दूल्हे के पिता अनोज पाठक बोले – ‘बहू नहीं, बेटी चाहिए’; भिंड की शादी ने समाज को दिया मजबूत संदेश
Published on: February 08, 2026
By: BTNI
Location: Bhind, India
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में एक अनोखी शादी समारोह ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी उदाहरण पेश किया है। जहां आजकल विवाह को आर्थिक लेन-देन का माध्यम बनाया जा रहा है, वहीं यहां दूल्हे के पिता ने दहेज के रूप में मिले 51 लाख रुपये पूरी तरह लौटा दिए और सिर्फ 1 रुपया तथा एक नारियल स्वीकार कर बेटे का विवाह संपन्न कराया।
इस घटना ने न केवल पूरे इलाके में सुर्खियां बटोरी हैं, बल्कि समाज में दहेज विरोधी सोच को मजबूती प्रदान की है।यह घटना 5 फरवरी 2025 को भिंड शहर के जगदीश मैरिज गार्डन में हुई। खिड़किया मोहल्ला निवासी अनोज पाठक के बेटे आकर्ष पाठक का विवाह जबलपुर से आई दुल्हन अनिक्षा के साथ संपन्न हुआ। फलदान की रस्म के दौरान दुल्हन के पिता विनोद उपाध्याय ने परंपरा के अनुसार 51 लाख रुपये शगुन के रूप में भेंट किए। लेकिन अनोज पाठक ने इस राशि को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा, “हम शादी करने आए हैं, कोई सौदा करने नहीं। हमें धन नहीं, घर में बेटी चाहिए। विवाह रिश्तों का बंधन है, आर्थिक लेन-देन नहीं।”अनोज पाठक ने आगे बताया कि उनके दो बेटे हैं और वे हमेशा से दहेज लेने के खिलाफ रहे हैं। अच्छे संस्कार वाली लड़कियों के परिवार दहेज की मांग से डरकर पीछे हट जाते हैं, इसलिए उन्होंने फैसला किया कि बेटे की शादी में कोई दहेज नहीं लेंगे।
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जब दुल्हन पक्ष को लगा कि यह फैसला गुस्से में लिया गया है, तो परिजनों ने समझाया और वे भी खुश हो गए। इस दौरान मौजूद सभी लोग भावुक हो उठे और कई की आंखों में आंसू आ गए।यह कदम समाज के लिए एक बड़ा संदेश है। दहेज प्रथा के कारण कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं, बेटियों को बोझ समझा जाता है और सामाजिक दबाव बढ़ता है। अनोज पाठक का यह निर्णय दर्शाता है कि शिक्षित और जागरूक लोग यदि आगे आएं तो दहेज जैसी कुरीति को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
स्थानीय लोग इसे ‘लक्ष्मी’ के रूप में बेटी को अपनाने की मिसाल बता रहे हैं।भिंड जिले में इस घटना की अब खूब चर्चा हो रही है। लोग इसे सकारात्मक बदलाव की शुरुआत मान रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि ऐसी मिसालें अन्य परिवारों को भी प्रेरित करेंगी। अनोज पाठक ने साबित कर दिया कि सच्चा रिश्ता पैसे से नहीं, बल्कि सम्मान, संस्कार और प्रेम से बनता है। यह शादी न केवल आकर्ष और अनिक्षा के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए यादगार बन गई है।



