सिर्फ 1.8 लाख की लागत में छात्रों ने बनाई ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक सुपरबाइक ‘गरुड़’
Published on: December 31, 2025
By: BTNI
Location: Surat, India
भारत में नवाचार की उड़ान को एक नई ऊँचाई देते हुए सूरत के तीन छात्रों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस एक ऐसी इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल तैयार की है, जो बिना किसी राइडर के खुद चल सकती है। ‘गरुड़’ नाम की यह बाइक न केवल तकनीक के लिहाज से अत्याधुनिक है, बल्कि इसे लगभग 50 प्रतिशत कबाड़ (स्क्रैप) सामग्री से तैयार किया गया है। इसे भारत की पहली AI-पावर्ड ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक सुपरबाइक बताया जा रहा है।
भगवान महावीर यूनिवर्सिटी, सूरत के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र शिवम मौर्य, गुरप्रीत अरोड़ा और गणेश पाटिल ने करीब एक साल की मेहनत और लगभग 1.8 लाख रुपये की लागत में इस प्रोटोटाइप को विकसित किया। टेस्ला की ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी से प्रेरित होकर छात्रों ने यह साबित करने की कोशिश की कि भारत में भी सीमित संसाधनों और रीसायक्लिंग के जरिए भविष्य की मोबिलिटी तैयार की जा सकती है।
रास्पबेरी पाई और वॉयस कमांड से चलती है बाइक
गरुड़ का ‘दिमाग’ एक Raspberry Pi मॉड्यूल है, जो बाइक का सेंट्रल प्रोसेसर की तरह काम करता है। यह सिस्टम वाई-फाई के जरिए वॉयस कमांड को समझकर उन पर कार्रवाई करता है। डेमो के दौरान बाइक ने खुद की स्पीड कंट्रोल करने, “स्टॉप” जैसे वॉयस कमांड पर रुकने और तीन अलग-अलग मोड में काम करने की क्षमता दिखाई है—
मैनुअल मोड, मोबाइल से कंट्रोल मोड और फुली ऑटोनॉमस मोड।
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डिजाइन की बात करें तो गरुड़ में हबलेस व्हील्स दिए गए हैं, जो इसे एक फ्यूचरिस्टिक लुक देते हैं। स्क्रैप से बनी होने के बावजूद इसमें प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहनों जैसी खूबियां मौजूद हैं, जिनमें फुल टचस्क्रीन डिस्प्ले, GPS नेविगेशन, आगे-पीछे कैमरे (लाइव ट्रैफिक फीड के लिए) और वायरलेस मोबाइल चार्जिंग शामिल है।
AI आधारित सुरक्षा सिस्टम बना खास
गरुड़ की सबसे बड़ी ताकत इसका AI-सपोर्टेड सेफ्टी सिस्टम है। बाइक में हाई-रेंज सेंसर लगाए गए हैं, जो आसपास के वातावरण पर लगातार नजर रखते हैं। इसमें दो-स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल काम करता है—
- यदि कोई वाहन या बाधा 12 फीट की दूरी में आती है, तो बाइक खुद-ब-खुद अपनी रफ्तार कम कर देती है।
- अगर बाधा 3 फीट के भीतर आ जाती है, तो बाइक ऑटोमैटिक ब्रेकिंग सिस्टम के जरिए पूरी तरह रुक जाती है, चाहे राइडर कोई भी कमांड दे।
रेंज और चार्जिंग में भी आगे
परफॉर्मेंस के मामले में भी गरुड़ किसी कमर्शियल इलेक्ट्रिक बाइक से पीछे नहीं है। इसमें हल्की लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल किया गया है, जो
- ईको मोड में 220 किलोमीटर,
- स्पोर्ट मोड में 160 किलोमीटर तक की रेंज देने का दावा करती है।
खास बात यह है कि बैटरी मात्र दो घंटे में फुल चार्ज हो जाती है, जो मौजूदा इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की तुलना में कहीं बेहतर मानी जा रही है।
क्या प्रोडक्शन में आएगी गरुड़?
हालांकि गरुड़ अभी एक प्रोटोटाइप है, लेकिन इसके एडवांस AI फीचर्स, शानदार रेंज और फ्यूचरिस्टिक डिजाइन को देखते हुए यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या यह बाइक कभी कमर्शियल प्रोडक्शन तक पहुंचेगी। छात्रों का यह इनोवेशन भारतीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के भविष्य की एक झलक जरूर देता है।



