केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का बड़ा ऐलान: “आत्मनिर्भर भारत के लिए सब्जियों और फूलों में भी आत्मनिर्भर बनना होगा” – रिसर्च आधारित खेती, उच्च उपज वाली किस्मों पर फोकस से किसानों की आय होगी दोगुनी, अब विदेशी आयात की कोई जरूरत नहीं!
Published on: February 09, 2026
By: BTNI
Location: New Delhi/ Bangalore, India
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ा ऐलान किया है कि भारत फलों, सब्जियों और फूलों के उत्पादन में पूर्ण आत्मनिर्भर (सेल्फ-रिलायंट) बन जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इन क्षेत्रों में अब आयात की कोई जरूरत नहीं रहेगी। यह घोषणा आत्मनिर्भर भारत अभियान को बागवानी (हॉर्टिकल्चर) तक विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।श्री चौहान ने रविवार को बेंगलुरु में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR) में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य सरल है। हम फल, फूल और सब्जियों का आयात नहीं करेंगे।
हमें इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनना होगा।” उन्होंने जोर दिया, “आत्मनिर्भर भारत के लिए सब्जियों और फूलों में भी आत्मनिर्भर बनना जरूरी है। हम इन्हें आयात नहीं करेंगे।”मंत्री ने वर्तमान उत्पादन को “ऐतिहासिक” बताया। हाल के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में भारत की बागवानी उत्पादन 367.72 मिलियन टन पहुंच गया है, जिसमें फलों का उत्पादन 114.51 मिलियन टन, सब्जियों का 219.67 मिलियन टन और अन्य बागवानी फसलों का 33.54 मिलियन टन शामिल है। पिछले दशक में यह उत्पादन 280.70 मिलियन टन से बढ़कर इस स्तर पर पहुंचा है, जो बागवानी को कृषि क्षेत्र का सबसे चमकदार हिस्सा बनाता है।

श्री चौहान ने अवोकाडो का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले हम इसे आयात करते थे, लेकिन अब घरेलू उत्पादन शुरू हो गया है। इसी तरह ड्रैगन फ्रूट जैसे उभरते फलों में भी आत्मनिर्भरता का लक्ष्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उच्च मांग वाली फसलों की पहचान करें और किसानों को इनकी खेती के लिए प्रोत्साहित करें, लेकिन लाभप्रदता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। “किसान तभी उत्पादन बढ़ाएंगे जब यह लाभदायक होगा,” उन्होंने कहा।नीति का मुख्य फोकस अनुसंधान-आधारित खेती पर है।
ICAR जैसे संस्थानों के माध्यम से किसान-अनुकूल, उच्च उपज वाली और उच्च लाभ वाली किस्मों पर जोर दिया जा रहा है। पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान को कम करने के लिए शेल्फ लाइफ बढ़ाने पर विशेष ध्यान है। उदाहरण के लिए, टमाटर और शरीफा (कस्टर्ड एप्पल) जैसी फसलों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने की मांग पर काम चल रहा है।यह कदम न केवल आयात निर्भरता खत्म करेगा, बल्कि किसानों की आय में वृद्धि, रोजगार सृजन और निर्यात क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा। भारत पहले से ही कई फलों और सब्जियों का प्रमुख उत्पादक है, लेकिन कुछ प्रीमियम या ऑफ-सीजन आइटम्स आयात होते हैं।
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अब रिसर्च, हाई-डेंसिटी प्लांटिंग और वैल्यू एडिशन से इन गैप्स को भरने की योजना है।कृषि क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों में औसतन 4.4% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो वैश्विक औसत से अधिक है। बागवानी अब कृषि जीडीपी में 33% का योगदान दे रही है। यह घोषणा किसानों के लिए आय सुरक्षा, प्रतिस्पर्धात्मकता और समग्र आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।



