देश में पेट्रोल की कीमतों में भारी असमानता
राज्य सरकारों के अलग-अलग करों और वैट के कारण पेट्रोल कीमतों में 15-20 रुपये का फर्क, दक्षिणी और पूर्वी राज्य सबसे महंगे, उत्तर भारत में सस्ता ईंधन
Published on: March 10, 2026
By: BTNI
Location: New Delhi, India
भारत में पेट्रोल की कीमतें राज्य-दर-राज्य काफी भिन्न होती हैं, जो मुख्य रूप से राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले वैट (मूल्य वर्धित कर), अन्य स्थानीय करों, परिवहन लागत और मांग-आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करती हैं। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित बेस प्राइस और एक्साइज ड्यूटी समान होने के बावजूद, राज्य स्तर पर करों के अंतर से एक लीटर पेट्रोल की कीमत में 15 से 25 रुपये तक का फर्क देखा जा सकता है। 10 मार्च 2026 को उपलब्ध नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश में पेट्रोल सबसे महंगा है, जहां यह ₹109.45 से ₹109.68 प्रति लीटर तक पहुंच रहा है। इसके ठीक विपरीत, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में यह मात्र ₹82.46 प्रति लीटर है, जबकि दिल्ली जैसे राजधानी क्षेत्र में ₹94.77 प्रति लीटर पर स्थिर है।
पोस्ट में उल्लिखित टॉप 10 सबसे महंगे राज्यों की सूची वर्तमान वास्तविकता से काफी मेल खाती है। आंध्र प्रदेश ₹109.68, तेलंगाना ₹108.83 (हालांकि कुछ स्रोतों में ₹107.50), मध्य प्रदेश ₹107.83 (वर्तमान में ₹106.56-107.99 के आसपास), बिहार ₹106.94 (वर्तमान ₹105.47), केरल ₹106.46 (वर्तमान ₹106-107.48), पश्चिम बंगाल ₹106.34 (वर्तमान ₹105.45), राजस्थान ₹104.61 (वर्तमान ₹105.11 के करीब), महाराष्ट्र ₹104.38 (वर्तमान ₹103.50-104.22), सिक्किम ₹103.35 और कर्नाटक ₹102-103 के आसपास हैं।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि दक्षिणी और कुछ पूर्वी राज्य उच्च वैट दरों के कारण सबसे महंगे बने हुए हैं, जबकि उत्तर भारत के राज्य जैसे दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात में कीमतें ₹94-96 के दायरे में हैं।पेट्रोल कीमतों में यह अंतर मुख्यतः राज्य वैट पर आधारित है। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उच्च वैट और अतिरिक्त लेवी लगती है, जबकि दिल्ली में वैट दर अपेक्षाकृत कम है। वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंचने के बावजूद, घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल कीमतें पिछले कई महीनों से स्थिर बनी हुई हैं।
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केंद्र और राज्य सरकारें कोई बड़ा बदलाव नहीं कर रही हैं, जिससे आम आदमी को राहत मिल रही है। हालांकि, राज्य-वार असमानता यात्रियों, व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए चुनौती बनी हुई है।उदाहरणस्वरूप, अगर कोई व्यक्ति आंध्र प्रदेश से दिल्ली जा रहा है, तो वहां पेट्रोल भरवाने पर काफी बचत हो सकती है। वहीं, महंगे राज्यों के निवासियों को मासिक ईंधन खर्च में अधिक बोझ उठाना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र सरकार वैट को एकसमान करने या GST के दायरे में लाने की दिशा में कदम उठाए, तो यह असमानता कम हो सकती है।
फिलहाल, उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि यात्रा के दौरान सस्ते राज्यों में ईंधन भरवाएं और ऐप्स या वेबसाइट्स के माध्यम से दैनिक अपडेट चेक करें।यह स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था में ईंधन कीमतों की जटिलता को उजागर करती है, जहां कर नीतियां क्षेत्रीय असमानता को बढ़ावा दे रही हैं। आने वाले दिनों में यदि क्रूड ऑयल कीमतें और बढ़ती हैं, तो राज्य सरकारों पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन वर्तमान में कीमतें स्थिर हैं। आम जनता के लिए यह एक याद दिलाने वाला मुद्दा है कि ईंधन कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार पर नहीं, बल्कि स्थानीय कर नीतियों पर भी निर्भर करती हैं।



