Published on: April 13, 2026
By: BTNI
Location: Rajnandgaon, India
स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए रायपुर स्थित स्पीकर हाउस में आज एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सतत विकास योजनाओं के अंतर्गत राजनांदगांव विधानसभा के ग्राम बोईरडीह में प्रस्तावित कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्र को लेकर केंद्रित रही।
बैठक में भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा स्थापित किए जाने वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रस्तावित संयंत्र प्रतिदिन 100–150 टन जैविक कचरे से 12–15 मीट्रिक टन स्वच्छ गैस का उत्पादन करेगा, जो न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगा बल्कि ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत को भी मजबूती देगा।

100 करोड़ का निवेश, रोजगार और राजस्व में बढ़ोतरी —-
करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित होने वाले इस प्लांट से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। परियोजना से लगभग 30 हजार मानव दिवस का रोजगार सृजित होने का अनुमान है, वहीं राज्य सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 1 करोड़ रुपए का जीएसटी राजस्व भी प्राप्त होगा।
सकारात्मक चर्चा, बढ़ी उम्मीदें
बैठक में कई जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में इस परियोजना को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई। सभी ने इसे राजनांदगांव के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया और उम्मीद जताई कि यह प्लांट जल्द ही धरातल पर उतरेगा।
यह पहल क्षेत्र के लिए न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी एक नई मिसाल पेश करेगी।
आज जब ऊर्जा के पारंपरिक स्रोत महंगे होते जा रहे हैं, ऐसे में बायोगैस जैसे विकल्प आम जनता के लिए राहत का माध्यम बन सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से प्रचलित गोबर गैस को भी इस तरह के बड़े प्रोजेक्ट्स से नई पहचान और प्रोत्साहन मिलेगा। उल्लेखनीय है कि इसके साथ साथ प्रदेश के दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर सहित अन्य स्थानों पर भी शासन द्वारा ऐसे प्लांट स्थापित किए जाने की योजना तैयार हो रही है।

विकास की ओर मजबूत कदम ——-
राजनांदगांव में इस तरह की परियोजना को लेकर जो पहल हो रही है, वह न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह दिखाता है कि सही सोच और प्रयास से कचरे को भी संसाधन में बदला जा सकता है।
अगर यह परियोजना साकार होती है, तो यह आने वाले समय में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकती है।
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