कृष्ण जन्माष्टमी पर लगाए गए मांस बिक्री प्रतिबंध के खिलाफ शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने मुफ्त चिकन बांटकर विवाद खड़ा कर दिया। पार्टी ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता की लड़ाई बताया, जबकि आलोचकों ने इसे हिंदू आस्था का अपमान कहा। इस मुद्दे ने महाराष्ट्र की सियासत में तीखी बहस छेड़ दी है, जहां धार्मिक परंपराओं, व्यक्तिगत अधिकार और राजनीतिक रणनीतियों के बीच टकराव साफ दिख रहा है।
महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत पर तीखा हमला करते हुए कहा कि फडणवीस ने राउत और उनके बॉस उद्धव ठाकरे को 'घर बिठा दिया' है। राणे के इस बयान ने राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है और राउत की राजनीतिक प्रासंगिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राज ठाकरे की बदलती राजनीतिक रणनीतियों ने एक बार फिर महाराष्ट्र की सियासत में चर्चा को जन्म दे दिया है। 2019 में देवेंद्र फडणवीस द्वारा की गई भविष्यवाणी—राज ठाकरे हर पांच साल में रुख बदलते हैं—अब सच होती दिख रही है। कभी मोदी समर्थक, फिर विरोधी, और अब उद्धव ठाकरे के साथ खड़े राज ठाकरे क्या आने वाले चुनाव में कांग्रेस का दामन थामेंगे? यही सवाल अब राजनीतिक गलियारों में गूंज रहा है।
मीरा-भायंदर में एक मारवाड़ी मिठाई दुकानदार के साथ कथित तौर पर MNS कार्यकर्ताओं द्वारा मराठी भाषा के विवाद को लेकर की गई मारपीट ने पूरे महाराष्ट्र में रोष और तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। व्यापारियों ने घटना के विरोध में बंद का आह्वान किया और देशभर में राज और उद्धव ठाकरे की आलोचना तेज हो गई। राजनेताओं ने इस घटना को भाषाई स्वतंत्रता और सामाजिक सद्भाव पर हमला करार दिया है। यह घटना क्षेत्रीय गर्व के नाम पर हिंसा और संविधान प्रदत्त भाषाई अधिकारों के टकराव को फिर से उजागर करती है।
मुंबई के वर्ली डोम में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का दो दशक बाद एक मंच पर आना महाराष्ट्र की राजनीति में ऐतिहासिक क्षण बना। 'मराठी विजय रैली' में दोनों नेताओं ने छत्रपति शिवाजी महाराज को नमन करते हुए मराठी अस्मिता और एकता का संदेश दिया। यह आयोजन मराठी भाषा के सम्मान और ठाकरे बंधुओं की एकजुटता का प्रतीक बन गया।
नागपुर के खापरखेड़ा में आयोजित 'तिरंगा शौर्य सम्मान यात्रा' में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सीएम ने इसे सेना के सम्मान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया। नागपुरवासियों ने यात्रा को प्रेरणादायक बताते हुए इसका भरपूर समर्थन किया, वहीं कुछ विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक स्टंट कहा।