23 साल पुराने राम अवतार जग्गी हत्याकांड में दोषसिद्धि और उम्रकैद पर रोक
Published on: April 22, 2026
By: BTNI
Location:Raipur/ New Delhi, India
छत्तीसगढ़ की राजनीति में लंबे समय से चर्चित रहे एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी को सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा दी गई दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही हाईकोर्ट के पूरे फैसले को भी स्थगित कर दिया गया है।
यह राहत अमित जोगी के लिए अस्थायी है, लेकिन जेल जाने से तत्काल बचाव हो गया है। मामले की आगे की सुनवाई जारी रहेगी।घटना का इतिहास: 4 जून 2003 की वह रात23 साल पहले, 4 जून 2003 को रायपुर के मौधापारा पुलिस थाना क्षेत्र में एनसीपी नेता और प्रमुख व्यवसायी राम अवतार जग्गी की उनकी कार में सवार होते हुए गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
उस समय अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे और जग्गी उनके राजनीतिक विरोधी माने जाते थे। जग्गी एक बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करने की तैयारी कर रहे थे, जिसे लेकर साजिश की बात कही गई।हत्या के बाद मामले की जांच शुरू में राज्य पुलिस ने की, लेकिन बाद में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई ने कुल 31 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, जिसमें अमित जोगी, चिमन सिंह, यह्या धेबर, अभय गोयल और अन्य शामिल थे।

आरोप था कि अमित जोगी इस हत्या की साजिश के मुख्य सूत्रधार थे।निचली अदालत का फैसला (2007)रायपुर की स्पेशल कोर्ट ने 31 मई 2007 को फैसला सुनाया। कोर्ट ने 28 आरोपियों को हत्या और साजिश के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। निचली अदालत ने माना कि अमित जोगी के खिलाफ पर्याप्त ठोस सबूत नहीं हैं।
हाईकोर्ट का उलटफेर (अप्रैल 2026)लंबे समय तक मामला लंबित रहा। जग्गी के बेटे सतीश जग्गी और सीबीआई ने अमित जोगी की बरी होने के खिलाफ अपील दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में सीबीआई की देरी वाली अपील को खारिज करने के हाईकोर्ट के फैसले को पलटा और निर्देश दिया कि मामले को गुण-दोष के आधार पर दोबारा सुनें।2 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट ने 2007 के निचली अदालत के फैसले को “गलत, विपरीत और सबूतों के खिलाफ” बताते हुए पलट दिया। अमित जोगी को धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया गया। कोर्ट ने उन्हें “साजिश का मास्टरमाइंड, मुख्य वास्तुकार और ड्राइविंग फोर्स” बताया। अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और तीन हफ्ते के अंदर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि अमित जोगी, तब मुख्यमंत्री के बेटे होने के नाते, पुलिस और अन्य को प्रभावित करने की स्थिति में थे। होटल ग्रीन पार्क, बैट्रा हाउस और सीएम हाउस में हुई बैठकों और फंड ट्रांसफर के सबूतों का हवाला दिया गया।सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला (23 अप्रैल 2026)अमित जोगी ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। आज 23 अप्रैल को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी को बड़ी राहत देते हुए हाईकोर्ट की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगा दी।
हाईकोर्ट का पूरा आदेश भी स्थगित कर दिया गया है। इससे अमित जोगी को फिलहाल जेल जाने से राहत मिल गई है।सुप्रीम कोर्ट ने मामले की आगे की सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया है। अमित जोगी की ओर से वरिष्ठ वकीलों की टीम ने दलीलें पेश कीं।
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अमित जोगी का बयानअमित जोगी ने हाईकोर्ट के फैसले को “गंभीर अन्याय” बताया था और न्यायपालिका पर भरोसा जताया था। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें न्याय मिलेगा। आज की राहत के बाद उनके समर्थक खुशी जता रहे हैं, जबकि जग्गी परिवार ने पहले हाईकोर्ट के फैसले को “दिव्य न्याय” करार दिया था।राजनीतिक प्रभावयह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में हमेशा संवेदनशील रहा है।
अजीत जोगी के निधन के बाद अमित जोगी जनता कांग्रेस के प्रमुख चेहरे हैं। इस फैसले से राज्य की सियासत में नई बहस छिड़ सकती है। कांग्रेस और अन्य दलों ने मामले को “सब ज्यूडिस” बताते हुए संयम बरतने की बात कही है।मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पूरी तरह से लंबित है। आगे की सुनवाई में क्या होता है, यह देखना बाकी है। 23 साल पुराना यह हत्याकांड अभी भी छत्तीसगढ़ की न्यायिक और राजनीतिक व्यवस्था की परीक्षा बना हुआ है।



