जब पूर्व नक्सलियों ने विधानसभा में देखा लोकतंत्र, संवाद बना विश्वास और विकास की नई शुरुआत
Published on: February 27, 2026
By: BTNI
Location: Raipur, India
छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज जो दृश्य देखने को मिला, वह लोकतांत्रिक इतिहास की एक अद्वितीय (Unique) पहल के रूप में सामने आया। पहली बार आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों को न केवल विधानसभा की कार्यवाही दिखाई गई, बल्कि शासन और समाज के बीच प्रत्यक्ष संवाद का अवसर भी प्रदान किया गया।

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा की पहल पर लगभग 125 पूर्व नक्सलियों, जिनमें महिला कैडर भी शामिल थीं, को विधानसभा सत्र में आमंत्रित किया गया। छत्तीसगढ़ के जिन 120 सरेंडर नक्सलियों ने आज विधानसभा की कार्यवाही देखी उनमें 1 करोड़ का इनामी पूर्व नक्सली रुपेश और झीरम हमले का मास्टरमांड चैतू भी कार्यवाही देखने पहुंचा था। इससे पहले गुरुवार रात ये सभी नक्सली डिप्टी सीएम विजय शर्मा के निवास पर डिनर के लिए पहुंचे थे।
विधानसभा प्रवेश से लेकर मंत्री कक्ष तक की पूरी प्रक्रिया प्रतिभागियों के लिए लाइव अनुभव रही, जिसने कार्यक्रम को औपचारिकता से आगे बढ़ाकर विश्वास निर्माण का वास्तविक मंच बना दिया।

अंतरंग संवाद बना कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता ——————–
गृह मंत्री के कक्ष में पूर्व नक्सलियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षा अधिकारियों के बीच लगभग 10–15 मिनट तक बेहद सहज, जमीन से जुड़ी और खुली बातचीत हुई। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तथा राजधानी रायपुर के पुलिस कमिश्नर संजीव शुक्ला तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव निहारिका बारिक भी मौजूद रहीं और संवाद में सक्रिय भागीदारी निभाई।
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बातचीत केवल औपचारिक विषयों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक जीवन, मुख्यधारा से जुड़ाव, सोशल मीडिया जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम के उपयोग से लेकर भविष्य के अवसरों तक पहुंची। माहौल इतना सहज था जैसे किसी चौपाल में होता है।
बस्तर विकास पर आर्थिक संवाद ———
संवाद के अंतिम चरण में चर्चा का केंद्र बस्तर के आर्थिक विकास पर रहा। पूर्व नक्सल कैडरों और अधिकारियों के बीच इस बात पर गंभीर चर्चा हुई कि यदि बस्तर क्षेत्र में लघु वनोपज, कृषि आधारित गतिविधियों और सहकारिता (Cooperative) मॉडल को मजबूत किया जाए तो स्थानीय युवाओं के लिए बड़े स्तर पर रोजगार और आय के अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

गृह मंत्री विजय शर्मा ने इस संदर्भ में गुजरात के सहकारिता मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार वहां दुग्ध उत्पादन और अन्य सहकारी संस्थाओं ने हजारों करोड़ रुपये का वार्षिक टर्नओवर खड़ा किया है तथा ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि सहकारिता साम्यवाद और पूंजीवाद के बीच का व्यावहारिक मार्ग है, जो सामूहिक भागीदारी से विकास सुनिश्चित करता है।
लाइव अनुभव ने छोड़ा गहरा प्रभाव ——
विधानसभा में प्रवेश, मंत्री कक्ष में बैठकर संवाद, अधिकारियों से सीधी चर्चा और लोकतांत्रिक व्यवस्था को करीब से समझने का यह पूरा अनुभव रिकॉर्डेड नहीं बल्कि पूरी तरह लाइव रहा। यही कारण रहा कि यह पहल प्रतिभागियों और उपस्थित लोगों पर गहरा प्रभाव छोड़ती दिखाई दी।
जो लोग कभी लोकतांत्रिक व्यवस्था से दूर जंगलों में संघर्ष का जीवन जी रहे थे, वे आज विकास, सहकारिता और सामाजिक भागीदारी पर सरकार के साथ आमने-सामने चर्चा करते नजर आए। विशेषज्ञ इसे नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में संवाद आधारित छत्तीसगढ़ मॉडल की महत्वपूर्ण शुरुआत मान रहे हैं।
(सौम्या तिवारी पुरोहित)
(सब एडिटर – बीटी न्यूज़)



