ग्रामीण महाराष्ट्र में महायुति का परचम, 12 में से 11 जिला परिषदों पर कब्जा; BJP को 7 जिलों में बहुमत, MVA को करारी शिकस्त
Published on: February 09, 2026
By: BTNI
Location: Mumbai/ Pune, India
महाराष्ट्र के 12 जिला परिषद (ZP) चुनावों में भाजपा नीत महायुति गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 11 जिलों में बहुमत हासिल किया है। वोटों की गिनती के अंतिम नतीजों में महायुति ने कुल 11 ZP पर कब्जा जमाया, जबकि महा विकास अघाड़ी (MVA) सिर्फ एक जिले तक सीमित रह गई। यह परिणाम मोदी लहर और ग्रामीण क्षेत्रों में महायुति की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, 7 फरवरी को हुए मतदान में 12 जिलों (रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, पुणे, सतारा, सांगली, सोलापुर, कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, धाराशिव और लातूर) की 731 ZP सीटों और 1,462 पंचायत समिति सीटों के लिए 7,438 उम्मीदवार मैदान में थे। कुल 2 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने हिस्सा लिया, और मतदान प्रतिशत 68.28% रहा।
ZP चुनाव परिणाम (12/12): महायुति: 11 जिलों में जीत BJP: 7 जिलों में बहुमत
शिवसेना (शिंदे गुट): 3 जिलों में
NCP (अजित पवार गुट): 1 जिले में
MVA: 1 जिला कांग्रेस: 1 जिले में
शिवसेना (UBT): 0
NCP (SP): 0
महायुति ने कई प्रमुख जिलों में जबरदस्त बढ़त बनाई। उदाहरण के लिए, लातूर में BJP ने 16 सीटों से आगे रहकर मजबूत प्रदर्शन किया, जबकि सांगली में भी 16 सीटों पर लीड थी। सतारा में BJP 32 सीटों पर आगे रही। धाराशिव में शिवसेना ने 12 सीटों के साथ बढ़त बनाई। शुरुआती ट्रेंड्स में महायुति ने 264+ सीटों पर लीड ली थी, जिसमें BJP अकेले 145+ सीटों पर आगे थी।
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यह जीत महायुति के लिए ग्रामीण महाराष्ट्र में मजबूत आधार साबित हुई है, खासकर हाल के विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद। विपक्षी MVA को बड़ा झटका लगा, जहां कांग्रेस सिर्फ एक जिले तक सिमट गई। उध्दव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और शरद पवार की NCP (SP) का खाता नहीं खुला। BJP नेताओं ने इसे “मोदी की लहर” और “जनता का फैसला” बताया।
एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, “लोग मोदी जी के साथ हैं – ग्रामीण विकास, किसान कल्याण और आत्मनिर्भर भारत की नीतियां जनता तक पहुंच रही हैं।” महायुति अब इन जिलों में प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत करेगी, जो पंचायती राज और ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। यह परिणाम राज्य की राजनीति में महायुति की बढ़ती ताकत को रेखांकित करता है, जबकि MVA को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। ग्रामीण मतदाताओं का यह समर्थन आगामी चुनावों के लिए भी संकेत है। “जनता ने फैसला सुना दिया – मोदी के साथ महाराष्ट्र!”



