मामला पूरी तरह बंद
Published on: May 19, 2026
By: BTNI
Location: New Delhi/Newyork
आज की सबसे बड़ी खबर यह है कि अमेरिकी न्याय विभाग (यूएस डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस – डीओजे) ने भारतीय अरबपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ लगाए गए सभी आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से खारिज कर दिया है। कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में संघीय अभियोजकों ने न्यायाधीश से आरोपों को “with prejudice” यानी स्थायी रूप से खारिज करने की मांग की, जिसे मंजूरी मिल गई। इसका मतलब है कि अब इस मामले को दोबारा नहीं खोला जा सकेगा। अडानी ग्रुप के लिए यह एक बड़ी राहत और कानूनी जीत है।
मामला क्या था? पूरी पृष्ठभूमि
यह मामला नवंबर 2024 का है, जब जो बाइडेन प्रशासन के अंतिम दिनों में ब्रुकलिन के पूर्वी जिला अदालत में एक पांच-गिनती वाला इंडिक्टमेंट (आरोप-पत्र) अनसील किया गया था। इसमें गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी, अडानी ग्रीन एनर्जी के विनीत जैन और अन्य अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए थे।

अभियोजकों का दावा था कि अडानी ग्रुप ने भारत में दुनिया के सबसे बड़े सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स में से एक को हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को 250-265 मिलियन डॉलर (लगभग 2,000-2,200 करोड़ रुपये) की रिश्वत दी। आरोप था कि इस रिश्वतखोरी को छिपाने के लिए अमेरिकी निवेशकों और वैश्विक वित्तीय संस्थानों से 3 बिलियन डॉलर से ज्यादा की फंडिंग जुटाई गई, जिसमें गलत और भ्रामक बयान दिए गए।
मुख्य आरोप थे:
Foreign Corrupt Practices Act (FCPA) का उल्लंघन (रिश्वतखोरी)
Securities Fraud (सिक्योरिटीज धोखाधड़ी)
Wire Fraud (वायर फ्रॉड)
Conspiracy (षड्यंत्र)
Obstruction of Justice (न्याय में बाधा)
अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को तुरंत बेबुनियाद बताया और कहा कि वे सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे। ग्रुप ने हमेशा उच्चतम स्तर की पारदर्शिता, गवर्नेंस और कंप्लायंस का दावा किया है।
क्या हुआ अब? सुनवाई और फैसला
18 मई 2026 को यूएस डीओजे ने ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क की अदालत में एक फाइलिंग की। इसमें लिखा गया: “डीओजे ने इस मामले की समीक्षा की है और अभियोजन संबंधी विवेक (prosecutorial discretion) का इस्तेमाल करते हुए इन व्यक्तिगत आरोपों पर आगे संसाधन खर्च नहीं करने का फैसला किया है।”
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न्यायाधीश निकोलस जी. गारौफिस ने इस याचिका को मंजूर कर लिया। मामला permanently dismissed with prejudice हो गया, यानी दोबारा नहीं लाया जा सकता। यह ट्रंप प्रशासन के तहत लंबित मामलों को सुलझाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।इससे पहले:SEC (US Securities and Exchange Commission) के साथ 18 मिलियन डॉलर का सिविल सेटलमेंट हो चुका है (बिना गलती स्वीकार किए)।
US Treasury के साथ 275 मिलियन डॉलर का सेटलमेंट ईरान प्रतिबंधों से जुड़े एक अलग मामले में हुआ।
कानूनी लड़ाई और नई टीम
अडानी ने केस के बाद अपनी कानूनी टीम को मजबूत किया। ट्रंप के पर्सनल वकील रॉबर्ट जे. गुफ्रा जूनियर की अगुवाई वाली टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सूत्रों के मुताबिक, कुछ मीटिंग्स में अडानी की तरफ से अमेरिका में निवेश के प्रस्ताव भी रखे गए, जिसमें 10 बिलियन डॉलर का निवेश और हजारों नौकरियां पैदा करने का जिक्र था।
ट्रंप प्रशासन के आने के बाद व्हाइट-कॉलर अपराधों पर फोकस में बदलाव देखा गया, जिससे कई पुराने मामले सुलझाए जा रहे हैं।
अडानी ग्रुप पर क्या असर?
अडानी ग्रुप भारत की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी कंपनियों में से एक है। पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स, पावर, सोलर, ग्रीन हाइड्रोजन और डेटा सेंटर्स जैसे क्षेत्रों में यह तेजी से विस्तार कर रहा है। अमेरिकी केस के चलते शेयर बाजार और निवेशकों में अनिश्चितता थी, लेकिन अब यह पूरी तरह दूर हो गई है।अडानी ग्रुप ने बयान में कहा कि यह फैसला उनके पक्ष में है और अब वे भारत की विकास गाथा में और योगदान देंगे। गौतम अडानी ने हमेशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास नीतियों का समर्थन किया है और कई बड़े प्रोजेक्ट्स में भागीदारी की है।
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विशेषज्ञों की राय
कई कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में सबूतों की कमी, भारत सरकार से सहयोग न मिलना और राजनीतिक बदलाव ने इस केस को प्रभावित किया। कुछ का मानना है कि रिश्वतखोरी के आरोपों में अमेरिकी लिंकेज कमजोर था, इसलिए डीओजे ने संसाधन बचाने का फैसला किया।यह मामला दिखाता है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय बिजनेस में कानूनी लड़ाइयां कितनी जटिल होती हैं। अडानी जैसे उद्यमी न सिर्फ भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर निवेश बढ़ा रहे हैं।
आगे क्या?
अब अडानी ग्रुप अमेरिका में नए निवेशों पर फोकस कर सकता है। सोलर, रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रा सेक्टर में ग्रुप की योजनाएं तेज होंगी। भारतीय शेयर बाजार में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद है।यह खबर न सिर्फ अडानी परिवार बल्कि पूरे भारतीय कारोबारी समुदाय के लिए राहत की है। यह साबित करता है कि मजबूत कानूनी रक्षा और सही समय पर रणनीति से बड़े केस भी सुलझाए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
यूएस डीओजे का यह फैसला ऐतिहासिक है। गौतम अडानी अब बिना किसी आपराधिक मुकदमे के बोझ के अपने साम्राज्य का विस्तार कर सकेंगे। भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों में भी यह सकारात्मक कदम माना जा रहा है। अडानी ग्रुप की सफलता कहानी जारी रहेगी – सस्टेनेबल डेवलपमेंट और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के साथ।



