श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने लिया फैसला, उत्तराखंड सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा- तैयारियां शुरू, श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित; पंचमुखी डोली 19 अप्रैल से रवाना
Published on: February 15, 2026
By: BTNI
Location: Rudraprayag, India
भोलेनाथ के भक्तों के लिए खुशखबरी! श्री केदारनाथ धाम के कपाट इस साल 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। यह ऐलान आज महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर केदारनाथ के शीतकालीन गद्दीस्थल उखीमठ के ओमकारेश्वर मंदिर में हुआ। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने पंचांग गणना के आधार पर यह मुहूर्त तय किया, जिसमें वृषभ लग्न में पूजा-अर्चना के बाद द्वार खोलने का समय निर्धारित किया गया।महाशिवरात्रि के दिन विशेष अनुष्ठान और पूजा के बाद समिति के पदाधिकारियों, पुजारियों और वेदपाठियों की मौजूदगी में यह घोषणा की गई।
समिति के पीआरओ हरिश गौर ने बताया कि यह परंपरा के अनुसार हर साल महाशिवरात्रि पर केदारनाथ के कपाट खुलने की तारीख तय की जाती है। केदारनाथ मंदिर, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, सर्दियों में बंद रहता है और गर्मियों में चारधाम यात्रा के दौरान खुलता है।उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस ऐलान पर खुशी जताते हुए कहा, “22 अप्रैल को केदारनाथ के द्वार खुलेंगे। तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हम देवभूमि उत्तराखंड आने वाले सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।” उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चारधाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कर रही है, जिसमें सड़कें, हेलीकॉप्टर सेवाएं, चिकित्सा सुविधाएं और सुरक्षा बल शामिल हैं।
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परंपरा के अनुसार, केदारनाथ की पंचमुखी डोली 19 अप्रैल को उखीमठ से रवाना होगी, 20 अप्रैल को गौरीकुंड पहुंचेगी और 21 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंचकर स्थापित होगी। 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे पारंपरिक रस्मों के साथ कपाट खोले जाएंगे। इस दौरान हजारों भक्त पहले दिन ही दर्शन के लिए पहुंचते हैं, इसलिए रजिस्ट्रेशन और ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य है।चारधाम यात्रा 2026 का शेड्यूल भी लगभग तय हो गया है। केदारनाथ के बाद बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे।
गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट अक्षय तृतीया (19 अप्रैल) पर खुलेंगे। यह यात्रा मई से नवंबर तक चलती है, जिसके बाद सर्दियों में मंदिर बंद हो जाते हैं।केदारनाथ मंदिर हिमालय की गोद में 3583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पहुंचने के लिए गौरीकुंड से 16-18 किमी की पैदल यात्रा या हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध है। हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए आते हैं। इस साल भी भारी भीड़ की उम्मीद है, इसलिए सरकार ने रजिस्ट्रेशन पोर्टल को सक्रिय किया है।यह घोषणा भक्तों में उत्साह भर रही है।
सोशल मीडिया पर लोग “हर हर महादेव” और “बाबा केदार की जय” लिखकर खुशी जाहिर कर रहे हैं। केदारनाथ यात्रा न केवल आध्यात्मिक महत्व रखती है, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पर्यटन और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है।श्रद्धालुओं से अपील है कि यात्रा से पहले मौसम, स्वास्थ्य और रजिस्ट्रेशन की जानकारी जरूर लें। बाबा केदार के दर्शन का यह पावन अवसर सभी को सुख-समृद्धि प्रदान करे। जय भोलेनाथ!



