फिल्मों में हिंदुओं का अपमान अब आसान? विवाद के बीच मेकर्स ने प्रमोशन हटाया
Published on: February 09, 2026
By: BTNI
Location: Mumbai, India
उत्तर प्रदेश में नेटफ्लिक्स की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ ने रिलीज से पहले ही तूफान मचा दिया है। मनोज बाजपेयी अभिनीत और नीरज पांडे द्वारा निर्देशित इस फिल्म के टाइटल को लेकर ब्राह्मण समाज में भारी रोष फैल गया है। समाज के लोग इसे ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ अपमानजनक और जातिवादी मान रहे हैं, क्योंकि ‘पंडत’ शब्द को ‘घूसखोर’ (रिश्वतखोर) के साथ जोड़कर पूरे ब्राह्मण वर्ग को बदनाम करने का आरोप लगाया जा रहा है।विवाद की शुरुआत तब हुई जब नेटफ्लिक्स ने फिल्म का टीजर जारी किया।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। ब्राह्मण संगठनों, संत-महंतों और आम लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए, जहां प्रदर्शनकारियों ने मनोज बाजपेयी और नीरज पांडे के पुतले जलाए और फिल्म पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की। भोपाल, इंदौर और लखनऊ जैसे शहरों में ब्राह्मण समाज ने सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया। उनके निर्देश पर लखनऊ के हजरतगंज थाने में फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे, निर्माताओं और टीम के खिलाफ FIR दर्ज की गई। FIR में आरोप लगाया गया है कि टाइटल से सामाजिक सौहार्द बिगड़ रहा है, धार्मिक और जातिगत भावनाएं आहत हो रही हैं तथा सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा पैदा हो सकता है।
यूपी सरकार ने इसे ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ सुनियोजित अपमान करार दिया।इसके बाद केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के हस्तक्षेप से नेटफ्लिक्स ने फिल्म का टीजर और सभी प्रमोशनल सामग्री अपने प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया से हटा दी। निर्देशक नीरज पांडे ने बयान जारी कर माफी मांगी और स्पष्ट किया कि फिल्म पूरी तरह काल्पनिक है। यह ग्रामीण भारत में भ्रष्टाचार पर आधारित सटायरिकल कहानी है, जिसमें ‘पंडत’ केवल एक किरदार का उपनाम है, न कि किसी जाति या समुदाय का प्रतिनिधित्व। उन्होंने कहा, “हमारा इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
Also read- https://www.btnewsindia.com/madhya-pradesh-advances-spiritual-tourism-with-massive-ram-van-gaman-path-project/ https://www.btnewsindia.com/मध्य-प्रदेश-में-दहेज-मुक्/
दर्शकों की आपत्ति को सम्मान देते हुए हमने प्रमोशन हटा लिया है।”अभिनेता मनोज बाजपेयी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि फिल्म किसी समुदाय पर टिप्पणी नहीं है, बल्कि एक भ्रष्ट व्यक्ति की आत्म-सुधार की यात्रा दिखाती है। उन्होंने दुख जताया कि अनजाने में किसी को ठेस पहुंची हो तो वे सुनने को तैयार हैं।विपक्षी नेता और बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी फिल्म की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे जातिवादी बताया और केंद्र सरकार से तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की।
मायावती ने कहा कि फिल्मों में ‘पंडित’ को घूसखोर दिखाकर पूरे ब्राह्मण समाज का अपमान किया जा रहा है, जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।यह विवाद अब बड़े सवाल खड़े कर रहा है—क्या फिल्मों और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हिंदू या ब्राह्मण समुदाय को निशाना बनाना आसान हो गया है? क्या अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में जातिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाना उचित है?
ब्राह्मण समाज का कहना है कि अगर ऐसा ही टाइटल किसी अन्य समुदाय के साथ होता तो तुरंत कार्रवाई होती। वहीं, कुछ लोग इसे सेंसरशिप और राजनीतिक दबाव का मामला बता रहे हैं।फिलहाल फिल्म की रिलीज पर अनिश्चितता छाई हुई है। नेटफ्लिक्स ने अभी तक स्ट्रीमिंग की पुष्टि नहीं की है। यह मामला सिनेमा, समाज और राजनीति के बीच संतुलन की चुनौती पेश कर रहा है।



