धार्मिक विरासत को मिलेगी नई पहचानमां विंध्यवासिनी के पावन धाम की ओर बढ़ते कदम: जिला प्रशासन ने प्रस्ताव तैयार किया, कैबिनेट में मुहर लगने की उम्मीद – जानें पूरा इतिहास और प्रभाव
Published on: November 30, 2025
By: BTNI
Location: Lucknow, India
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पुनरुद्धार के अपने अभियान को और मजबूत करने जा रही है। मिर्जापुर जिले का नाम बदलकर ‘विंध्याचल धाम’ करने का प्रस्ताव अब अंतिम चरण में है। जिला प्रशासनिक समिति की हालिया बैठक में इस पर पूर्ण सहमति बनी है, और जल्द ही यह प्रस्ताव राज्य कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ की मौजूदगी में हुई इस बैठक ने इस बदलाव को नई गति दी है।प्रस्ताव का इतिहास: दशकों पुरानी मांग, अब साकार होने को तैयारयह मांग कोई नई नहीं है।
1990 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने मिर्जापुर के एक हिस्से का नाम बदलकर ‘विंध्याचल मंडल’ किया था, लेकिन जिले का पूरा नाम तब भी वही रहा। 2018 में भाजपा नेता रत्नाकर मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इसकी मांग दोहराई थी। 2021 में कैबिनेट मंत्री रामाशंकर सिंह पटेल ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था, “मिर्जापुर को ‘विंध्य धाम’ के नाम से जाना जाना चाहिए। फैजाबाद को अयोध्या बनाया गया, उसी तरह यहां भी करोड़ों रुपये का निवेश हो रहा है।” अब 2025 में यह प्रस्ताव जिला स्तर पर तैयार हो चुका है, जो स्थानीय निवासियों, तीर्थयात्रियों और धार्मिक संगठनों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करेगा।
क्यों ‘विंध्याचल धाम’? मां विंध्यवासिनी की महिमा और त्रिकोण दर्शन की पहचानमिर्जापुर की असली शान मां विंध्यवासिनी देवी का पावन धाम है, जो गंगा नदी के तट पर स्थित है। यह भारत के प्रमुख शक्ति पीठों में से एक है, जहां मां दुर्गा के लक्ष्मी रूप की पूजा होती है। विंध्याचल धाम की खासियत यह है कि यहां देवी के तीनों रूप – लक्ष्मी (मां विंध्यवासिनी), सरस्वती (मां अष्टभुजा) और काली (मां कालीखोह) – के अलग-अलग मंदिर हैं।
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त्रिकोण दर्शन (विंध्याचल-अष्टभुजा-कालीखोह) के लिए हर साल लाखों भक्त पैदल यात्रा करते हैं।पौराणिक कथाओं के अनुसार, पद्म पुराण और देवी भागवत पुराण में विंध्याचल को मां विंध्यवासिनी का निवास स्थान बताया गया है। महाभारत में भी युधिष्ठिर द्वारा इसकी स्तुति की गई है। योगी सरकार का मानना है कि नाम बदलाव से जिले की धार्मिक पहचान मजबूत होगी, जो पर्यटन को बढ़ावा देगा। हाल ही में प्रस्तावित विंध्याचल कॉरिडोर (काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर) का निर्माण भी इसी दिशा में एक कदम है, जो करोड़ों रुपये के निवेश से धाम को और भव्य बनाएगा।
जनता की राय: समर्थन के साथ सकारात्मक उत्साहमिर्जापुर की सड़कों पर उतरकर लोगों से बात करने पर साफ है कि अधिकांश निवासी इस बदलाव के पक्ष में हैं। एक स्थानीय व्यापारी ने कहा, “मां के आंचल में बसे हैं तो नाम भी यही होना चाहिए। विंध्याचल धाम से हमारी पहचान बढ़ेगी।” एक तीर्थयात्री ने जोड़ा, “यह आस्था का प्रतीक बनेगा, जैसे अयोध्या का नाम बदलाव हुआ।” हालांकि, कुछ आलोचक इसे विकास के मुद्दों (जैसे स्वास्थ्य, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर) से ध्यान भटकाने वाला बता रहे हैं। फिर भी, समग्र जनमत मुख्यमंत्री योगी के फैसले का इंतजार कर रहा है।
संभावित प्रभाव: पर्यटन बूम और आर्थिक उछालनाम बदलाव से धार्मिक पर्यटन में बढ़ोतरी की उम्मीद है। वर्तमान में विंध्याचल धाम वाराणसी (69 किमी) और प्रयागराज से जुड़ा होने से पहले ही लाखों श्रद्धालु आते हैं। रेलवे स्टेशन (मिर्जापुर) से धाम मात्र 9 किमी दूर है, और एनएच-2 से सड़क संपर्क मजबूत है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह बदलाव स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, होटल, परिवहन और हस्तशिल्प उद्योग को नई ऊंचाइयां देगा।
पिछले एक साल में उत्तर प्रदेश में 25 से अधिक स्थानों के नाम बदले जा चुके हैं, जो इस नीति की निरंतरता दर्शाता है।प्रशासन के अनुसार, प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर जल्द ही राज्य सरकार को भेजा जाएगा। आधिकारिक घोषणा के बाद ‘विंध्याचल धाम’ नक्शे पर चमकेगा।


