Published on: June 13, 2026
By: BTNI
Location: Kolkata, India
आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में trainee डॉक्टर की रेप-मर्डर कांड के मुख्य आरोपी और भ्रष्टाचार के मामले में फंसे पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष की बेलेघाटा स्थित चार मंजिला आवासीय संपत्ति पर अब बुलडोजर की कार्रवाई होने वाली है। कोलकाता म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (KMC) ने उनके घर के अनधिकृत निर्माणों को 45 दिनों के अंदर हटाने का सख्त आदेश जारी किया है।
इस फैसले को कई लोग लंबे समय से लंबित न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।KMC के बिल्डिंग डिपार्टमेंट ने स्पेशल ऑफिसर (बिल्डिंग) एस. बोराल की अदालत में 14 मई को हुई सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। संपत्ति का पता 83, बादन रॉय लेन, वार्ड 33, बोरो III है, जिसे ‘बालाजी निवास’ नाम से जाना जाता है। यह घर डॉ. संदीप घोष और उनकी पत्नी डॉ. संगीता घोष के नाम पर रजिस्टर्ड है।
अनधिकृत निर्माण क्या हैं?
KMC के आदेश के मुताबिक, तीन मुख्य उल्लंघन पाए गए हैं। पहला, छत पर नया लगाया गया पेर्गोला (pergola) का एक छोटा हिस्सा, जो स्वीकृत बिल्डिंग प्लान का हिस्सा नहीं था। दूसरा, लिफ्ट के मशीन रूम तक पहुंच बनाने के लिए लगाई गई आयरन स्पायरल सीढ़ी। तीसरा, दूसरी मंजिल पर एक दरवाजे की जगह बनाई गई ईंट की दीवार। ये सभी 2009 के बिल्डिंग रूल्स की धारा 133 और 134 का उल्लंघन करते पाए गए।
KMC एक्ट की धारा 400(1) और 416 के तहत कार्रवाई शुरू की गई है।सूत्रों के अनुसार, इस मामले की शिकायत स्थानीय निवासी अंशुमान सरकार ने की थी। अक्टूबर 2024 में RG Kar कांड के चरम पर KMC को पहली बार सूचना मिली थी। तब घर की जांच हुई और नोटिस जारी किया गया था, लेकिन अब अंतिम आदेश जारी हो गया है। अगर 45 दिनों में ये निर्माण नहीं हटाए गए तो KMC खुद bulldozer चलाकर इन्हें हटा सकता है और खर्चा घोष परिवार से वसूला जाएगा।

संदीप घोष कौन हैं?
डॉ. संदीप घोष RG Kar मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल रह चुके हैं। सितंबर 2024 में trainee डॉक्टर की बर्बर हत्या के मामले में सबूत मिटाने और बड़े षड्यंत्र का आरोप उन पर लगा। CBI ने उन्हें गिरफ्तार किया। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती मरीजों, दवाओं, उपकरणों और अन्य स्रोतों से कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला भी उनके खिलाफ चल रहा है। ED ने भी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की और उनके पूर्वजों की संपत्ति तक छापेमारी की। फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं।यह घर पहले से ही विवादों में रहा है। 2024 के अंत में ही KMC ने इसकी जांच शुरू की थी क्योंकि शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि छत पर अवैध निर्माण किया गया है और बाउंड्री वॉल को बढ़ाकर सिविक मैनहोल को ढक दिया गया है। अब यह कार्रवाई RG Kar कांड के बाद की घटनाओं की कड़ी मानी जा रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
बादन रॉय लेन के निवासी इस कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। कई लोग कहते हैं कि बड़े-बड़े पदों पर बैठे लोग नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण कर लेते हैं, लेकिन अब न्याय की प्रक्रिया सक्रिय हुई है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “यह सिर्फ एक पेर्गोला या सीढ़ी नहीं, सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश है।” कुछ लोग इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश भी कर रहे हैं, लेकिन KMC अधिकारियों का कहना है कि यह रूटीन बिल्डिंग नियमों का पालन सुनिश्चित करने की प्रक्रिया है।
KMC की भूमिका और प्रक्रिया
कोलकाता म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन शहर में बिल्डिंग नियमों को लागू करने का जिम्मेदार निकाय है। स्वीकृत प्लान से कोई भी हटकर निर्माण करने पर नोटिस, सुनवाई और अंत में डेमोलिशन का प्रावधान है। इस मामले में भी दो साल पहले नोटिस जारी हुआ था। सुनवाई के बाद स्पष्ट आदेश आया है। KMC के अधिकारी कहते हैं कि अगर कोई नियमितीकरण (regularisation) चाहे तो अर्जी दे सकता है, लेकिन गंभीर उल्लंघनों में इसे मंजूर नहीं किया जाता।यह घटना बड़े पैमाने पर चर्चा में है क्योंकि RG Kar कांड पूरे देश को झकझोर गया था। युवा डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और आम नागरिकों ने न्याय की मांग को लेकर बड़े आंदोलन किए थे। अब संदीप घोष के घर पर कार्रवाई को “न्याय की दिशा में एक कदम” कहा जा रहा है। सोशल मीडिया पर #JusticeForRGKar और #KMCAction जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
क्या आगे होगा?
45 दिन की समयसीमा चल रही है। अगर घोष परिवार खुद निर्माण हटा लेता है तो विवाद शांत हो सकता है, अन्यथा KMC bulldozer लेकर पहुंचेगा। इस बीच, संदीप घोष के खिलाफ CBI और ED की जांच भी जारी है। कोर्ट में कई सुनवाइयां हो चुकी हैं और आगे भी प्रक्रिया चलेगी।यह मामला इस बात का उदाहरण है कि कानून के आगे कोई भी बड़ा नहीं। चाहे वह सरकारी अस्पताल का प्रिंसिपल हो या कोई आम नागरिक। नियम सबके लिए समान हैं। कोलकाता की सड़कों पर अब इस डेमोलिशन की खबर गर्म चर्चा का विषय बनी हुई है। आमजन उम्मीद कर रहा है कि RG Kar कांड में शामिल अन्य लोगों पर भी इसी तरह की पारदर्शी कार्रवाई होगी।
निष्कर्ष
KMC का यह आदेश न सिर्फ बिल्डिंग नियमों का पालन सुनिश्चित करता है बल्कि समाज में यह संदेश भी देता है कि भ्रष्टाचार और नियम तोड़ने की कोई भी कोशिश बिना परिणाम के नहीं रहती। पूर्व RG Kar प्रिंसिपल संदीप घोष के आवास पर अनधिकृत हिस्सों का डेमोलिशन न्याय की प्रक्रिया को मजबूत बनाता है।
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