सरकार द्वारा व्यापक सुधारों के तहत कक्षा 1 से 12 तक गुणवत्तापूर्ण, समकालीन और कौशल-आधारित शिक्षा का लक्ष्य; पुस्तकों का अनुकूलन, मातृभाषा में पढ़ाई और RTE के तहत 12वीं तक मुफ्त शिक्षा का प्रावधान
Published on: February 15, 2026
By: BTNI
Location: Rajnandgaon/Raipur, India
छत्तीसगढ़ सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के माध्यम से राज्य की शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक और दूरगामी परिवर्तन ला रही है। 15 जुलाई 2024 से पूरे प्रदेश में यह नीति लागू हो चुकी है, जबकि शैक्षणिक सत्र 2025-26 से नई संरचना पूरी तरह प्रभावी हो जाएगी। इस नीति के क्रियान्वयन से राज्य के लाखों छात्र-छात्राओं को आधुनिक, समावेशी और भविष्योन्मुखी शिक्षा मिलेगी, जो उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सक्षम बनाएगी।एनईपी 2020 के प्रमुख प्रावधानों के अनुसार, पारंपरिक 10+2 संरचना को बदलकर 5+3+3+4 मॉडल अपनाया जा रहा है। इसमें फाउंडेशनल स्टेज (5 वर्ष), प्रिपरेटरी स्टेज (3 वर्ष), मिडिल स्टेज (3 वर्ष) और सेकंडरी स्टेज (4 वर्ष) शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ में इस बदलाव को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। कक्षा 1 से 3 और कक्षा 6 तक की पुस्तकों को पहले ही अनुकूलित किया जा चुका है, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, समकालीन और खेल-आधारित शिक्षा मिल सके। मातृभाषा या स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है, जो बच्चों की समझ को मजबूत करेगा।इसके अलावा, RTE (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम के तहत अब छत्तीसगढ़ में कक्षा 12वीं तक मुफ्त शिक्षा का प्रावधान लागू हो गया है। बच्चों की आयु कट-ऑफ तिथि 31 दिसंबर 2026 तक 5 से 6 वर्ष 6 माह के बीच निर्धारित की गई है, जिससे अधिक बच्चे स्कूल में शामिल हो सकेंगे।
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नीति में कौशल शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, डिजिटल साक्षरता और बहु-विषयक शिक्षा पर विशेष फोकस है। उच्च शिक्षा में भी सेमेस्टर सिस्टम, क्रेडिट फ्रेमवर्क और मल्टीडिसिप्लिनरी कोर्सेस को बढ़ावा दिया जा रहा है।छत्तीसगढ़ सरकार ने एनईपी के 201 प्रमुख कार्यों में से 67 को पूर्ण कर लिया है, जबकि 100 पर प्रगति जारी है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बाल वाटिका, फ्लिप लर्निंग, NIPUN भारत मिशन और अन्य पहलों को तेज किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने जुलाई 2024 से सभी राजकीय और निजी विश्वविद्यालयों में नीति लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है। इससे छात्रों को लचीली पढ़ाई, इंटर्नशिप और रिसर्च के अवसर मिलेंगे।
यह परिवर्तन राज्य के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि एनईपी 2020 के क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो और राज्य में साक्षरता दर में उल्लेखनीय वृद्धि हो।राजनांदगांव सहित पूरे प्रदेश में इस नीति की जानकारी और जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। अभिभावक, शिक्षक और छात्र इस बदलाव से उत्साहित हैं, क्योंकि यह न केवल किताबी ज्ञान बल्कि जीवन कौशलों पर भी केंद्रित है। छत्तीसगढ़ में एनईपी 2020 का सफल क्रियान्वयन पूरे देश के लिए एक मॉडल साबित हो सकता है।



