पूर्व CM ने वकील की पोशाक में पोस्ट-पोल हिंसा के मामले में दलील दी, लेकिन बाहर निकलते वक्त वकीलों का विरोध
पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनावों में भाजपा की भारी जीत (207 सीटें) के बाद TMC शासन के 15 साल खत्म होने के बाद राज्य में पोस्ट-पोल हिंसा की खबरें आईं। इसी संदर्भ में आज पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचीं। उन्होंने वकील की काली पोशाक (गाउन) पहनकर कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से दलील दी। लेकिन सुनवाई के बाद बाहर निकलते समय उन्हें ‘चोर-चोर’, ‘पिशी चोर’, ‘भाईपो चोर’ जैसे नारे लगे, जो काफी विवादास्पद हो गया।
घटना का विस्तृत विवरण
ममता बनर्जी आज सुबह करीब 11 बजे हाईकोर्ट पहुंचीं। मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थसारथी सेन की बेंच के सामने उन्होंने एक PIL (जनहित याचिका) में दलील दी, जो TMC सांसद कल्यान बनर्जी के बेटे एडवोकेट शिर्षन्या बनर्जी द्वारा दायर की गई थी। इस याचिका में पोस्ट-पोल हिंसा, हमलों, आगजनी और TMC कार्यकर्ताओं पर अत्याचार की शिकायत की गई थी।
ममता ने कोर्ट में कहा:
महिलाएं, बच्चे, अल्पसंख्यक और बुजुर्ग भी निशाने पर हैं।
कई कार्यकर्ता मारे गए, पीटे गए या घर छोड़ने को मजबूर हुए।
पुलिस FIR दर्ज करने से इनकार कर रही है।
“बंगाल बुलडोजर स्टेट नहीं है” – अवैध संरचनाओं को भी बिना कानूनी प्रक्रिया के नहीं तोड़ा जा सकता।
उन्होंने फोटो और पीड़ितों की सूची कोर्ट में पेश की।
सुनवाई के बाद जब वे कोर्ट से बाहर निकलीं तो वकीलों और अन्य लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया। नारे लगे — “चोर! चोर!”, “पिशी चोर”, “भाईपो चोर”। स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ममता ने इशारा करते हुए आरोप लगाया, “They assaulted me” (उन्होंने मुझे assaulted किया)। TMC के वकील और सुरक्षा कर्मी उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने में जुटे। मुख्य न्यायाधीश ने भी वकीलों से शांति बनाए रखने की अपील की।
पृष्ठभूमि: चुनावी हार और 'चोर' नारे
यह घटना महज संयोग नहीं। TMC पर लंबे समय से भ्रष्टाचार, स्कैम (जैसे शिक्षक भर्ती घोटाला आदि) के आरोप लगते रहे हैं, जिसके चलते विपक्ष ‘चोर’ का नारा लगाता रहा। हाल ही में चुनावी हार के बाद Abhishek Banerjee के घर के बाहर, Mahua Moitra पर फ्लाइट में, और अन्य जगहों पर भी ‘TMC Chor’, ‘Pishi Chor’ जैसे नारे सुनाई दिए। आज का हाईकोर्ट घटनाक्रम इसी का विस्तार माना जा रहा है।
ममता बनर्जी 1982 में Jogesh Chandra College of Law से LLB पास कर चुकी हैं और पहले भी कोर्ट में वकील के रूप में पेश हो चुकी हैं, लेकिन CM रहते हुए यह दुर्लभ मौका था।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
TMC की तरफ से: प्रवक्ता Arup Chakraborty ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया। कहा कि तीन बार चुनी गई CM के साथ ऐसा बर्ताव BJP की राजनीति को दर्शाता है।
भाजपा/नए CM सुवेंदु अधिकारी: सुवेंदु ने घटना पर टिप्पणी करते हुए व्यंग्य किया और कहा कि उनके पास कई काम हैं, ऐसे सवालों का जवाब देने का समय नहीं।
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यह घटना बंगाल की बदलती सियासी हकीकत को उजागर करती है — जहां TMC अब सत्ता से बाहर है और विपक्ष (जो अब सत्ता में है) पुरानी शिकायतों का बदला ले रहा है।
क्या आगे होगा? कोर्ट ने मामले की सुनवाई तेजी से करने के संकेत दिए हैं। ममता ने सुप्रीम कोर्ट जाने का भी संकेत दिया है। बंगाल की सड़कें और अदालतें दोनों ही अभी गर्म हैं। यह घटना न सिर्फ कानूनी, बल्कि राजनीतिक और प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है — एक बार सत्ता में दबदबा रखने वाली नेता अब वकील की पोशाक में विरोध का सामना कर रही हैं।
जैसा आपने कहा, “chor” chants से legal fraternity का यह स्वागत वाकई जबरदस्त समाचार बनता है! बंगाल की राजनीति में अगले अध्याय की शुरुआत।



