छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि राज्य सरकार ऐसे कदमों का “रेड कार्पेट” स्वागत करेगी
Published on: February 24, 2026
By: BTNI
Location: Raipur/Mahasamund, India
ओडिशा सीमा क्षेत्र में सक्रिय प्रतिबंधित माओवादी संगठन के बीबीएम (बलांगीर–बर्गढ़–महासमुंद) डिवीजन के कुछ नक्सल कैडरों द्वारा आत्मसमर्पण की इच्छा जताते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस को पत्र लिखे जाने की खबर सामने आई है। इस पहल का स्वागत करते हुए छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि राज्य सरकार ऐसे कदमों का “रेड कार्पेट” स्वागत करेगी और आत्मसमर्पण करने वालों को केंद्र व राज्य की पुनर्वास नीतियों के तहत सम्मानजनक जीवन का अवसर दिया जाएगा।
सरकार का रुख: “मुख्यधारा में लौटने वालों का सम्मान”गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि जो भी भटके हुए युवा हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था में लौटना चाहते हैं, उनके लिए सरकार के दरवाजे खुले हैं।
“छत्तीसगढ़ सरकार और भारत सरकार की सरेंडर एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वालों को आर्थिक सहायता, कौशल प्रशिक्षण, आवास, सुरक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। हमारा उद्देश्य उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक स्थापित करना है।”
सूत्रों के अनुसार, संबंधित डिवीजन के कुछ सदस्यों ने पत्र के माध्यम से आत्मसमर्पण की इच्छा जताई है और सुरक्षा की गारंटी तथा पुनर्वास पैकेज के स्पष्ट प्रावधानों की जानकारी मांगी है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पत्र की प्रामाणिकता व प्रक्रिया संबंधी औपचारिकताओं की जांच कर रही हैं।
क्या है बीबीएम डिवीजन?माओवादी संगठन का तथाकथित बीबीएम डिवीजन ओडिशा के बलांगीर–बर्गढ़ और छत्तीसगढ़ के महासमुंद व आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय रहा है। इस इलाके में समय-समय पर सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़, आईईडी बरामदगी और भर्ती-प्रचार जैसी गतिविधियों की खबरें आती रही हैं। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की बढ़ती कार्रवाई और विकास योजनाओं के विस्तार के चलते कई कैडरों ने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना है।
पुनर्वास नीति: क्या मिलते हैं लाभ?केंद्र व राज्य की नीतियों के तहत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को आम तौर पर निम्न सुविधाएं दी जाती हैं—
आर्थिक अनुदान/एकमुश्त सहायता
मासिक वजीफा (निर्धारित अवधि तक)
कौशल विकास व स्वरोजगार प्रशिक्षण
आवास/भूमि/रोजगार में प्राथमिकता
सुरक्षा और कानूनी सहायता (नियमों के अनुसार)
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अधिकारियों का कहना है कि गंभीर आपराधिक मामलों में विधिक प्रक्रिया जारी रहती है, लेकिन जो कैडर हिंसा छोड़कर सहयोग करते हैं, उनके लिए नीति में स्पष्ट प्रावधान हैं।
बुद्धिजीवी और पत्रकार जगत की प्रतिक्रियाराज्य के विभिन्न बुद्धिजीवी वर्गों और पत्रकार संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका मानना है कि यदि बड़ी संख्या में कैडर आत्मसमर्पण करते हैं तो सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति, निवेश और विकास की गति तेज होगी। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों का विस्तार ही दीर्घकालिक समाधान है।
आगे की प्रक्रियापुलिस सूत्रों के मुताबिक, औपचारिक आत्मसमर्पण की तारीख, स्थान और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर चर्चा चल रही है। यदि प्रक्रिया पूरी होती है तो निकट भविष्य में सामूहिक सरेंडर कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है।
निष्कर्ष: बीबीएम डिवीजन के नक्सलियों की ओर से सरेंडर की पहल को राज्य सरकार ने सकारात्मक संकेत माना है। सरकार का कहना है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक ढांचे में लौटने वालों को पूरा सहयोग और सम्मान मिलेगा, ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।



