17 साल में 50 करोड़—थानेदार पर EOU का बड़ा प्रहार”**
Published on: April 16, 2026
By: BTNI
Location: Patna/Kishanganj, India
बिहार पुलिस में तैनात एक थानेदार पर आय से अधिक संपत्ति के बड़े मामले ने पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। किशनगंज में पदस्थ थानेदार अभिषेक रंजन के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण इकाई (EOU) की कार्रवाई में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, अब तक करीब 50 करोड़ रुपये की संदिग्ध संपत्ति के संकेत मिले हैं, जिसने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
जानकारी के अनुसार, ईओयू की टीम ने एक साथ कई ठिकानों—किशनगंज, पटना और पश्चिम बंगाल के आसनसोल—पर दबिश दी। छापेमारी के दौरान जमीन, प्लॉट, फ्लैट और आलीशान मकानों से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं। पटना स्थित एक लग्जरी मकान में स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएं मिलने की बात सामने आई है, जो जांच एजेंसियों के लिए चौंकाने वाली रही।
सूत्रों के अनुसार, आरोपी थानेदार की सेवा अवधि करीब 17 साल की है, लेकिन इस दौरान अर्जित संपत्ति उसकी वैध आय से कई गुना अधिक प्रतीत हो रही है। जांच एजेंसियां अब बैंक खातों, निवेश, संपत्ति खरीद और नकद लेन-देन के बीच संबंधों को खंगाल रही हैं, ताकि पूरे “मनी ट्रेल” का पता लगाया जा सके।

जांच में महंगे मोबाइल फोन, हाई-एंड गैजेट्स और लग्जरी जीवनशैली से जुड़े कई अहम सुराग भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी अधिकारी को हाई-प्रोफाइल जीवनशैली का शौक था और वह बड़े शहरों के महंगे होटलों में ठहरता था, जहां लाखों रुपये खर्च किए जाते थे। इन खर्चों का ब्यौरा भी अब जांच के दायरे में शामिल किया गया है।
मामले का एक और अहम पहलू कथित “नेटवर्क” है।
सूत्रों का दावा है कि पोस्टिंग और वसूली के खेल में प्रभावशाली संपर्कों का इस्तेमाल किया जाता था। कुछ इनपुट में यह भी सामने आया है कि सीधे लेन-देन से बचने के लिए मुंशी या ड्राइवर जैसे माध्यमों का उपयोग किया जाता था, जिससे पैसों का लेन-देन छिपाया जा सके। हालांकि इन सभी बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
ईओयू अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल यह कार्रवाई प्रारंभिक चरण में है और संपत्तियों का वास्तविक मूल्यांकन, आय के वैध स्रोतों का सत्यापन तथा संदिग्ध लेन-देन की फोरेंसिक जांच जारी है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें संपत्ति कुर्की और आपराधिक प्रकरण दर्ज होना शामिल हो सकता है।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग के भीतर भी हलचल तेज हो गई है। अंदरखाने यह चर्चा है कि यदि जांच की दिशा इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो इस मामले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं। आम लोगों के बीच भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया है और सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से साफ होता है कि निगरानी तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है। डिजिटल ट्रैकिंग, नियमित ऑडिट और सख्त निरीक्षण के जरिए ही ऐसे मामलों पर अंकुश लगाया जा सकता है।
कुल मिलाकर यह मामला सिर्फ एक थानेदार की कथित कमाई का नहीं, बल्कि उस सिस्टम की परतें खोल रहा है जहां वर्दी के पीछे दौलत का खेल पनपता है। अब देखना यह है कि जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंच पाती हैं या नहीं।
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