पश्चिम बंगाल में सच्ची धर्मनिरपेक्षता की बजाय एकतरफा समर्पण को सेक्युलरिज्म का नाम देना – संबित पात्रा ने उठाया गंभीर सवाल
Published on: February 22, 2026
By: BTNI
Location: Kolkata, India
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के एक पुराने बयान ने एक बार फिर राजनीतिक बहस को तीखा कर दिया है। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि मुस्लिम समुदाय को खुश करने के लिए वे “दूध देने वाली गाय की लातें भी सह लेंगी”। इस बयान को लेकर भाजपा नेता संबित पात्रा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति का स्पष्ट प्रमाण बताया और कहा कि ममता बनर्जी की सरकार में सेक्युलरिज्म का मतलब अब हिंदू भावनाओं का अपमान और अल्पसंख्यक वोट बैंक को संरक्षण देना बन गया है।
संबित पात्रा का कहना है कि जब मुख्यमंत्री खुद इस तरह का बयान देती हैं, तो यह उनकी शासन शैली की असलियत को उजागर करता है। उन्होंने लिखा कि पश्चिम बंगाल में समर्पण को अब सेक्युलरिज्म का नया नाम दिया जा रहा है। सच्ची धर्मनिरपेक्षता कभी एकतरफा नहीं हो सकती। यह सभी समुदायों के लिए समान न्याय और सम्मान की बात करती है, न कि किसी एक को खुश करने के लिए दूसरे की भावनाओं को कुचलने की। पात्रा ने सवाल उठाया कि क्या हिंदू समुदाय की भावनाओं का कोई मूल्य नहीं है?
क्या उनकी आस्था और संस्कृति को बार-बार ठेस पहुंचाना ही तुष्टिकरण का आधार बन गया है?यह बयान वर्षों से चर्चा में रहा है और विभिन्न मौकों पर भाजपा नेताओं द्वारा इसका जिक्र किया जाता रहा है। ममता बनर्जी की सरकार पर आरोप लगता रहा है कि वे मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने के लिए नीतियां बनाती हैं, जिससे राज्य में सामाजिक तनाव बढ़ा है। संबित पात्रा ने इसे “एकतरफा सेक्युलरिज्म” करार देते हुए कहा कि इससे राज्य की एकता और विकास पर बुरा असर पड़ रहा है।
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उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी राजनीति लंबे समय तक नहीं चल सकती, क्योंकि जनता अब सच को समझ रही है।विपक्षी दलों का मानना है कि ममता बनर्जी की यह टिप्पणी उनके शासन की प्राथमिकताओं को दर्शाती है। जहां एक तरफ अल्पसंख्यक समुदाय को विशेष सुविधाएं दी जाती हैं, वहीं बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं को अनदेखा किया जाता है। पात्रा ने इसे “सच्ची सेक्युलरिज्म का अपमान” बताया और कहा कि सच्चा सेक्युलरिज्म सभी के लिए समान अवसर और सम्मान सुनिश्चित करता है, न कि वोट बैंक की राजनीति।यह मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में गहरा विभाजन पैदा कर रहा है।
भाजपा इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि टीएमसी इसे राजनीतिक षड्यंत्र करार देती है। लेकिन संबित पात्रा के इस पोस्ट ने एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं कि क्या धर्मनिरपेक्षता का नाम लेकर तुष्टिकरण की राजनीति राज्य को मजबूत बना रही है या कमजोर?



