माँ ने पूछा “IAS क्या होता है?
Published on: March 07, 2026
By: BTNI
Location: Raibareli, India
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 के अंतिम परिणामों में उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के एक साधारण गांव से निकले विमल कुमार ने पूरे देश में अपनी मेहनत का लोहा मनवाया है। उन्होंने ऑल इंडिया 107वीं रैंक हासिल कर न केवल परिवार और गांव का नाम रोशन किया, बल्कि ग्रामीण भारत के उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं जो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपने देखते हैं।
विमल के पिता रामदेव भट्ठे पर मजदूरी करते हैं और मां सियावती देवी घर संभालती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि बिजली की समस्या तक पढ़ाई में बाधा बनती थी, लेकिन विमल ने सेल्फ स्टडी और दृढ़ संकल्प से यह मुकाम हासिल किया।विमल कुमार मूल रूप से खीरो ब्लॉक के चांदेमऊ गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय से पूरी की। बाद में IIT दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया।
ग्रेजुएशन के बाद 2021 से उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की। यह उनका पांचवां प्रयास था। पहले चार प्रयासों में असफलता मिली, यहां तक कि 2024 में इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन 12 अंकों से चूक गए। लेकिन हार नहीं मानी। लखनऊ के भागीदारी भवन में रहकर उन्होंने लगातार मेहनत की। मैथमेटिक्स उनका ऑप्शनल सब्जेक्ट था।सफलता की खबर मिलते ही विमल ने सबसे पहले मां को फोन किया और खुशी से कहा, “माँ, मैं IAS बन गया!” मां की प्रतिक्रिया दिल छू गई। उन्होंने मासूमियत से पूछा, “IAS क्या होता है?” जब विमल ने समझाया कि यह बड़ा अफसर होता है, जो देश की सेवा करता है, तो मां की आंखें भर आईं। अफसर शब्द सुनकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
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यह पल विमल के लिए सबसे भावुक था, क्योंकि परिवार को IAS जैसी सेवा की पूरी जानकारी नहीं थी, लेकिन बेटे की मेहनत पर गर्व था।विमल की सफलता की कहानी सेल्फ स्टडी की मिसाल है। उन्होंने कभी कोचिंग नहीं ली, बल्कि अनुशासन, नियमित पढ़ाई और गांव की जमीनी हकीकत से सीखे सबकों का इस्तेमाल किया। गांव में बिजली की कटौती के बावजूद उन्होंने धैर्य रखा। पिता की मजदूरी और मां के आशीर्वाद ने उन्हें मजबूत बनाया। अब विमल IAS संवर्ग में सेवा देंगे, जो उनका मुख्य लक्ष्य था।यह उपलब्धि रायबरेली जिले और पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गौरव की बात है। गांव में खुशी की लहर दौड़ गई, पड़ोसी और रिश्तेदार बधाई देने पहुंचे।
विमल की कहानी साबित करती है कि पृष्ठभूमि चाहे कितनी भी скром हो, अगर इरादे पक्के हों और मेहनत निरंतर हो, तो UPSC जैसी सबसे कठिन परीक्षा भी जीती जा सकती है। ग्रामीण युवाओं के लिए यह संदेश है कि सपने देखो, मेहनत करो और कभी हार मत मानो।विमल कुमार जैसे युवा देश के भविष्य हैं, जो दिखाते हैं कि सच्ची प्रतिभा और लगन से कोई भी बाधा पार की जा सकती है। उनके उज्ज्वल भविष्य और राष्ट्रसेवा की राह पर सफलता की कामना करता हूं। छत्तीसगढ़ से लेकर उत्तर प्रदेश तक, ऐसे ही प्रतिभाशाली युवा देश को नई दिशा दे रहे हैं।



