नेमच की आंगनवाड़ी कुक ने बच्चों को चादर-तिरपाल से ढककर सुरक्षा दी, सैकड़ों डंक झेलकर प्राण त्याग दिए
Published on: February 05, 2026
By: BTNI
Location: Nimach, India
मध्य प्रदेश के नेमच जिले के रणपुर गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। आंगनवाड़ी केंद्र की कुक कंचन बाई मेघवाल ने मधुमक्खियों के अचानक हुए हमले में करीब 20 बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी। उनकी यह निस्वार्थ बहादुरी अमर हो गई है, और पूरा देश उन्हें सलाम कर रहा है।घटना सोमवार दोपहर की बताई जा रही है, जब आंगनवाड़ी केंद्र के बाहर बच्चे खेल रहे थे। अचानक मधुमक्खियों का एक बड़ा झुंड बच्चों पर टूट पड़ा।
पास ही कपड़े धो रही कंचन बाई (लगभग 40 वर्ष) ने देखते ही देखते स्थिति को भांप लिया। उन्होंने बिना एक पल गंवाए बच्चों की ओर दौड़ लगाई। उपलब्ध चादर, तिरपाल और मैट्स से बच्चों को ढककर उन्हें सुरक्षित जगह पर ले गईं और अंदर के कमरे में पहुंचाया। इस दौरान मधुमक्खियां उन पर टूट पड़ीं। कंचन बाई ने जानबूझकर खुद को आगे रखा ताकि बच्चे सुरक्षित रहें।उन्हें सैकड़ों डंक लगे – चेहरे, मुंह और पूरे शरीर पर। बच्चे बिल्कुल सुरक्षित रहे और किसी को चोट नहीं आई, लेकिन कंचन बाई गंभीर रूप से घायल हो गईं।

उन्हें तुरंत स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। गांव वालों के अनुसार, केंद्र के पास एक बड़ा मधुमक्खी का छत्ता था, जिसके कारण यह हमला हुआ। अब स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि छत्ते को हटाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो।कंचन बाई जय माता दी सेल्फ हेल्प ग्रुप की अध्यक्ष थीं, जो आंगनवाड़ी में भोजन तैयार करती थीं। वे एक लकवाग्रस्त पति और तीन बच्चों की मां थीं।
उनकी यह बहादुरी न केवल बच्चों की जान बचाने वाली मां जैसी थी, बल्कि समाज सेवा की जीती-जागती मिसाल बन गई है।यह घटना हमें याद दिलाती है कि समाज के उन अनगिनत नायकों के बारे में, जो रोजमर्रा की जिंदगी में बिना किसी शोर-शराबे के अपना फर्ज निभाते हैं। कंचन बाई मेघवाल जैसी महिलाएं असली हीरो हैं – जिनकी कुर्बानी से देश का हर कोना गौरवान्वित है। उनकी आत्मा को शांति मिले और परिवार को इस दुख से उबरने की ताकत मिले। पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। उनकी याद में सलाम!
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