शुरू की—देशभर के अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के लिए प्रेरणा बन सकता है। यह केवल एक मेला नहीं, बल्कि एक संदेश है— जब आस्था और व्यवस्था साथ चलते हैं, तो हर आयोजन इतिहास बन जाता है।


