Published on: March 15, 2026
By: BTNI
Location: Gaziabad, India
गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा की जिंदगी से जुड़ी एक बेहद भावुक और असाधारण कहानी का अंत अब सामने आ गया है। करीब 13 वर्षों से कोमा में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हरीश राणा को अब उनके परिजनों ने अंतिम विदाई दे दी है।
हरीश राणा एक सड़क दुर्घटना के बाद गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उसी हादसे के बाद से वे कोमा में चले गए थे। तब से लेकर अब तक वे बिस्तर पर ही पड़े थे और कभी होश में नहीं आ सके।
13 साल तक नहीं छोड़ी उम्मीद
हरीश राणा के माता-पिता ने इन 13 वर्षों में अपने बेटे को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। देश के अलग-अलग अस्पतालों में उनका इलाज कराया गया, कई विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श लिया गया, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
परिवार के लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। दिन-रात बेटे की सेवा की और इस आस में रहे कि शायद किसी दिन वह फिर से आंखें खोल देगा।

एम्स में लाया गया
आखिरकार हाल ही में हरीश राणा को दिल्ली स्थित देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल All India Institute of Medical Sciences लाया गया। यहां डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल स्थिति की विस्तृत जांच की।
डॉक्टरों की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि इतने लंबे समय से कोमा में रहने के कारण उनके ठीक होने की संभावना लगभग समाप्त हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट से मिली अनुमति
इस संवेदनशील मामले में कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई गई। परिवार और डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर मामला Supreme Court of India तक पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद हरीश राणा का लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने की अनुमति दे दी। यह फैसला बेहद संवेदनशील परिस्थितियों में लिया गया, क्योंकि मामला जीवन और मानवीय गरिमा से जुड़ा था।
अंतिम विदाई का भावुक क्षण
अपने बेटे को अंतिम विदाई देते समय हरीश राणा के माता-पिता बेहद भावुक हो गए। उन्होंने बेटे से कहा—
“सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ, ठीक है।”
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यह शब्द सुनकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो उठे। 13 वर्षों तक बेटे की सेवा करने वाले माता-पिता के लिए यह क्षण बेहद पीड़ादायक लेकिन भावनात्मक रूप से गहरा था।
एक लंबा संघर्ष, एक मार्मिक अंत
हरीश राणा की कहानी सिर्फ एक मरीज की कहानी नहीं है, बल्कि माता-पिता के धैर्य, प्रेम और उम्मीद की भी कहानी है। 13 साल तक उन्होंने अपने बेटे को जीवित रखने के लिए हर संभव प्रयास किया और अंत तक उसके साथ खड़े रहे।
अब जब उनका लाइफ सपोर्ट हटाया जाएगा, तो यह एक ऐसे संघर्ष का अंत होगा जिसने पूरे परिवार को वर्षों तक बांधे रखा।


