महात्मा ज्योतिबा फुले की पुण्यतिथि पर राष्ट्र ने किया सादर नमनशिक्षा नारी सशक्तीकरण और सामाजिक क्रांति के अग्रदूत को कोटि-कोटि प्रणाम
सत्यशोधक समाज’ के संस्थापक ने सदियों पुरानी कुरीतियों को चुनौती देकर समता का नया सूरज उगाया
Published on: November 28, 2025
By: BTNI
Location: Pune, India
आज देश भर में वह महान समाज क्रांतिकारी याद किया जा रहा है जिन्होंने शिक्षा को हथियार बनाकर सदियों से चली आ रही जाति-व्यवस्था, छुआछूत और स्त्री दासता की जंजीरें तोड़ने का साहस दिखाया। महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले की 135वीं पुण्यतिथि पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित तमाम गणमान्य लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
राष्ट्रपति भवन से जारी संदेश में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, “महात्मा फुले ने सबसे पहले लड़कियों के लिए स्कूल खोला और विधवाओं को समाज की मुख्यधारा में लाने का बीड़ा उठाया। उनकी सोच आज भी हमारे ‘विकसित भारत’ के संकल्प को दिशा दे रही है।”प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में लिखा, “ज्योतिबा फुले जी ने सत्य की खोज को ही जीवन का ध्येय बनाया। नारी शिक्षा हो या शूद्र-अतिशूद्र उत्थान, हर क्षेत्र में उन्होंने क्रांति का झंडा बुलंद किया। उनकी पुण्यतिथि हमें याद दिलाती है कि सामाजिक न्याय तभी संभव है जब अंतिम पंक्ति का व्यक्ति सशक्त बने।
”महात्मा फुले ने 1848 में पुणे में देश की पहली बालिका पाठशाला स्थापित की थी। 1851 में उन्होंने विधवाओं और परित्यक्त महिलाओं के लिए आश्रय गृह खोला। सबसे बड़ी बात, 1873 में स्थापित उनका ‘सत्यशोधक समाज’ बिना पुरोहित के, बिना संस्कृत मंत्रों के विवाह कराने वाला पहला संगठन था जिसने दलित-शोषित समाज को आत्मसम्मान का पाठ पढ़ाया।महाराष्ट्र सरकार ने आज राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। पुणे के उनके पैतृक निवास और फुले वाड़ा को फूलों से सजाया गया है।
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सत्यशोधक समाज की ओर से दिनभर सेमिनार, नारी सशक्तीकरण कार्यशाला और निःशुल्क शिक्षा शिविर चल रहे हैं।देश के लाखों स्कूलों-कॉलेजों में आज विशेष सभाएं हुईं जिनमें बच्चों को बताया गया कि सावित्रीबाई फुले के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले ज्योतिबा ही पहले पुरुष थे जिन्होंने स्त्री शिक्षा को राष्ट्र धर्म माना।महात्मा फुले का संदेश आज भी गूंज रहा है –
“विद्या बिना मति गई, मति बिना नीति गई,
नीति बिना गति गई, गति बिना वित्त गया.
वित्त बिना शूद्र खाया, इतना बड़ा अन्याय कहां हुआ!”
आज पूरा राष्ट्र एक स्वर में कह रहा है –
महात्मा ज्योतिबा फुले अमर रहें!
जय ज्योतिबा! जय सत्यशोधक!!



