इंडस वाटर्स ट्रीटी को स्थगित करने के बाद केंद्र ने जम्मू-कश्मीर में 5,129 करोड़ रुपये की सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया। यह 1,856 मेगावाट की रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना पश्चिमी नदियों पर भारत के नियंत्रण को मजबूत करेगी, जलविद्युत उत्पादन में क्रांतिकारी वृद्धि करेगी और क्षेत्रीय विकास को नई गति देगी
Published on: February 08, 2026
By: BTNI
Location: New Delhi, India
केंद्र सरकार ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को पाकिस्तान के साथ निलंबित करने के बाद चिनाब नदी पर एक ऐतिहासिक मेगा परियोजना को गति प्रदान की है। न्यूज18 की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, मोदी सरकार ने 5,129 करोड़ रुपये की सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना (Sawalkote Hydroelectric Project) पर काम शुरू कर दिया है।
यह परियोजना जम्मू-कश्मीर के उदयपुर और रामबन जिलों में चिनाब नदी पर बनेगी और सिंधु जल संधि निलंबन के बाद पहली बड़ी नई परियोजना है जिसे मंजूरी मिली है।यह परियोजना दो चरणों में विकसित होगी—पहले चरण में 1,406 मेगावाट और दूसरे में 450 मेगावाट की क्षमता के साथ कुल 1,856 मेगावाट बिजली उत्पादन होगी। यह एक ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ प्रकार की परियोजना है, जो बैगलिहार परियोजना के ऊपर और सलाल परियोजना के नीचे स्थित है।
राष्ट्रीय जलविद्युत निगम लिमिटेड (NHPC) ने 5 फरवरी 2026 को कंपनियों से निविदाएं आमंत्रित कीं, जिससे निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो गया है। पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने अक्टूबर 2025 में ही इस परियोजना को मंजूरी दे दी थी, जो संधि निलंबन के तुरंत बाद की कार्रवाई है।सिंधु जल संधि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी, जिसमें पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास, सतलुज) भारत को और पश्चिमी नदियां (इंडस, झेलम, चिनाब) मुख्य रूप से पाकिस्तान को आवंटित हैं।
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भारत को पश्चिमी नदियों पर सीमित जलविद्युत और भंडारण अधिकार हैं। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले (जिसमें 26 लोगों की मौत हुई) के बाद भारत ने पाकिस्तान द्वारा सीमा-पार आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए संधि को ‘अस्थायी रूप से निलंबित’ (in abeyance) कर दिया। इसके बाद भारत ने डेटा शेयरिंग, पूर्व सूचना और अन्य बाधाओं से मुक्त होकर इन परियोजनाओं को तेज किया।यह कदम जम्मू-कश्मीर में जलविद्युत क्षमता को बढ़ावा देने के साथ-साथ रणनीतिक महत्व रखता है।
केंद्र ने चिनाब नदी प्रणाली पर चार प्रमुख परियोजनाओं—पाकल दुल, किरु, कवार और रतले—को भी तेज करने के निर्देश दिए हैं। सावलकोट परियोजना पूरी होने पर जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना बनेगी, जो न केवल बिजली उत्पादन बढ़ाएगी बल्कि रोजगार, बुनियादी ढांचा और क्षेत्रीय विकास को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।पाकिस्तान इस कदम से चिंतित है, क्योंकि संधि निलंबन से भारत पश्चिमी नदियों पर अधिक नियंत्रण कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘रणनीतिक निष्पादन’ की नीति का हिस्सा है, जो आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख के साथ जल संसाधनों के उपयोग को प्राथमिकता देती है।यह परियोजना न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी बल्कि उत्तर भारत में स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अनुमान है कि निर्माण में 9 वर्ष लगेंगे, लेकिन यह भारत की आत्मनिर्भरता और क्षेत्रीय मजबूती का प्रतीक बनेगी।



