शासन सोया, खाकी की मनमानी चरम पर?
Published on: June 08, 2026
By: BTNI
Location: Dhamtari, India
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। रात करीब 1 बजे मूवी देखकर पत्नी और छोटे बच्चे के साथ घर लौट रहे एक युवक को अर्जुनी थाना प्रभारी चंद्रकांत साहू ने बिना वजह रोका, गाली-गलौज की, बाइक की चाबी छीन ली और परिवार के सामने थप्पड़ मारकर मारपीट की। युवक ने जब पुलिस के दुर्व्यवहार का वीडियो बनाना शुरू किया तो अधिकारी और भड़क गए। यह घटना 4-5 मई की मध्यरात्रि मुजगहन-पोटियाडीह बाईपास पर हुई।
युवक (स. किशोर) का आरोप है कि वह परिवार के साथ फिल्म देखकर आ रहा था। पुलिस ने नंबर प्लेट टूटी होने का हवाला देकर रोका। मूवी टिकट दिखाने के बावजूद उन्होंने संदेह जताया और अभद्र व्यवहार किया। जब युवक ने मोबाइल पर रिकॉर्डिंग शुरू की तो SHO चंद्रकांत साहू ने उसके साथ मारपीट कर दी। युवक ने बताया, “बीवी-बच्चे के सामने मुझे पीटा गया। मैं सिर्फ अपनी बात रख रहा था।” वीडियो में अधिकारी का मुस्कुराता चेहरा साफ दिख रहा है, जो जनता को और आक्रोशित कर रहा है।

पुलिस का बचाव और सवाल
पुलिस का कहना है कि रूटीन चेकिंग के दौरान बाइक का फ्रंट नंबर प्लेट टूटा हुआ था, दस्तावेजों में विसंगति थी और देर रात संदिग्ध मूवमेंट था। उन्होंने दावा किया कि युवक आक्रामक हो गया और रिकॉर्डिंग करके उकसाने की कोशिश की। बाद में स्थानीय पार्षद के माध्यम से पहचान की पुष्टि कर उसे जाने दिया गया और दस्तावेज थाने में जमा करने को कहा गया।लेकिन सवाल यह है — क्या रात 1 बजे परिवार के साथ लौट रहे व्यक्ति को इस तरह अपमानित करना, चाबी छीनना और थप्पड़ मारना उचित है? क्या पब्लिक रिकॉर्डिंग पर पुलिस को इतना आपत्ति है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे नागरिक का अधिकार माना है? वीडियो देखने वाले हजारों लोग पूछ रहे हैं — यह पुलिस है या गुंडे?
शासन सोया हुआ है या आंखें मूंद ली हैं?
यह घटना केवल एक Isolated incident नहीं लगती। छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में पुलिस की मनमानी की शिकायतें लगातार आ रही हैं। आम आदमी रात में बाहर निकलने से डरने लगा है। जहां सरकार “कानून व्यवस्था” की बात करती है, वहां खाकी वर्दी में कुछ अधिकारी अपनी धौंस चला रहे हैं। धमतरी के इस मामले ने पूरे प्रदेश में आक्रोश पैदा कर दिया है। सोशल मीडिया पर #JusticeForVictim और SHO चंद्रकांत साहू के खिलाफ ट्रेंड चल रहा है।
क्या यह अधिकारी अकेले हैं? या पुलिस विभाग में ऐसी संस्कृति पनप रही है जहां आम नागरिक को संदिग्ध समझा जाता है? न जाने कितने जिले — धमतरी, रायपुर, दुर्ग या अन्य जगहों पर ऐसे अधिकारी अपनी मनमानी चला रहे होंगे, जिनके वीडियो वायरल नहीं हुए। शासन-प्रशासन की नींद कब खुलेगी? क्या मुख्यमंत्री कार्यालय इस पर संज्ञान लेगा या फिर “जांच” के नाम पर फाइल दबा दी जाएगी?

जनता का गुस्सा और मांग
सामाजिक संगठनों, पुरुष अधिकार समूहों और आम नागरिकों ने इस घटना की निंदा की है। मांग की जा रही है कि:
SHO चंद्रकांत साहू को तत्काल सस्पेंड किया जाए।
स्वतंत्र जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
पुलिसकर्मियों को संवेदनशीलता और कानून सम्मान का प्रशिक्षण दिया जाए।
एक नागरिक ने लिखा, “पुलिस हमारी सुरक्षा के लिए है, हमारी इज्जत लूटने के लिए नहीं।” परिवार के सामने अपमान और मारपीट किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं।
निष्कर्ष: सुधार की जरूरत
यह वायरल वीडियो पुलिस सुधार की मांग को फिर से मजबूत कर रहा है। जहां किसान-मजदूर बचाओ अभियान जैसे सामाजिक कार्य चल रहे हैं, वहां पुलिस की छवि सुधारने के लिए भी ठोस कदम उठाने की जरूरत है। अगर शासन समय रहते नहीं जागा तो आम आदमी का भरोसा पूरी व्यवस्था से उठ जाएगा।क्या छत्तीसगढ़ पुलिस आम आदमी की रक्षा करेगी या खुद ही डर का कारण बनेगी? सवाल उठ खड़ा हुआ है और जवाब शासन को देना होगा।
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