जितेन्द्र मुद्लियार बने राजनांदगांव शहर कांग्रेस अध्यक्ष
Published on: November 29, 2025
By: BTNI
Location: Rajnandgaon, India
कांग्रेस संगठन में लंबे समय से चल रहे मंथन के बाद आखिरकार पार्टी ने युवा और लोकप्रिय चेहरे जितेन्द्र मुद्लियार को राजनांदगांव शहर कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है। लगभग 40 वर्षीय जितेन्द्र मुद्लियार प्रदेश कांग्रेस के उभरते नेताओं में गिने जाते हैं और वर्तमान में शहर के सबसे सक्रिय युवाओं में उनकी पहचान स्थापित रही है।
पारिवारिक व राजनीतिक विरासत बनी मजबूती का आधार –
राजनांदगांव में मुदलियार परिवार की राजनीतिक विरासत बेहद मजबूत मानी जाती है।
जितेन्द्र के पिता भूतपूर्व विधायक स्व. उदय मुदलियार का प्रभाव ग्रामीण इलाके से लेकर शहर तक व्यापक रहा है। ग्राम सुरगी, पारीखुर्द,भर्रेगांव सहित अंचल के क्षेत्रों में मुदलियार परिवार आज भी प्रभावशाली माना जाता है, क्योंकि यह उनके पिता का विशेष कार्यक्षेत्र रहा है।

परिवार की राजनीतिक जड़ें इससे भी पुरानी हैं—
स्व. उदय मुदलियार के दादा सारंगपाणी मुदलियार राजा बलरामदास के समय की प्रमुख हस्तियों में गिने जाते थे और उस दौर में ‘प्रजा हितैषी’ नामक पहला अखबार निकालने के लिए भी जाने जाते हैं।
युवा आयोग में अनुभव, सुरक्षा प्राप्त— राजनीतिक ग्राफ स्थिर
2018 में भूपेश बघेल की सरकार के दौरान जितेन्द्र मुदलियार को छत्तीसगढ़ युवा आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था।
राजनीतिक गलियारों में माना जाता है कि उच्च स्तरीय नेतृत्व तक उनकी सीधी पहुंच हमेशा बनी रही है।
सचिन पायलट से नजदीकी की चर्चा –
राज्य नेतृत्व के भीतर यह भी चर्चा है कि पिछले वर्षों में जितेन्द्र मुद्लियार की नजदीकियां सचिन पायलट खेमे से बढ़ती रहीं, जिससे उन्हें एक उभरते राष्ट्रीय युवा चेहरे के रूप में भी देखा जाता है।
नियुक्ति के बाद जश्न का माहौल
शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र से कांग्रेसजन उनके निवास पहुंचकर बधाई दे रहे हैं, मिठाई बांटी जा रही है और खुशी का माहौल बना हुआ है।
मुदलियार परिवार के पुराने समर्थकों और कार्यकर्ताओं में भी नए उत्साह का संचार देखा गया है।
राजनीतिक विश्लेषण और आगे की चुनौती
कांग्रेस में इस नियुक्ति को “पुरानी विरासत पर भरोसा” और स्थानीय असंतोष को शांत करने की रणनीति दोनों रूपों में देखा जा रहा है।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो—
अध्यक्ष बदलने से तत्काल कोई बड़ा राजनीतिक चमत्कार होने की संभावना नहीं दिखती,
लेकिन यदि संगठन में युवा नेता को मजबूत भूमिका दी गई तो पार्टी को जमीनी स्तर पर लाभ मिल सकता है।
बीते महीनों में संगठन के भीतर आंतरिक
नेतृत्व की यह नियुक्ति फिलहाल इन विवादों को शांत कर सकती है — लेकिन वास्तविक परिणाम आगामी महीनों में उनके संगठन विस्तार और क्षेत्रीय पकड़ पर निर्भर करेगा।
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संक्षेप में कहा जा सकता है कि
कांग्रेस ने राजनांदगांव की कमान ऐसे युवा नेता को दी है — जिसका प्रदेश स्तर पर अनुभव है,पुरानी विरासत और जनसमर्थन का आधार हैऔर नेतृत्व से सीधी पहुँच रखने की छवि है
अब देखने वाली बात यह होगी कि जितेन्द्र मुद्लियार अपनी नई जिम्मेदारी को संगठन की मजबूती में कितना बदल पाते हैं और राजनांदगांव की राजनीति में क्या नई समीकरणों का निर्माण होता है।



