मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की भावुक याद, महाराष्ट्र की टीम ने मंच पर प्रस्तुत की जीवन घटनाओं की जीवंत झांकी
छात्र शक्ति के प्रणेता को श्रद्धांजलि
Published on: April 26, 2026
By: BTNI
Location: Jabalpur, India
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के प्रमुख वास्तुकार प्रोफेसर यशवंतराव केलकर की जन्म शताब्दी के अवसर पर जबलपुर में आयोजित भव्य समारोह में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनके जीवन और योगदान को स्मरण करते हुए गहरी श्रद्धा व्यक्त की।
समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि यशवंतराव केलकर ने एबीवीपी की स्थापना के समय से ही अपने जीवन के हर पल को कार्यकर्ताओं को गढ़ने और विश्व की सबसे बड़ी छात्र संगठन बनाने में समर्पित कर दिया। उन्होंने महाराष्ट्र से आई टीम की सराहना भी की, जिन्होंने मंच पर केलकर जी की जीवन घटनाओं का सुंदर मंचन प्रस्तुत किया।
समारोह के दौरान डॉ. मोहन यादव ने कहा, “मैं यशवंतराव केलकर की जन्म शताब्दी समारोह में शामिल हुआ, जिन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की शुरुआत से ही अपने जीवन के प्रत्येक क्षण को कार्यकर्ताओं को आकार देने और विश्व की सबसे बड़ी संगठन बनाने में लगा दिया।” उन्होंने आगे जोड़ा कि महाराष्ट्र की टीम ने केलकर जी की विभिन्न घटनाओं का मंचन किया, जो बेहद प्रभावशाली और प्रेरणादायक रहा। मुख्यमंत्री ने टीम को अपनी ओर से बधाई दी और पूरे कार्यक्रम की सफलता पर खुशी जताई।
यशवंतराव केलकर का जीवन: राष्ट्रवाद और छात्र आंदोलन का प्रतीक
प्रोफेसर यशवंतराव वासुदेव केलकर का जन्म 25 अप्रैल 1925 को महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पंढरपुर क्षेत्र में हुआ था। उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से साहित्य में बीए की परीक्षा टॉपर के रूप में उत्तीर्ण की। शिक्षा पूरी करने के बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक बने और 1945 से 1952 तक नासिक व सोलापुर जिलों में कार्य किया। बाद में वे मुंबई विश्वविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर के रूप में नियुक्त हुए।
1958 में जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की नींव रखी गई, तब यशवंतराव केलकर ने इसे आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शुरू में बालराज माधोक द्वारा स्थापित यह संगठन शुरुआती वर्षों में सीमित था, लेकिन केलकर जी के नेतृत्व में इसे नई दिशा मिली। वे मुंबई इकाई के शहर अध्यक्ष और फिर राज्य अध्यक्ष बने। उनकी दूरदर्शिता और अथक प्रयासों से एबीवीपी धीरे-धीरे पूरे देश में फैला।

उन्होंने छात्रों को केवल ज्ञान प्राप्त करने वाले नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का हिस्सा मानते हुए संगठन को विचारधारा आधारित आंदोलन में बदल दिया।केलकर जी ने छात्र एकता के लिए कई गतिविधियां शुरू कीं, जिनमें शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम शामिल थे। उन्होंने एबीवीपी को विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन बनाने का सपना देखा और उसे साकार किया।
उनका मानना था कि छात्रों में राष्ट्रभक्ति, चरित्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करनी चाहिए। उनके प्रयासों से संगठन ने 1970 के दशक में बिहार आंदोलन जैसे बड़े छात्र आंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। केलकर जी 1987 में दिवंगत हुए, लेकिन उनकी विरासत आज भी एबीवीपी के लाखों कार्यकर्ताओं में जीवित है।
शताब्दी समारोह की खासियतें
जबलपुर में आयोजित यह समारोह केलकर जी की जन्म शताब्दी (1925-2025) को समर्पित था। कार्यक्रम में महाराष्ट्र से आई एक विशेष टीम ने यशवंतराव केलकर के जीवन की प्रमुख घटनाओं को नाटकीय रूप में मंच पर प्रस्तुत किया। इस प्रदर्शन में उनके बचपन, शिक्षा काल, आरएसएस प्रचारक के रूप में सेवा, प्रोफेसर बनने की यात्रा और एबीवीपी को मजबूत बनाने के संघर्ष को जीवंत तरीके से दिखाया गया। दर्शकों ने इस प्रदर्शन की भरपूर सराहना की और इसे “शानदार” करार दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवा पीढ़ी को प्रेरित करते हैं। उन्होंने केलकर जी के योगदान को याद करते हुए जोर दिया कि उनके जैसे समर्पित व्यक्तियों ने ही छात्र संगठनों को मजबूत आधार प्रदान किया। समारोह में स्थानीय और राज्य स्तर के एबीवीपी कार्यकर्ता, शिक्षाविद् और राष्ट्रवादी विचारक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
एबीवीपी की यात्रा: केलकर जी की देन
आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद देश भर के हजारों कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सक्रिय है। यह संगठन छात्रों के शैक्षणिक मुद्दों, राष्ट्रीय एकता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर लगातार काम करता है। केलकर जी की नींव पर खड़ा यह संगठन अब लाखों सदस्यों वाला विश्व का सबसे बड़ा छात्र मंच माना जाता है।
हर वर्ष एबीवीपी “यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार” प्रदान करता है, जो सामाजिक कार्य, शिक्षा और राष्ट्र सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले युवाओं को दिया जाता है।इस पुरस्कार ने कई प्रेरणादायक व्यक्तियों को सम्मानित किया है, जिसमें सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार भी शामिल हैं। यह पुरस्कार केलकर जी की “जीवन दृष्टि” को याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने युवाओं को सामाजिक कार्य को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
मुख्यमंत्री का संदेश: राष्ट्र निर्माण में छात्रों की भूमिका
डॉ. मोहन यादव ने समारोह में छात्रों और युवाओं से अपील की कि वे केलकर जी के आदर्शों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि आज के समय में छात्रों को न केवल अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि राष्ट्र की सेवा, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और सामाजिक सद्भाव के लिए भी आगे आना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश सरकार की शिक्षा और युवा विकास संबंधी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में छात्रों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।समारोह में उपस्थित महाराष्ट्र टीम के सदस्यों ने भी केलकर जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे केलकर जी ने मुंबई से शुरू करके पूरे देश में संगठन का विस्तार किया और कार्यकर्ताओं को अनुशासन, समर्पण तथा राष्ट्रप्रेम सिखाया।
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प्रेरणा का स्रोत बने यशवंतराव केलकर
यशवंतराव केलकर का जीवन सादगी, समर्पण और दूरदृष्टि का अनुपम उदाहरण है। एक प्रोफेसर होते हुए भी उन्होंने छात्र राजनीति को राष्ट्र सेवा से जोड़ा। उन्होंने एबीवीपी को मात्र एक संगठन नहीं, बल्कि एक विचारधारा आधारित परिवार बनाया, जहां कार्यकर्ता जीवन भर राष्ट्र के लिए काम करते हैं।जबलपुर का यह शताब्दी समारोह न केवल केलकर जी को श्रद्धांजलि था, बल्कि युवा पीढ़ी को उनके आदर्शों से जोड़ने का माध्यम भी बना।
ऐसे कार्यक्रम देश भर में छात्र संगठनों को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं और राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में आयोजित यह कार्यक्रम सफल रहा और इसमें शामिल सभी लोगों को प्रेरणा मिली। यशवंतराव केलकर की स्मृति को अमर बनाने के लिए ऐसे समारोह भविष्य में भी जारी रहेंगे, ताकि नई पीढ़ी उनके योगदान को जान सके और राष्ट्र के प्रति समर्पित हो सके।



