कमिश्नरेट प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत, पूरे रायपुर शहर को दायरे में लेने और पुलिस बल बढ़ाने की उठी मांग
Published on: August 08, 2026
By: BTNI
Location: Raipur, India
राजधानी रायपुर में लागू की गई पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली को लेकर अब इसके स्वरूप, अधिकार क्षेत्र और संसाधनों पर गंभीर बहस शुरू हो गई है। रायपुर के सांसद एवं लंबे समय तक रायपुर शहर का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ नेता व वर्अतमान में रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कमिश्नरेट प्रणाली का स्वागत करते हुए इसके मौजूदा ढांचे में कई महत्वपूर्ण कमियां भी गिनाईं।
एक कार्यक्रम के दौरान सांसद अग्रवाल ने कहा कि राजधानी में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू करना सरकार का अच्छा और जरूरी कदम है, लेकिन इसे प्रभावी बनाने के लिए पर्याप्त अधिकार, स्पष्ट अधिकार क्षेत्र और पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराना जरूरी है। उनका कहना था कि मौजूदा व्यवस्था को पूरी तरह अधिकार-संपन्न किए बिना कमिश्नरेट प्रणाली अपने मूल उद्देश्य को अपेक्षित रूप से हासिल नहीं कर पाएगी।
“बिना दांत और बिना सींग के कमिश्नरेट का क्या फायदा?”
सांसद अग्रवाल ने कमिश्नरेट की मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए इसे ऐसे तंत्र के रूप में बताया, जिसके पास अपेक्षित अधिकार नहीं हैं। उनका स्पष्ट संकेत था कि यदि पुलिस कमिश्नरेट को अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था में प्रभावी भूमिका निभानी है तो उसे निर्णायक अधिकारों से लैस करना होगा।
=उन्होंने कहा कि पुलिस को जितने अधिकार दिए जाएंगे, कार्रवाई उतनी ही प्रभावी और त्वरित हो सकेगी। आधे-अधूरे अधिकारों के साथ कमिश्नरेट व्यवस्था लागू करने से उस उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी, जिसके लिए यह प्रणाली लाई गई है।
पूरे रायपुर शहर को कमिश्नरेट के दायरे में लाने की जरूरत
सांसद ने कमिश्नरेट के अधिकार क्षेत्र को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राजधानी रायपुर का पूरा शहरी क्षेत्र एक समान पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था के अंतर्गत होना चाहिए।
उनका तर्क है कि यदि शहर के कुछ हिस्से कमिश्नरेट व्यवस्था में हैं और कुछ क्षेत्र इसके बाहर हैं, तो कानून-व्यवस्था की एकीकृत और प्रभावी निगरानी में व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं। इसलिए कमिश्नरेट की सीमा और अधिकार क्षेत्र को लेकर स्पष्टता के साथ आवश्यक विस्तार किया जाना चाहिए।
सिर्फ अधिकार नहीं, पर्याप्त पुलिस बल भी जरूरी
अग्रवाल ने एक महत्वपूर्ण बिंदु मानव संसाधन को लेकर उठाया। उनके मुताबिक कमिश्नरेट व्यवस्था में वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासनिक ढांचे को लेकर आवश्यक कदम उठाए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सिपाही, हवलदार और अन्य फील्ड स्टाफ की पर्याप्त संख्या भी जरूरी है।
उन्होंने संकेत दिया कि पुलिस कमिश्नरेट का ढांचा तभी प्रभावी ढंग से काम कर पाएगा, जब उसके पास पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी हों और उन्हें आधुनिक संसाधनों के साथ काम करने का अवसर मिले।
अपराध नियंत्रण में दिखना चाहिए कमिश्नरेट का असर
सांसद अग्रवाल की चिंता का सबसे बड़ा केंद्र अपराध नियंत्रण है। उनका मानना है कि कमिश्नरेट प्रणाली का वास्तविक मूल्यांकन इस बात से होना चाहिए कि वह अपराधों पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से नियंत्रण स्थापित करती है।
यदि पुलिस को आवश्यक प्रशासनिक एवं कानूनी अधिकार मिलते हैं, पर्याप्त बल उपलब्ध होता है और पूरे शहर को एकीकृत कमांड के तहत लाया जाता है, तो कानून-व्यवस्था पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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सरकार और पुलिस विभाग के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
बृजमोहन अग्रवाल की टिप्पणियों को महज राजनीतिक बयान के बजाय राजधानी की कानून-व्यवस्था को लेकर एक नीतिगत सुझाव के तौर पर भी देखा जा रहा है। लंबे समय तक रायपुर का प्रतिनिधित्व करने और सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके अग्रवाल के अनुभव को देखते हुए पुलिस कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली पर उनके सवालों ने नई चर्चा को जन्म दिया है।
अब अहम सवाल यही है कि सरकार और पुलिस विभाग इस व्यवस्था को किस तरह और अधिक अधिकार-संपन्न, संसाधन-संपन्न और प्रभावी बनाते हैं।
रायपुर जैसे तेजी से विस्तार कर रहे शहर में अपराध और कानून-व्यवस्था की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में पुलिस कमिश्नरेट को लेकर सांसद अग्रवाल द्वारा उठाए गए सवालों पर गंभीरता से विचार किया जाना व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
सवाल अब सिर्फ कमिश्नरेट बनाने का नहीं, बल्कि उसे इतना सक्षम बनाने का है कि राजधानी की कानून-व्यवस्था पर उसका प्रभाव जमीन पर साफ दिखाई दे।



