संसद में गूंजा मोबाइल रिचार्ज का ‘स्कैम’
- इनकमिंग कॉल बंद करने पर AAP सांसद राघव चड्ढा का तीखा हमला
- 28 दिन की वैलिडिटी से उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ
- रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग कॉल्स-एसएमएस बंद होना ‘मनमानी’ बताते हुए सरकार से हस्तक्षेप की मांग
Published on: March 11, 2026
By: BTNI
Location: New Delhi, India
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा ने बुधवार को टेलीकॉम कंपनियों की प्रीपेड रिचार्ज नीतियों पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने इसे आम आदमी की जेब पर ‘छिपी लूट’ करार दिया और संसद में दो बड़े मुद्दे उठाए – पहला, 28 दिन की वैलिडिटी वाले ‘मासिक’ प्लान के कारण साल में 13 बार रिचार्ज करना पड़ना, और दूसरा, प्लान खत्म होने पर इनकमिंग कॉल्स और एसएमएस बंद कर देना। चड्ढा ने कहा कि देश में लगभग 125 करोड़ मोबाइल उपभोक्ता हैं, जिनमें से ज्यादातर प्रीपेड यूजर्स हैं, और ये नीतियां उन्हें अनावश्यक रूप से प्रभावित करती हैं।
राघव चड्ढा ने गणित के आधार पर समझाया कि एक साल में 365 दिन (लीप ईयर में 366) होते हैं, लेकिन 28 दिन × 13 = 364 दिन ही कवर होते हैं। इससे उपभोक्ताओं को हर साल एक अतिरिक्त रिचार्ज करना पड़ता है, जो टेलीकॉम कंपनियों को अतिरिक्त राजस्व देता है। उन्होंने कहा, “साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन 28 दिन के प्लान के कारण लोग 13 बार रिचार्ज करते हैं। अगर प्लान सच में मंथली है, तो वैलिडिटी 30 या 31 दिन होनी चाहिए, ताकि कैलेंडर महीने के हिसाब से चले और उपभोक्ताओं को अतिरिक्त बोझ न उठाना पड़े।” चड्ढा ने इसे ‘गणितीय स्कैम’ बताया और कहा कि यह व्यवस्था उपभोक्ता विरोधी है।
दूसरे मुद्दे पर चड्ढा ने जोर दिया कि रिचार्ज खत्म होने पर आउटगोइंग कॉल्स बंद होना समझ में आता है, क्योंकि बैलेंस कम होने पर कंपनी को नुकसान होता है। लेकिन इनकमिंग कॉल्स और एसएमएस बंद करना ‘सरासर मनमानी’ है। उन्होंने कहा, “फोन मेरा है, सिम मेरा है, नंबर मेरा है। रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग क्यों बंद? इससे बैंक OTP, सरकारी नोटिफिकेशन, जॉब कम्युनिकेशन, डिजिटल पेमेंट और इमरजेंसी कॉल्स प्रभावित होते हैं। गरीब और दिहाड़ी मजदूरों के लिए यह बहुत बड़ी समस्या है, क्योंकि उनका नंबर ही उनकी पहचान है।”
Also read- https://www.btnewsindia.com/nabard-holds-awareness-conference-for-bank-and-field-officers-in-mohla/ https://www.btnewsindia.com/renowned-scientist-dr-dakeshwar-verma-highlights-importance-of-science-at-ambagarh-chowki-college-on-national-science-day/
चड्ढा ने मांग की कि इनकमिंग कॉल्स और मैसेज कम से कम एक साल तक सक्रिय रहें, नंबर तीन साल तक डीएक्टिव न हो, और कंपनियां ‘इनकमिंग ओनली’ सस्ते प्लान लाएं।यह मुद्दा राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान उठाया गया, जहां चड्ढा ने TRAI के डेटा का हवाला दिया। उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप की अपील की ताकि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हो। टेलीकॉम कंपनियां जैसे Jio, Airtel और Vi ज्यादातर प्लान 28 दिन के ही ऑफर करती हैं, जो 4 हफ्तों पर आधारित है और बिलिंग आसान बनाता है, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए महंगा पड़ता है। TRAI नियमों में 30 दिन के प्लान की अनिवार्यता है, लेकिन 28 दिन के प्लान पर रोक नहीं है, जिससे कंपनियां इसका फायदा उठाती हैं।
राघव चड्ढा की यह बहस सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है, जहां लाखों यूजर्स अपनी परेशानियां शेयर कर रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि OTP न आने से बैंक ट्रांजेक्शन रुक जाते हैं, और इमरजेंसी में फोन बेकार हो जाता है। इस मुद्दे से टेलीकॉम सेक्टर में पारदर्शिता और उपभोक्ता सुरक्षा पर नई बहस छिड़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार या TRAI हस्तक्षेप करता है, तो प्लान सिस्टम में बड़े बदलाव आ सकते हैं। चड्ढा की यह पहल आम आदमी के रोजमर्रा के संघर्ष को संसद तक पहुंचाने का एक उदाहरण है, जो दिखाता है कि छोटी-छोटी नीतियां भी करोड़ों लोगों की जिंदगी प्रभावित करती हैं।



