Published on: May 04, 2026
By: BTNI
Location- Barabani, India
लोकतंत्र की राह कभी आसान नहीं होती, खासकर तब जब विपक्षी हिंसा और आतंक का सामना करना पड़े। बाराबानी विधानसभा सीट पर भाजपा की जीत के बाद स्थानीय कार्यकर्ता सुजॉय गोराई भावुक हो गए। उनकी आंखों में आंसू थे जब उन्होंने बताया: “हर चुनाव के बाद टीएमसी के लोग हमें मारते-पीटते थे। 15 दिन तक घर छोड़कर बाहर रहना पड़ता था। परिवार की चिंता, बच्चों की पढ़ाई, रोजी-रोटी — सब दांव पर लग जाता था। फिर भी हम हार नहीं माने। आज जनता ने बदलाव कर दिया है।”
सुजॉय गोराई साधारण परिवार से आते हैं। उनके पास न कोई राजनीतिक संरक्षण था, न आर्थिक मजबूती। केवल राष्ट्रभक्ति और भाजपा के राष्ट्रवादी विचारों के प्रति अटूट समर्पण था। वे बूथ स्तर पर निरंतर काम करते रहे — लोगों तक विकास की बात पहुंचाते, संगठन को मजबूत करते। पश्चिम बंगाल में पिछले एक दशक से भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले, मारपीट, घर जलाने और आर्थिक बहिष्कार की घटनाएं बार-बार सामने आई हैं।
लेकिन यह समस्या केवल बंगाल तक सीमित नहीं है। केरल में भाजपा और सीपीएम कार्यकर्ताओं के बीच बार-बार हिंसक झड़पें होती रही हैं। कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी भाजपा कार्यकर्ताओं को विपक्षी दलों से प्रताड़ना और हमलों का सामना करना पड़ता है। मणिपुर में लंबे समय से चली आ रही जातीय हिंसा ने पूरे राज्य को प्रभावित किया है, जहां भाजपा कार्यकर्ता भी इस अस्थिरता की भारी कीमत चुकाते रहे हैं।
पंजाब में भी भाजपा संगठन को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। इन सभी जगहों पर साधारण भाजपा कार्यकर्ता परिवार की मजबूरियों के बावजूद मैदान में डटे रहते हैं। उनके लिए यह लड़ाई पद या तनख्वाह की नहीं, बल्कि भारत माता की सेवा और राष्ट्रवादी मूल्यों की है। वे चुपचाप यातनाएं सहते हैं, क्योंकि उन्हें विश्वास है कि सत्य और समर्पण अंत में जीतता है।
सुजॉय गोराई की यह जीत केवल एक सीट की जीत नहीं है। यह उन हजारों अनाम कार्यकर्ताओं की जीत है, जो बंगाल से लेकर दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर तक हिंसा झेलते हुए भी लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़े हैं। जनता का फैसला अंतिम होता है। बाराबानी के मतदाताओं ने साबित कर दिया — अत्याचार कितना भी हो, समर्पण और सत्य की जीत तय है।
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