अमित शाह का बस्तर दौरा: नक्सलमुक्त भारत से विकास के नए युग की शुरुआत
Published on: May 18, 2026
By: BTNI
Location: Bastar, India
18 मई 2026 को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी छत्तीसगढ़ के बस्तर पहुंचे। यह दौरा ऐतिहासिक महत्व का है क्योंकि यह नक्सलवाद के लगभग पूर्ण उन्मूलन के बाद उनका पहला प्रमुख बस्तर भ्रमण है। जहां पहले बंदूकों की गूंज और हिंसा का माहौल था, वहां आज शांति, विकास और सांस्कृतिक उत्सव का नया अध्याय लिखा जा रहा है। अमित शाह ने नेतानार गांव में ‘जन जन सुविधा केंद्र’ (शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा) का उद्घाटन किया, स्थानीय लोगों को संबोधित किया और बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ने वाले अनेक विकास कार्यों की घोषणा की। इस लेख में उनके संबोधन, घोषणाओं और बस्तर के बदलते स्वरूप का विस्तृत वर्णन है।
नेतानार में ऐतिहासिक उद्घाटन और संबोधन
अमित शाह नेतानार गांव पहुंचे, जहां उन्होंने ‘जन जन सुविधा केंद्र’ मॉडल का शुभारंभ किया। यह केंद्र पूर्व में सुरक्षा कैंप था, जो 2013 से सुरक्षा बलों का अड्डा रहा। अब इसे आदिवासियों की सुविधा के लिए रूपांतरित किया गया है। शाह जी ने इसे “ऐतिहासिक दिन” बताया। उन्होंने कहा, “आज का दिन वाकई ऐतिहासिक है। मैं आपको आश्वासन देता हूं कि आने वाले छह महीनों में यह केंद्र, जो आज केवल सरकारी पहल के रूप में दिख रहा है, आदिवासी भाई-बहनों की उपस्थिति और हंसी से गुलजार हो जाएगा।”

उन्होंने इस भूमि को वीर गुंडाधुर की जन्मभूमि और कर्मभूमि बताया, जो आदिवासी गौरव का प्रतीक हैं। शाह जी ने कहा कि सुरक्षा कैंप से सेवा केंद्र में बदलाव नक्सलवाद के खिलाफ जीत और विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने नक्सल काल की याद दिलाते हुए बताया कि कैसे निर्दोष आदिवासी IED विस्फोटों का शिकार होते थे, बच्चों को स्कूलों से उठाकर नक्सली कैंपों में ले जाया जाता था, और ‘जनता की सरकार’ के नाम पर निर्दोषों को फांसी दी जाती थी। “देश आजाद हुआ, लेकिन आजादी यहां तक नहीं पहुंच पाई थी,” उन्होंने भावुक होकर कहा।
शाह जी ने ‘नियाद नellanar’ योजना का जिक्र किया, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री और केदार कश्यप के नेतृत्व में हर गांव में सस्ती अनाज की दुकानें खोली जा रही हैं। प्राथमिक स्कूल हर गांव में खुल रहे हैं, हर गरीब को घर तक पेयजल पहुंचाने का काम चल रहा है, और आधार कार्ड, राशन कार्ड जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार और केंद्र मिलकर 3000 युवा-युवतियों को पुनर्वासित कर रहे हैं, जिनमें से 2000 पूर्णतः निरक्षर हैं। RSS के स्वयंसेवक उन्हें पढ़ाई-लिखाई सिखा रहे हैं।
सुरक्षा से विकास की ओर बदलाव
अमित शाह ने जोर देकर कहा कि नक्सलवाद समाप्त करने का उद्देश्य नक्सलियों को खत्म करना नहीं, बल्कि बड़े शहरों की सुविधाएं बस्तर के गरीब आदिवासियों तक पहुंचाना था। उन्होंने सुरक्षा बलों की सराहना की, जिन्होंने सुरक्षा वैक्यूम खत्म किया। अब उन कैंपों को कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में बदला जा रहा है। यह ‘बस्तर विकास मॉडल 2.0’ का हिस्सा है, जिसमें शांति के बाद तेज विकास पर फोकस है।
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उन्होंने स्थानीय लोगों, शहीद परिवारों, CAPF जवानों, पुलिस अधिकारियों, नक्सल प्रभावित परिवारों और समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। अमर वाटिका में शहीदों को श्रद्धांजलि दी। शाम को ‘बस्तर के संग’ लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां आदिवासी परंपराओं और संस्कृति का प्रदर्शन हुआ। यह कार्यक्रम बस्तर की सांस्कृतिक जीवंतता को राष्ट्रीय और वैश्विक पटल पर लाने का प्रतीक है।
विकास कार्यों की घोषणाएं और योजनाएं
अमित शाह ने बस्तर में कई प्रमुख घोषणाएं कीं, जो क्षेत्र को भारत के सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने की दिशा में हैं:जन सुविधा केंद्रों का विस्तार: नेतानार मॉडल को पूरे बस्तर में लागू किया जाएगा। स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, सरकारी योजनाओं की सुविधाएं एक छत के नीचे उपलब्ध होंगी।
रोजगार और कौशल विकास: बस्तर में डेयरी उद्योग को बढ़ावा, हर गांव में रोजगार के अवसर। 90,000 से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण।
कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा: सड़कें, बिजली, डिजिटल कनेक्टिविटी। दिसंबर 2027 तक दूरस्थ गांवों में बिजली और इंटरनेट पहुंचाने का लक्ष्य। दल्लीराझारा-रावघाट रेल लाइन (3500 करोड़ रुपये) जैसी परियोजनाएं।
सिंचाई और कृषि: इंद्रावती नदी पर 3600 करोड़ रुपये का सिंचाई प्रोजेक्ट, जो 2.75 लाख हेक्टेयर भूमि को सींचेगा और 120 MW बिजली पैदा करेगा। धान खरीदी ₹3100 प्रति क्विंटल पर, हर आदिवासी को मुफ्त 5 किलो अनाज प्रतिमाह।
स्वास्थ्य और शिक्षा: ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत स्वास्थ्य सेवाएं। हर गांव में स्कूल, पहले बंद पड़े स्कूलों को फिर से खोलना।
पर्यटन और संस्कृति: बस्तर की संस्कृति, नृत्य, हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान। एडवेंचर टूरिज्म और नए रोजगार के अवसर। बस्तर पांडुम और बस्तर ओलंपिक जैसी घटनाएं संस्कृति को बढ़ावा दे रही हैं।
शाह जी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके शासन में विकास रुका रहा क्योंकि ‘लाल आतंक’ छाया हुआ था। अब मोदी सरकार के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बस्तर को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।
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बस्तर का बदलता चेहरा
बस्तर पहले नक्सलवाद का गढ़ था। दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, बीजापुर जैसे जिले हिंसा से प्रभावित थे। आज स्थिति बदली हुई है। बच्चे स्कूल जा रहे हैं, लोग बिना डर के बाहर निकल रहे हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हजारों की भीड़ जुट रही है। अमित शाह ने कहा कि मार्च 2026 तक भारत नक्सलमुक्त हो जाएगा, और बस्तर पांच वर्षों में सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनेगा।उन्होंने शेष नक्सलियों से अपील की कि वे हथियार डालकर मुख्यधारा में आएं। सरकार उन्हें सम्मानजनक पुनर्वास देगी, लेकिन हिंसा पर ‘बंदूक से जवाब’ दिया जाएगा। आदिवासी महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया।
निष्कर्ष:
शांति और समृद्धि का मार्गअमित शाह के इस दौरे ने बस्तर में शांति से विकास की ओर संक्रमण को मजबूत किया। ‘जन जन सुविधा केंद्र’ केवल एक इमारत नहीं, बल्कि बदलाव का प्रतीक है। स्थानीय लोगों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में यह दौरा और भी सार्थक बना।बस्तर अब बारूद की नहीं, बल्कि संस्कृति, विकास और गौरव की पहचान बन रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और अमित शाह के नेतृत्व में यह क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छूएगा। आदिवासी भाई-बहनों का सशक्तिकरण, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से बस्तर ‘नक्सल मुक्त, विकास युक्त’ भारत का प्रतीक बनेगा। यह दौरा न केवल घोषणाओं का, बल्कि ठोस कार्रवाई और विश्वास का संदेश लेकर आया है।(शब्द संख्या: लगभग 950) यह लेख तथ्यों पर आधारित है और बस्तर के उज्ज्वल भविष्य की झलक प्रस्तुत करता है। जय बस्तर, जय छत्तीसगढ़!



